जांजगीर-चांपा. गर्मी में बढ़ा हुआ तापमान एक तरफ जहां लोगों को झुलसा रहा है। वहीं विद्युत की मांग और खपत बढऩे से छत्तीसगढ़ पावर जनरेशन कंपनी बेहाल है। जिले में स्थापित सरकारी पॉवर प्लांट मड़वा-तेंदूभाठा प्रोजेक्ट की 500-500 मेगावॉट की दोनों यूनिट तीन दिनों से ठप है। इससे प्रदेश में एक बार फिर बिजली संकट खड़ा हो गया है।
जिले के बलौदा विकासखंड अंतर्गत ग्राम मड़वा-तेंदूभाठा में स्थापित छत्तीसगढ़ पॉवर जनरेशन कंपनी की मड़वा-तेंदूभाठा प्रोजेक्ट पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। काफी प्रयास के बाद भी इस प्रोजेक्ट से नियमित रूप से विद्युत उत्पादन नहीं हो पा रहा है, जबकि प्रोजेक्ट की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसी स्थिति पिछले दो वर्षों से बनी हुई है। इस वजह से सरकार को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले तीन दिनों से प्रोजेक्ट की 500-500 मेगावॉट की दोनों यूनिट से विद्युत उत्पादन ठप है। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के पावर प्लांट ठप होने के कारण 1600 मोगावाट उत्पादन घट गया है, जबकि पीक आवर में डिमांड 3900 मेगावाट तक पहुंच गई है। बिजली विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 4200 मोगावाट उत्पादन क्षमता है। ऐसे में प्लांट बंद होने के कारण अब बिजली आपूर्ति के लिए बाहरी प्रदेशों से खरीदी की जा रही है।
प्रदेश में नौ इकाईयां ठप
जनरेशन कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ विद्युत उत्पादन कंपनी की 9 इकाई बंद होने से 1590 मेगावाट बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा। जांजगीर-चांपा स्थित 1000 मेगावाट की मड़वा परियोजना की दोनों इकाई बंद पड़ी हैं। मड़वा प्रोजेक्ट की 500 मेगावाट की दो नंबर इकाई तीन दिन से बंद है। इसे जल्द चालू करने की व्यवस्था की जा रही है।
क्षमता से आधा उत्पादन
बताया जा रहा है कि 3400 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाली कंपनी के संयंत्रों से मात्र 1370 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। आईपीपी व सीपीपी से बिजली लेकर उपलब्धता 1641 मेगावाट है। सेंट्रल सेक्टर से लगभग 1912 मेगावाट बिजली ली जा रही है। कोरबा में स्थापित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह (डीएसपीएम) की क्षमता 250 मेगावाट है, लेकिन यहां से मात्र 184 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। इसी तरह कोरबा पूर्व संयंत्र में 440 मेगावाट की जगह 143 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।
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