शनिवार, 4 मार्च 2017

हद हो गई! फिर एक कोलवाशरी के लिए ठडग़ाबहरा में होगी जनसुनवाई

⏩क्षेत्रवासियों की परेशानी से शासन-प्रशासन को कोई सरोकार नहीं
⏩बलौदा क्षेत्र में खुलने जा रही छठवीं कोलवाशरी, जनसुनवाई ठडग़ाबहरा में 25 को

⇛बलौदा से राजेन्द्र राठौर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

फाइल फोटो
प्रस्तावित कोलवाशरी के विरोध में लामबंद हुए लोग
मुख्यमार्ग से गुजरते कोलवाशरी के भारी वाहन
⇛दैनिक नवीन कदम@जांजगीर-चांपा. जिले के बलौदा क्षेत्र को शासन-प्रशासन ने चारागाह समझ रखा है। इस क्षेत्र में पहले से ही पांच कोलवाशरी खुल चुकी है। अब छठवीं कोलवाशरी खोलने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही है। प्रस्तावित कोलवाशरी ठडग़ाबहरा में स्थापित होनी है, जिसके लिए आगामी 25 मार्च को पर्यावरणीय जनसुनवाई रखी गई है। खास बात यह है कि इस क्षेत्र की जनता पहले से ही संचालित कोलवाशरी के प्रदूषण और क्षेत्र में मौत बनकर दोड़ रहे उनके भारी वाहनों से खासे परेशान है। बावजूद इसके, नई कोलवाशरी के लिए शासन की ओर से हरी झंडी मिलना लोगों के गले नहीं उतर रहा है।
बलौदा विकासखंड क्षेत्र में कोलवाशरी की बढ़ती संख्या ने क्षेत्रवासियों का सुख-चैन छीन लिया है। एक-एक कर खुल चुकी पांच कोलवाशरी से क्षेत्रवासी परेशान हैं। यहां हिंद एनर्जी, महावरी कोलवाशरी सहित पांच कोलवाशरी पहले से ही संचालित हो रही हैं। इन कोलवाशरी के प्रदूषण ने क्षेत्रवासियों को जीना मुहाल कर दिया है। कोलवाशरी के डस्ट से जहां खेतों में लगी फसल चौपट हो रही है। वहीं इनके डस्ट से लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों के चपेट में आकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, कोलवाशरी के भारी वाहन दिन-रात बलौदा शहर से होकर गुजर रहे हैं, जो काल बने हुए हैं। कोलवाशरी के भारी वाहनों की चपेट में आकर कई लोग स्वर्ग सिधार गए हैं। इसके बाद भी शासन-प्रशासन आंख मूंद बैठा है। इधर, बलौदा क्षेत्र के ही ग्राम ठडग़ाबहरा में अब एक नई कोलवाशरी शुरू होने वाली है। ‘दैनिक नवीन कदम ’ को प्राप्त जानकारी के अनुसार, बलौदा के समीपस्थ ग्राम ठडग़ाबहरा में पारस नामक कोलवाशरी प्रस्तावित है, जिसके लिए आगामी 25 मार्च को पर्यावरणीय जनसुनवाई होनी है। बताया जा रहा है कि इस कोलवाशरी की क्षमता 0.96 मिलियन टन रखी गई है। यह कोलवाशरी पहले से ही संचालित कोलवाशरी हिंद एनर्जी के ठीक समीप शुरू होने वाली है। प्रस्तावित कोलवाशरी की पर्यावरणीय जनसुनवाई के लिए प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो गई हैं। वहीं कोलवाशरी के कर्ता-धर्ता पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र के ग्रामों में घूम-घूमकर पंच-सरपंचों की खुशामद करने में जुटे हुए हैं, ताकि जनसुनवाई के दौरान किसी तरह का हो-हंगामा न हो और जनसुनवाई शांतिपूर्ण तरीके से निपट जाए। बावजूद इसके, उनकी रणनीति काम नहीं आ रही है। क्षेत्र में पहले से ही संचालित पांच कोलवाशरी के प्रदूषण से परेशान जनता नई कोलवाशरी खोले जाने का भरसक विरोध करने की तैयारी में हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि बलौदा तथा आसपास के गांवों में वर्तमान में पांच कोलवाशरी संचालित हैं, इसके बाद भी एक और कोलवाशरी के लिए जनसुनवाई करना सरासर गलत है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि कोलवाशरी के प्रदूषण और भारी वाहनों से जहां लोगों की जान जा रही है, वहीं शासन-प्रशासन को केवल अपना खजाना भरने से सरोकार है। वे यह भी कहते हैं कि आगामी 25 मार्च को जनसुनवाई स्थल पर ऐसा हंगामा करेंगे कि प्रशासनिक अफसरों को उल्टे पांव लौटना पड़ जाएगा। हालांकि कोलवाशरी की जनसुनवाई को लेकर प्रशासन ने भी कमर कस ली है। उग्र आंदोलन अथवा प्रदर्शन को रोकने पुलिस अमले की मदद लेने की योजना बन चुकी है। बहरहाल, अब देखना यह होगा कि प्रस्तावित पारस कोलवाशरी की जनसुनवाई आगामी 25 मार्च को शांतिपूर्वक निपटती है या फिर कोलवाशरी के प्रदूषण और भारी वाहनों से त्रस्त जनता अपना आक्रामक रूप दिखाती है।

