प्रशासन की उपेक्षा के कारण बंद होने की कगार पर थी योजना
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जांजगीर-चांपा. भारतमाता वाहिनी समूहों की जिम्मेदारी आबकारी विभाग को मिलने के बाद वे अब उन्हें एक बार फिर सक्रिय करने में लग गए हैं। जिले के दर्जनों समूहों को एक बार फिर से नशामुक्ति अभियान के लिए सक्रिय किया जा रहा है।
गौरतलब है कि नई आबकारी नीति के तहत नए वित्तीय वर्ष विभाग के कर्मचारी शराब दुकानों का संचालन करेंगे। ऐसे में गांव-गांव में नशामुक्ति और शराबबंदी को लेकर भारतमाता वाहिनी समूहों को सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है। आबकारी विभाग के अफसरों की मानें तो नशामुक्ति अभियान को लेकर वर्ष 2011 में भारतमाता वाहिनी समूहों का गठन किया गया था, लेकिन कुछ वर्षो बाद समूहों की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग को सौंप दी गई थी। उद्देश्य पूर्ति में निष्क्रियता और प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण योजना बंद होने की कगार पर थी, लेकिन नई आबकारी नीति के बाद समाज कल्याण विभाग द्वारा दोबारा भारतमाता वाहिनी की जिम्मेदारी आबकारी विभाग को सौंप दी गई। इसके बाद आबकारी विभाग के निर्देशों पर नशामुक्ति और शराबबंदी को लेकर भारतमाता वाहिनी गांव-गांव में अपने दल का गठन कर लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करेंगी। प्रभारी सहायक आयुक्त आबकारी विकास गोस्वामी ने बताया कि नए वित्तीय सत्र में नवगठित भारतमाता वाहिनी नशामुक्ति अभियान की शुरूआत करेंगे।

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