जांजगीर-चांपा. कहते हैं अमीर हो या गरीब, कानून सबके लिए बराबर है। गुनाहगार को उसके जुर्म की सजा मिलती ही है, लेकिन जमीन दलाल साजनमल की रसूख के आगे कानून की परिभाषा को चुटकियों में बदल गई है। लाखों की जमीन घोटाला मामले में फंसे साजनमल को सलाखों के पीछे रखने के बजाय पिछले एक सप्ताह से जिला अस्पताल के पेइंग वार्ड में सारी सुख-सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है। इससे एक ओर जहां कायदे-कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है। वहीं जेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
उल्लेखनीय है कि कोतवाली पुलिस ने ग्राम पेण्ड्री में अवस्थित लाखों की जमीन के दस्तावेज में कूटरचना कर अपने नाम पर करवाने के आरोप में जिला मुख्यालय जांजगीर निवासी जमीन दलाल साजनमल बजाज को बीते 23 अप्रैल की शाम भादवि की धारा 420, 467, 468, 471, 120 बी के तहत गिरफ्तार किया था। इस मामले का मुख्य आरोपी साजनमल बजाज है, जबकि मामले के पांच आरोपी स्टाम्प वेंडर गिरधर गोपाल, भरत राठौर, कार्तिक देवांगन, राजू राठौर और दाऊराम देवांगन की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है। मुख्य आरोपी साजनमल को गिरफ्तार करने के बाद कोतवाली पुलिस ने उसे जिला जेल जांजगीर भेज दिया था। गिरफ्तारी के दो दिन बाद यानी 25 अप्रैल को बीमार होने का हवाला देकर मुख्य आरोपी साजनमल बजाज को जिला अस्पताल शिफ्ट करवा दिया गया, तब से वह जिला अस्पताल के पेइंग वार्ड में आराम फरमा रहा है।
इसकी जानकारी होने पर ‘दैनिक नवीन कदम’ की टीम ने जब 1 मई की दोपहर जिला अस्पताल पहुंचकर जायजा लिया तो पता चला कि स्वयं के खर्च पर जमीन दलाल साजनमल को बीते 25 अप्रैल से पेइंग वार्ड क्रमांक 1 में भर्ती करवाया गया है। पेइंग वार्ड का मुआयना करने पर पता चला कि जमीन दलाल साजनमल को वहां वे तमाम् सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है, जो घर जैसी है। वार्ड में ठंडी हवा खाता साजनमल बजाज गद्देदार बेड पर सोया हुआ था। जैसे ही उसकी तस्वीर ली गई, वह बिस्तर से उठकर बैठ गया। जब उससे पूछा गया कि उसे क्या तकलीफ है और किसलिए यहां भर्ती करवाया गया है तो उसने बताया कि उसके कमर और पैर में दर्द है। उसकी सुरक्षा में तैनात जेल के आरक्षक ने बताया कि शारीरिक तकलीफ की वजह से साजनमल को पिछले 25 अप्रैल से पेइंग वार्ड में रखा गया है। उसे क्या तकलीफ है, इसके संबंध में उसे ज्यादा कुछ मालूम नहीं है, लेकिन चर्चा करने पर पता चला है कि उसे कमर और पैर में दर्द है। पेइंग वार्ड का मुआयना करने पर पता चला कि जमीन दलाल साजनमल को वहां वे सब सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जो जेल में कभी नहीं मिलती। वहां उसे घर जैसा भोजन एवं अन्य पकवान और दैनिक उपयोग की सामग्री सहज ढंग से उपलब्ध हो रही है। बहरहाल, जमीन घोटाले के मुख्य आरोपी साजनमल को जेल की चारदिवारी के बीच रखने के बजाय बीमार बताकर जिला अस्पताल में व्हीआईपी सुविधा मुहैया कराया जाना कई सवालों को जन्म दे रहा है। इससे एक बार साफ हो गया है कि जो रसूखदार है, उसके लिए कायदे-कानून कोई मायने नहीं रखता।
खेल में गिरोह की सक्रिय भूमिका
जिला जेल जांजगीर में वर्तमान में करीब पौने तीन सौ बंदी निरूद्ध हैं, जिनमें से कई रसूखदार हैं। ऐसे रसूखदारों को जिला जेल से जिला अस्पताल तक पहुंचाने में एक गिरोह काम कर रहा है। बताया जाता है कि गिरोह के लोगों की सांठगांठ जेल अधीक्षक से है। गिरोह के लोग संंबंधित बंदी के परिजनों से मोटी रकम लेकर उसे बीमार बताते हुए जिला जेल के पेइंग वार्ड में शिफ्ट करवा देते हैं और यहां उसे व्हीआईपी सुविधाएं दी जाती है। जबकि नियमत: जिस बंदी को बीमार होने का हवाला देकर जिला अस्पताल में भर्ती करवाया जा रहा है, उसका जिला जेल में ही विशेषज्ञों से स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाना चाहिए, जिससे पता चल सके कि वह वास्तव में अस्पताल में दाखिल कराने लायक है अथवा नहीं, लेकिन यहां रसूख के दम पर नियम-कायदों को रौंदा जा रहा है। यह भी पता चला है कि रसूखदार बंदी को जिला जेल में भर्ती करवाने के बाद उसके परिजन बड़े वकीलों को पकडक़र उसके जमानत के लिए प्रयास करते हैं। इस बीच यदि जमानत मिल जाती है तो बंदी अस्पताल से सीधे अपने घर पहुंच जाता है और यदि जमानत नहीं मिलती तो जिला अस्पताल में भर्ती रखने की समयावधि लगातार बढ़वाई जाती है।
जिला जेल में चल रहा रामराज
खोखराभाठा स्थित जिला जेल में व्यवस्था सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती जा रही है। कुछ दिन पहले जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देश पर कई न्यायाधीश एवं कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक ने जिला जेल का निरीक्षण किया था, तब वहां कई खामियां मिली थी। इसके लिए जेल अधीक्षक को खूब फटकार भी लगी थी, इसके बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जिला जेल में निरूद्ध कई ऐसे बंदी हैं, जो वास्तव में गंभीर बीमारी से पीडि़त हैं, लेकिन उन्हें स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने के मामले में जेल प्रशासन रूचि नहीं ले रहा है। जबकि हाई प्रोफाइल मामलों के बंदियों को जेल में एक-दो दिन रखने के बाद बीमार बताकर सीधे जिला अस्पताल पहुंचा दिया जा रहा है, ताकि जेल में खानपान से लेकर अन्य सुविधाओं में किसी तरह की कमी न हो। इतना सब कुछ खुलेआम हो रहा है, इसके बाद भी जिला प्रशासन व पुलिस महकमा अपनी आंखों पर पट्टी बांधे हुए है। वहीं गरीब और जरूरतमंद बंदियों के हित की बात करने वाला जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भी केवल शिविर की औपचारिकता निभाने में जुटा हुआ है।

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