क्षेत्रवासी इसलिए भी आक्रोशित

बलौदा क्षेत्र आदिवासी इलाका है। इस क्षेत्र के गांवों में रहने वाले ज्यादातर लोग खेती-बाड़ी पर ही निर्भर हैं। मगर उनके खेतों के आसपास बहुतायत संख्या में कोलवाशरी खोलकर उन्हें भूखों मारने की स्थिति में लाया जा रहा है। साथ ही प्रदूषण से लोगों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां घर कर रही है। वहीं कोलवाशरी से कोयला लोडक़र निकलने वाले भारी वाहन ग्रामीणों को कुचल रहे हैं। दो-तीन साल के भीतर ऐसे कई हादसे हुए हैं, जिसमें लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है। बलौदा शहर की बात की जाए तो यहां के बस स्टैण्ड के आसपास घनी आबादी है। यहां कई स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर संचालित हो रहे हैं। इसलिए यहां बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना होता है। व्यस्ततम मार्ग होने के बाद भी कोलवाशरी के भारी वाहन उसी रास्ते से गुजरते हैं जो आए दिन लोगों को अपनी चपेट में लेते हैं। इसलिए भी क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है।

कुछ माह पहले भी हुई थी सुनवाई

बलौदा क्षेत्र में एक-एक कर पांच कोलवाशरी खुल चुके हैं। सभी की क्षमता भारी भरकम है। कुछ माह पहले भी एक कोलवाशरी के लिए जनसुनवाई हुई थी। इस जनसुनवाई में मौजूद जिला प्रशासन के अफसरों समेत क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी अनिता सामंत को क्षेत्रवासियों ने खूब खरी-खोटी सुनाई थी। क्षेत्रवासियों ने साफ शब्दों में चेताया था कि यदि एक और कोलवाशरी खोलने की अनुमति दी गई तो बुरा होगा। जनसुनवाई की पूरी वीडियो रिकार्डिंग करवाई गई थी, जिसे केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है। यह मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि एक और नई कोलवाशरी को स्थापित करने की कवायद तेज कर दी गई है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि कोलवाशरी के प्रदूषण तथा अन्य मामलों को लेकर शासन-प्रशासन स्तर पर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं। कई बार उग्र आंदोलन भी हुए हैं, लेकिन किसी के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। उनका यह भी आरोप है कि क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर रहे हैं, जिसका खामियाजा क्षेत्रवासियों को जान गवांकर भुगतना पड़ रहा है।

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