गुरुवार, 8 जून 2017

सेम टाइम कंपनी में मोटी रकम फंसाकर माथा पीट रहे लोग, जालसाज कंपनी के पचड़े में फंसे जिले के कई अधिवक्ता व पत्रकार

जांजगीर-चांपा. किताबों की स्केनिंग के बदले रुपए देने के लिए चर्चित सेम टाइम कंपनी कारोबारियों से डिपाजिट के रूप में करीब एक अरब रुपए वसूल कर चंपत हो गई है। इस खबर से कंपनी में रकम लगाने वाले करीब 2 हजार कारोबारियों के होश उड़ गए हैं। बताया जा रहा है कि इस कंपनी के पचड़े में जिले के कई अधिवक्ता और पत्रकार भी फंसे हैं, जिन्होंने कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के फेर में अपने मेहनत की गाढ़ी कमाई लुटाई है। कंपनी के डॉयरेक्टर व अधिकारियों के अचानक गायब होने की खबर से ऐसे लोगों में हडक़ंप मचा हुआ है। इधर, मामले की सूचना मिलते ही बिलासपुर पुलिस ने जालसाजों की पतासाजी शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि बिलासपुर के सिविल लाइन थाने में इस मामले में धोखाधड़ी का अपराध भी दर्ज कर लिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिलासपुर के इंदु उद्यान चौक में सेम टाइम कंपनी का मुख्यालय है। इसके साथ ही लिंक रोड, विनोबानगर सहित अन्य जगहों पर ब्रांच ऑफिस है। कंपनी का दावा है कि गुडग़ांव की कंपनी से एपीएस (ऑल प्रोसेस साल्युशन प्राइवेट लिमिटेड) से उनका अनुबंध है। यह कंपनी विदेशी पुस्तकों को स्केन कर पीडीएफ  फाइल बनाने के लिए काम करती है। पीडीएफ फाइल बनाने के एवज में डॉलर में मोटी रकम भुगतान की जाती है। जिले के साथ ही प्रदेशभर में कंपनी ने कारोबार फैलाया था। इस कंपनी से जुडऩे वाले कारोबारियों को शुरुआत में भारी मुनाफा हुआ। लिहाजा, धीरे-धीरे कारोबारियों की संख्या बढ़ती गई। वर्तमान में कंपनी से जिले समेत पूरे प्रदेशभर के करीब 2 हजार लोगों के जुडऩे की बात सामने आई है, जिन्होंने ढाई लाख से लेकर 50 लाख रुपए तक इस कारोबार में लगाया है। यह राशि डिपाजिट (सुरक्षा निधि) के नाम पर ली गई। कंपनी से जुड़े कारोबारियों के पास कोई वैधानिक दस्तावेज नहीं है। सिर्फ  अनुबंध पत्र दिया गया है। कंपनी पूरी रकम सेम टाइम के बैंक खातों में चेक के माध्यम से जमा कराती है और व्यापारियों व ग्राहकों को भुगतान के लिए करंट एकाउंट खुलवाए गए हैं। यह कंपनी देश के विभिन्न राज्यों में भी संचालित है। प्रदेश के कई शहरों में फैली इस कंपनी का मुख्यालय बिलासपुर ही है। यही नहीं कंपनी के मुख्यालय के साथ ही डिपो भी बिलासपुर के महाराणा प्रताप चौक में फ्लिपकार्ट ऑफिस के ऊपर संचालित है। वहां से हर महीने दो बार कंपनी से जुड़े ग्राहकों को पुस्तकों की सप्लाई की जाती है। प्रदेशभर में कंपनी से जुड़े ग्राहक यहीं से पुस्तक लेकर जाते हैं। फिर पीडीएफ  फाइल बनाकर बिलासपुर के इंदु चौक स्थित ऑफिस में जमा कराया जाता है। कंपनी से जुड़े ग्राहकों को पीडीएफ  फाइल बनाने के लिए मोटी रकम दी जाती है। जालसाज कंपनी के इस कारोबार में जिले के कई अधिवक्ता, पत्रकार और प्रतिष्ठित नागरिकों के अलावा रिटायर्ड अधिकारी-कर्मचारी फंसे हुए हैं, जिन्होंने कम समय में अधिक रुपए कमाने की चाहत में ढ़ाई लाख से 50 लाख रुपए तक फंसाया है। कंपनी के डॉयरेक्टर और अधिकारियों के अचानक भाग जाने से ऐसे लोगों की रातों की नींद उड़ गई है। 

एक साल से चल रहा था कारोबार

बिलासपुर स्थित कंपनी के दफ्तर के माध्यम से पूरे संभाग में यह कारोबार एक साल से अधिक समय से चल रहा था। करीब एक माह में कंपनी में जिले के साथ ही प्रदेश के कई कारोबारियों ने बड़ी मात्रा में रकम लगाई है। प्रदेशभर में करीब 2 हजार कारोबारियों से कंपनी डिपाजिट के रूप में एक अरब से अधिक रकम वसूल चुकी है। इसी बीच यह आशंका जताई जा रही थी कि कंपनी अपना कारोबार समेट कर भागने की फिराक में है, लेकिन लोग अपने परिचितों के भरोसे में आकर बेहिचक रकम लगाते रहे। बीते सोमवार की शाम पता चला कि कंपनी का रीजनल ऑफिसर आशीष सिन्हा शहर से गायब हो गया है। यह खबर मिलते ही कंपनी में रकम लगाने वाले कारोबारियों के होश उड़ गए। मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची तो रीजनल ऑफिसर की तलाश शुरू की गई, लेकिन अब तक उसका कुछ पता नहीं चला है।

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