शुक्रवार, 24 मार्च 2017

जनसुनवाई : न मुनादी कराई और न नोटिस चस्पा किया

नपं ने गुपचुप तरीके से दी एनओसी, क्षेत्रवासियों में आक्रोश

 

नवीन कदम@बलौदा. बलौदा क्षेत्र आदिवासी इलाका है। इस क्षेत्र के गांवों में रहने वाले ज्यादातर लोग खेती-बाड़ी पर ही निर्भर हैं, लेकिन उनके खेतों के आसपास बहुतायत संख्या में कोलवाशरी खोलकर उन्हें भूखों मारने की स्थिति में लाया जा रहा है। साथ ही प्रदूषण से लोगों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां घर कर रही है। ठडग़ाबहरा में प्रस्तावित कोलवाशरी की जनसुनवाई के लिए न तो मुनादी करवाई गई है और न ही आम जनता की जानकारी के लिए सार्वजनिक स्थलों पर नोटिस चस्पा किया गया है।

बलौदा के वार्ड क्रमांक एक ठडग़ाबहरा में पारस नामक कोलवाशरी प्रस्तावित है, जिसके लिए 25 मार्च को सुबह 11 बजे से बलौदा के मंडी प्रांगण में पर्यावरणीय जनसुनवाई रखी गई है। इस कोलवाशरी की क्षमता 0.96 मिलियन टन रखी गई है। यह कोलवाशरी पहले से ही संचालित कोलवाशरी हिंद एनर्जी के ठीक समीप शुरू होने वाली है। प्रस्तावित कोलवाशरी की पर्यावरणीय जनसुनवाई के लिए प्रशासनिक तैयारियां हो चुकी हैं। क्षेत्र में पहले से ही संचालित पांच कोलवाशरी के प्रदूषण से परेशान जनता नई कोलवाशरी खोले जाने का भरसक विरोध करने की तैयारी में हैं। ठडग़ाबहरा के दूजराम जांगड़े का कहना है कि बलौदा क्षेत्र आदिवासी इलाका है। इस क्षेत्र के गांवों में रहने वाले ज्यादातर लोग खेती-बाड़ी पर ही निर्भर हैं, लेकिन उनके खेतों के आसपास बहुतायत संख्या में कोलवाशरी खोलकर उन्हें भूखों मारने की स्थिति में लाया जा रहा है। साथ ही प्रदूषण से लोगों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां घर कर रही है। छोटेलाल कुर्रे ने कहा कि बलौदा के मंडी प्रांगण में 25 मार्च को आयोजित जनसुनवाई की जानकारी नहीं दी गई है। क्षेत्र में मुनादी भी नहीं करवाई गई है। नपं ने गुपचुप तरीके से कोलवाशरी प्रबंधन को एनओसी दी है, जिसका जनसुनवाई स्थल पर विरोध किया जाएगा। 

ठडग़ाबहरा के ही भुवन भास्कर ने बताया कि पारस कोलवाशरी प्रबंधन ने नपं अध्यक्ष और पार्षदों को खरीद लिया है। नपं के अधिकारी और क्षेत्र के राजस्व अधिकारी भी मोटी रकम लेकर शांत बैठे हुए हैं। कोलवाशरी प्रबंधन ने सबको मुंह मांगी रकम दी है, जिसके कारण जनता के हितों की अनदेखी की जा रही है। गोर्वधन कुर्रे ने कहा कि कोलवाशरी प्रबंधन ने एक-एक पार्षद को दस-दस हजार रुपए देकर खरीदा है, ताकि वे आपत्ति दर्ज न कराएं। इसी तरह अध्यक्ष और नपं सीएमओ ने भी मोटी रकम लेकर कोलवाशरी प्रबंधन को चुपचाप कोलवाशरी की स्थापना के लिए एनओसी दे दी है।

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