शुक्रवार, 16 जून 2017

भैसतरा के बंधवा तालाब गहरीकरण में लाखों का भ्रष्टाचार, सरपंच और रोजगार सहायक ने काम करवाए बगैर डकारी राशि

आशीष साहू@जांजगीर-चांपा. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के कामों में किस कदर भर्राशाही हो रही है, यह देखना है तो अकलतरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भैसतरा चले जाईए। इस पंचायत के सरपंच और रोजगार सहायक ने बंधवा तालाब गहरीकरण के नाम पर लाखों का भ्रष्टाचार किया है। गांव के तालाब में मनरेगा के तहत लाखों रुपए खर्च कराया जाना बताया जा रहा है, लेकिन तालाब की मौजूदा स्थिति यह बयां कर रही है कि वहां गहरीकरण हुआ ही नहीं है। यही वजह है कि लाखों रुपए खर्च होने के बाद भी बंधवा तालाब मैदान की तरह समतल नजर आ रहा है।

जिले में मनरेगा में भ्रष्टाचार थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। पिछले कुछ सालों के भीतर जिले में योजना में हुए भ्रष्टाचार के सैकड़ों मामले सामने आए हैं, लेकिन उन मामलों में संलिप्त अधिकारी-कर्मचारी तथा पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ किसी तरह की कड़ी कार्यवाही नहीं की गई है। इस वजह से योजना में भ्रष्टाचार चरम पर है। ऐसा ही एक मामला अकलतरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भैसतरा में सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत गांव के बंधवा तालाब के गहरीकरण के लिए करीब दस लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। उक्त राशि से तालाब की दशा संवारा जाना था, ताकि ग्रामीणों को निस्तारी की समस्या से जूझना न पड़े, लेकिन गांव की सरपंच रामकली नेताम और रोजगार सहायक जगूलाल धनुहार ने योजना के उद्देश्य को ही बदल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन्होंने तालाब गहरीकरण के नाम पर खानापूर्ति करते हुए स्वीकृत राशि में से मोटी रकम हजम कर ली है। ग्राम पंचायत द्वारा जिस बंधवा तालाब के गहरीकरण के नाम पर राशि खर्च करने की बात कही जा रही है, उस तालाब में वास्तव में कोई काम हुआ ही नहीं है। इस वजह से तालाब वर्तमान में मैदान की तरह समतल नजर आ रहा है। ऐसे में आगामी दिनों में इस तालाब का लाभ ग्रामीणों को मिलने का आसार नजर नहीं आ रहा है।
 

नि:शक्त और वृद्धों को बताया मजदूर

मनरेगा के तहत राशि स्वीकृत होने के बाद ग्राम पंचायत भैसतरा के सरपंच और रोजगार सहायक ने योजनाबद्ध तरीके से लाखों के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है। मस्टररोल में रोजाना चार से पांच सौ मजदूरों की हाजिरी भरी गई है, जबकि असल में चालीस-पचास लोगों को काम पर लगाकर गहरीकरण की औपचारिकता निभाई गई है। बताया जा रहा है कि मस्टररोल में जिन लोगों का नाम भरा गया है, उनमें से अधिकांश लोग कभी मजदूरी करने गए ही नहीं हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, मस्टररोल में ऐसे-ऐसे लोगों को मजदूर दर्शाया गया है, जो नि:शक्तता और वृद्धा पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे लोगों से बात करने पर पता चला कि सरपंच और रोजगार सहायक ने उनका नाम मस्टररोल में दर्ज किया है, इसकी खबर उन्हें दूर-दूर तक नहीं है।
 

पंचायत सचिव ने स्वीकारी गड़बड़ी

ग्राम पंचायत भैसतरा के बंधवा तालाब में मनरेगा के तहत हुए लाखों के भ्रष्टाचार की स्वीकारोक्ति पंचायत सचिव कमलेश सिंह मरावी ने की है। सचिव का कहना है कि मस्टररोल में जिनती संख्या दर्शाई जा रही है, उतने मजदूरों ने काम नहीं किया है। इसके अलावा निर्धारित मापदंड के तहत गहरीकरण कार्य भी नहीं करवाया गया है। हाल ही में उनकी इंजीनियर से बात हुई है, जिन्होंने कार्य का शीघ्र मूल्यांकन कर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने की बात कही है। इधर, सरपंच रामकली नेताम का कहना है कि गहरीकरण कार्य में कहीं कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। गांव के कुछ लोग बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। चाहे तो आप गांव आकर तालाब में हुए गहरीकरण कार्य का मुआयना भी कर सकते हैं।

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