शुक्रवार, 9 जून 2017

होम्योपैथिक चिकित्सा से पीसीओडी का इलाज संभव-डॉ. प्रियम, ग्राम धाराशिव में आयोजित होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर में दी गई जानकारी

चांपा. होम्योपैथिक चिकित्सा का विकास करने के लिए डॉ. लक्ष्मी प्रियम स्वर्णकार ने ग्राम धाराशिव में एक दिवसीय चिकित्सा शिविर का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने जानकारी हासिल कर होम्योपैथिक उपचार का लाभ उठाया। शिविर में डॉ. लक्ष्मी प्रियम स्वर्णकार ने कहा कि होम्योपैथी चिकित्सा से पीसीओडी का इलाज संभव है। होम्योपैथी चिकित्सा पुरानी चिकित्सा पद्धति है। शिविर में 97 लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 

 शिविर में आई हुई महिलाओं से मासिक धर्म में तकलीफ या गड़बड़ी की समस्या को सुनकर उन्हें पीसीओडी (पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिजीज) के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि जब तक ऑपरेशन की जरूरत न हो, ऑपरेशन न कराएं। होम्योपैथिक की दवाओं से पीसीओडी का इलाज संभव है। वह भी बना किसी दुष्प्रभाव के। डॉ. स्वर्णकार ने बताया कि आज के युग में पीसीओडी की समस्या बहुत आम हो गई है और बहुत सारी युवतियां इस बीमारी से परेशान हैं। पीसीओडी के बारे में संपूर्ण जानकारी देते हुए डॉ. स्वर्णकार ने बताया कि पीसीओडी हारमोनल इंबैलेंस की वजह से होता है, जिसमें हमारी रोजमर्रा की जीवन शैली बहुत प्रभाव डालती है। 

हम अपनी जीवन शैली को सुधारकर और कुछ होम्योपैथिक दवाओं का सेवन कर पीसीओडी से हमेशा के लिए निजात पा सकते हैं। पीसीओडी को समझने के लिए कुछ लक्षण भी उन्होंने बताया, जैसे कि मासिक धर्म का देर से आना, कभी-कभी तीन महीने-छह महीने में आना, ब्लीडिंग का कम होना, लगातार बढ़ता हुआ मोटापा, शरीर में अनचाहे बालों की वृद्धि आदि। उन्होंने कहा कि पीसीओडी की वजह से बहुत सी महिलाओं में इनफर्टिलिटी भी होती जाती है, जो पीसीओडी का कॉन्प्लिकेशन है। इन फर्टिलिटी को भी होम्योपैथी की मदद से उपचार किया जाता है। डॉ. स्वर्णकार ने वहां उपस्थित मरीजों का निरीक्षण किया तथा उन्हें दवाएं भी दी।

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