सोमवार, 10 अप्रैल 2017

आगजनी से निपटने चांपा जंक्शन में कोई इंतजाम नहीं, घटना होने पर नगरपालिका पर निर्भर रहता है रेलवे प्रशासन

चांपा. रायपुर की तरह चांपा जंक्शन के साइकिल स्टैंड में भी आगजनी ने निपटने के कोई इंतजाम नहीं हैं। ऐसी घटना होने पर रेलवे पूरी तरह नगरपालिका पर निर्भर है, जबकि फायर ब्रिगेड को पालिका से रेलवे स्टेशन आने में कम से कम 15 से 20 मिनट का समय लगेगा। इतनी देर में बड़ा नुकसान हो सकता है। इसके अलावा स्टैंड में फैली अव्यवस्था भी खतरे को बढ़ा रही है।

रेलवे स्टेशन चांपा में दो साइकिल स्टैण्ड संचालित हैं। एक स्टैण्ड केवल चंद समय वाहन पार्किंग करने के लिए संचालित किया जा रहा है तो दूसरा स्थायी साइकिल स्टैण्ड है, जहां अव्यवस्थाओं का आलम है। भीषण गर्मी से लेकर तेज बारिश में खुले आसमान के नीचे गाडिय़ां खड़ी रहती हैं। सबसे ज्यादा खतरा गर्मी के मौसम में रहता है। तापमान 43.45 डिग्री पहुंचने पर सूर्य की तेज किरणों से गाडिय़ों में आग लगने का खतरा होता है। गाडिय़ों में पेट्रोल रहता है। रायपुर में एक साथ 230 गाडिय़ां इसी कारण जलकर खाक हो गई। इतना ही नहीं, बम की तरह टंकिया ब्लास्ट होती रहीं। 

इससे आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल था। एक के बाद एक गाडिय़ां जलती रहीं और रेल प्रशासन फायर बिग्रेड के आने का इंतजार करता है। चांपा भी इस खतरे से बाहर नहीं है। यहां दोनों स्टैंड में आग बुझाने का इंतजाम नहीं है। स्टेशन में फायर मशीन नहीं है। रायपुर में हुई घटना के बाद चांपा के स्टैण्ड में वाहन रखने वालों को इस बात की चिंता सताने लगी है कि यहां उनकी गाडिय़ां कितनी सुरक्षित है। अगर रायपुर जैसी घटना होती है तो उनकी गाडिय़ों का क्या हाल होगा।

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