जांजगीर-चांपा. थर्ड जेंडर की पहचान सुनिश्चित करते हुए समाज की मुख्य धारा से जोडऩे शुरू किया गया सर्वेक्षण कार्य पूरा हो गया। अब उन्हें परिचय पत्र प्रदान करने की कवायद शुरू कर दी गई है। उन्हें सूचना भेजकर आवेदन करने कहा गया है। खास बात यह है कि उन्हें अपने आवेदन में पिता के स्थान पर गुरू का नाम लिखने की सहूलियत भी दी गई है। सर्वे कार्य के जरिए जिले में वर्ग विशेष के करीब दो दर्जन लोगों को चिन्हांकित करने की बात सामने आई है। पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग ने नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में थर्ड जेंडर के लोगों का आंकड़ा जुटाने सर्वे कार्य कराया है।
शासन के निर्देश के तहत इस वर्ग को पहचान देने और समाज की मुख्य धारा में लाने यह कवायद की जा रही है। इस सर्वे में जिले से कुल दो दर्जन लोगों को चिन्हांकित कर लिया गया है, जिन्हें परिचय पत्र बनाकर देने की प्रक्रिया जारी है। उल्लेखनीय है कि थर्ड जेंडर में शामिल लोगों को कई बार परिवार से अलग रहने मजबूर होना पड़ता है और ऐसे में परिजन की बजाय समुदाय विशेष के मुखिया अथवा गुरू ही उनके पालक की भूमिका निभा रहे। ऐसे में परिचय पत्र व अन्य प्रमाणपत्रों के लिए भरे जाने वाले आवेदन में थर्ड जेंडर को माता-पिता के स्थान पर गुरू का नाम लिखने का प्रावधान किया गया है। परिचय पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया के तहत पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग कार्यालय से संपर्क कर आवेदन प्राप्त करने उन्हें सूचित किया जा रहा है।
सक्षम बनाने करेंगे प्रोत्साहित
सर्वे में सूचीबद्ध थर्ड जेंडर को परिचय पत्र प्राप्त करने विभाग से एक आवेदन प्राप्त करना होगा। यह फॉर्म लेकर उन्हें मेडिकल बोर्ड से सर्टिफिकेट तैयार कराना होगा और उसे लेकर पुन: समाज कल्याण विभाग से संपर्क करना होगा। औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें परिचय पत्र वितरित कर दिया जाएगा। पहचान व पात्रता सुनिश्चित होने के बाद उन्हें आधार कार्ड, राशन कार्ड समेत शासन की अन्य योजनाओं का नियमानुसार लाभ प्रदान करते हुए स्वयं सक्षम बनने प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए उन्हें कैटरिंग, वीडियोग्राफी व ऑर्केस्ट्रा समेत अन्य प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, ताकि वे आजीविका के बेहतर संसाधन विकसित कर सकें। पहचान छिपाने अड़े शासन ने मान्यता व पहचान प्रदान करने पहल करते हुए स्कूल-कॉलेजों में प्रवेश के आवेदन व मार्कशीट में तृतीय लिंग को स्थान दिया।
पहचान छिपाने हो रहे मजबूर
समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार देने तथा योजनाओं से जोडऩे उनका डाटा जुटाने की कार्रवाई शुरू की गई थी, जो अब पूरी हो चुकी है। बावजूद इसके समाज की अवहेलना का डर वर्ग विशेष में शामिल कई लोग अब भी अपनी पहचान छिपाने मजबूर हो रहे। विभाग का कहना है कि सर्वे के दौरान यह बात सामने आई कि परिवार से पृथक होकर वे जिनकी शरण में गुजर-बसर कर रहे, उनसे जागरूक बन खुलकर आगे लाने प्रयास किया जा रहा है।

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