जनसुनवाई के दौरान निर्मित हो सकती है अप्रिय स्थिति
Navin Kadam@जांजगीर-चांपा. जिले के बलौदा क्षेत्र को शासन-प्रशासन ने चारागाह समझ रखा है। इस क्षेत्र में पहले से ही पांच कोलवाशरी खुल चुकी है। अब छठवीं कोलवाशरी खोलने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही है। प्रस्तावित कोलवाशरी के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई 25 मार्च को रखी गई है, जिसे लेकर क्षेत्रवासियों में खासा विरोध है। जनसुनवाई के दौरान अप्रिय स्थिति निर्मित होने की संभावना है।
बलौदा विकासखंड क्षेत्र में कोलवाशरी की बढ़ती संख्या ने क्षेत्रवासियों का सुख-चैन छीन लिया है। एक-एक कर खुल चुकी पांच कोलवाशरी से क्षेत्रवासी परेशान हैं। यहां हिंद एनर्जी, महावरी कोलवाशरी सहित पांच कोलवाशरी पहले से ही संचालित हैं। इन कोलवाशरी के प्रदूषण ने क्षेत्रवासियों को जीना मुहाल कर दिया है। इसके बाद भी शासन-प्रशासन आंख मूंद बैठा है। बलौदा क्षेत्र के ही ग्राम ठडग़ाबहरा में अब एक नई कोलवाशरी शुरू होने वाली है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बलौदा के समीपस्थ ग्राम ठडग़ाबहरा में पारस नामक कोलवाशरी प्रस्तावित है, जिसके लिए 25 मार्च को पर्यावरणीय जनसुनवाई रखी गई है। इस कोलवाशरी की क्षमता 0.96 मिलियन टन रखी गई है। यह कोलवाशरी पहले से ही संचालित कोलवाशरी हिंद एनर्जी के ठीक समीप शुरू होने वाली है। प्रस्तावित कोलवाशरी की पर्यावरणीय जनसुनवाई के लिए प्रशासनिक तैयारियां हो चुकी हैं।
वहीं कोलवाशरी के कर्ता-धर्ता पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र के ग्रामों में घूम-घूमकर पंच-सरपंचों की खुशामद करने में जुटे हुए हैं, ताकि जनसुनवाई के दौरान किसी तरह का हो-हंगामा न हो और जनसुनवाई शांतिपूर्ण तरीके से निपट जाए। बावजूद इसके, उनकी रणनीति काम नहीं आ रही है। क्षेत्र में पहले से ही संचालित पांच कोलवाशरी के प्रदूषण से परेशान जनता नई कोलवाशरी खोले जाने का भरसक विरोध करने की तैयारी में हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बलौदा तथा आसपास के गांवों में वर्तमान में पांच कोलवाशरी संचालित हैं, इसके बाद भी एक और कोलवाशरी के लिए जनसुनवाई करना गलत है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कोलवाशरी के प्रदूषण और भारी वाहनों से जहां लोगों की जान जा रही है, वहीं शासन-प्रशासन को केवल अपना खजाना भरने से सरोकार है। वे यह भी कहते हैं कि 25 मार्च को जनसुनवाई स्थल पर ऐसा हंगामा करेंगे कि प्रशासनिक अफसरों को उल्टे पांव लौटना पड़ जाएगा। भारी वाहनों से कुचल रहे ग्रामीण
बलौदा क्षेत्र आदिवासी इलाका है। इस क्षेत्र के गांवों में रहने वाले ज्यादातर लोग खेती-बाड़ी पर ही निर्भर हैं। मगर उनके खेतों के आसपास बहुतायत संख्या में कोलवाशरी खोलकर उन्हें भूखों मारने की स्थिति में लाया जा रहा है। साथ ही प्रदूषण से लोगों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां घर कर रही है। वहीं कोलवाशरी से कोयला लोडक़र निकलने वाले भारी वाहन ग्रामीणों को कुचल रहे हैं। दो-तीन साल के भीतर ऐसे कई हादसे हुए हैं, जिसमें लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है।
पहले भी हो चुका है विरोध
बलौदा क्षेत्र में एक-एक कर पांच कोलवाशरी खुल चुकी हैं। कुछ माह पहले भी एक कोलवाशरी के लिए जनसुनवाई हुई थी। इस जनसुनवाई में मौजूद जिला प्रशासन के अफसरों समेत क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी अनिता सावंत को क्षेत्रवासियों ने खूब खरी-खोटी सुनाई थी। क्षेत्रवासियों ने साफ शब्दों में चेताया था कि यदि एक और कोलवाशरी खोलने की अनुमति दी गई तो बुरा होगा। जनसुनवाई की पूरी वीडियो रिकार्डिंग करवाई गई थी, जिसे केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है। यह मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि एक और नई कोलवाशरी को स्थापित करने के लिए जनसुनवाई करवाई जा रही है।

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