दो सौ एकड़ खेतों में लगे फसल की होती है सिंचाई, कई तालाब और प्राकृतिक जलस्त्रोत हुए हैं कोलवाशरी से प्रभावित
नवीन कदम@बलौदा. नगर के वार्ड क्रमांक एक ठडग़ाबहरा के जिस स्थान पर पारस कोलवाशरी प्रस्तावित है, उसके ठीक सामने सैकड़ों वर्ष पुराना 50 एकड़ क्षेत्रफल में फैला बांध है। इस बांध से आसपास के करीब दो सौ एकड़ खेतों में लगे फसल की सिंचाई होती है। इसके अलावा इस बांध के पानी का उपयोग क्षेत्रवासी निस्तार के लिए करते हैं। कोलवाशरी की स्थापना से बांध का पानी सूख जाएगा, क्योंकि कोलवाशरी में कोयला साफ करने के लिए उच्च क्षमता वाले बोरवेल्स खुदेंगे। बोरवेल्स भू-गर्भ का पानी खींच लेगा और बाढ़ की बलि चढ़ जाएगी। इससे पहले भी कई तालाब और प्राकृतिक जलस्त्रोत कोलवाशरी से प्रभावित हुए हैं।
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| प्रस्तावित पारस कोलवाशरी स्थल |
नगरपंचायत बलौदा के वार्ड क्रमांक एक ठडग़ाबहरा में प्रस्तावित पारस कोलवाशरी की जनसुनवाई को लेकर क्षेत्रवासियों का अभिमत जानने पहुंचे "दैनिक नवीन कदम" रिपोर्टर को लोगों ने कई चौंकाने वाली जानकारी दी। ठडग़ाबहरा के लोगों ने कहा कि उनके वार्ड में नई कोलवाशरी लगने वाली है और इसके लिए 25 मार्च को जनसुनवाई रखी गई है, इसकी जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली है। लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि कोलवाशरी प्रबंधन ने नगरपंचायत बलौदा के अध्यक्ष से लेकर सभी पार्षदों को मोटी रकम देकर खरीद लिया है। सिर्फ इतना ही नहीं, नगर पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी, क्षेत्र के राजस्व अधिकारी, पुलिस अमला भी बिक गया है। कुछ लोगों ने बताया कि कोलवाशरी प्रबंधन ने एक-एक पार्षद को दस-दस हजार रुपए देकर खरीदा है, ताकि वे आपत्ति दर्ज न कराएं। इसी तरह अध्यक्ष और नपं सीएमओ ने भी मोटी रकम लेकर कोलवाशरी प्रबंधन को चुपचाप कोलवाशरी की स्थापना के लिए एनओसी दे दी है।
ठडग़ाबहरा के गुड़ी में बैठे लोगों ने कहा कि उनके मोहल्ले के आसपास पहले से ही हिंद एनर्जी और महावीर कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड की पांच कोलवाशरी चल रही है। इसके बावजूद एक नई कोलवाशरी के लिए नपं से एनओसी दिया जाना यह स्पष्ट करता है कि प्रशासन से लेकर उनके चुने हुए जनप्रतिनिधि बिक चुके हैं। लोगों ने बताया कि उनके मोहल्ले के चारों ओर कोलवाशरी लग चुकी है, जिसके डस्ट से उनका जीना मुहाल है। कोयले के राखड़ से फसल चौपट हो रही है। वहीं डस्ट से टीबी, दमा और कई गंभीर बीमारियों से क्षेत्र के सैकड़ों लोग ग्रसित हो गए हैं। महिला समूह की महिलाओं ने बताया कि 25 मार्च को बलौदा के मंडी प्रांगण में आयोजित जनसुनवाई की जानकारी उन्हें प्रशासन की ओर से नहीं दी गई है। इसकी सूचना उन्हें एक-दो दिन पहले ही मिली है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कोलवाशरी की भरमार है, जिससे कई तरह की समस्याएं हो रही है। इसकी शिकायत कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन के अलावा क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी से कई बार कर चुकी हैं। इसके बावजूद, कोलवाशरी के लिए इस क्षेत्र को ही चुना जा रहा है, जो क्षेत्रवासियों के साथ अन्याय है।

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