चांपा. सरिता मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। सरिता के परिजनों को सरकार और कंपनी मालिक की ओर से उचित मुआवजा मिलना चाहिए। सरिता मामले में कुछ व्यापारिक संगठन प्रबंधन को बचाने की कोशिश कर रहा है। इन्हें भी गलत लोगों का साथ नहीं देना चाहिए। इसके अलावा जिले में संचालित अन्य छोटे-बड़े उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा और मजदूरी का उचित निर्धारण होना चाहिए। इन सभी मांगों को लेकर जल्द ही कलेक्टर से मुलाकात कर उनसे कार्रवाई की मांग की जाएगी। जिला प्रशासन इस मसले को यदि गंभीरता से नहीं लेता है, तो एक योजनाबद्ध तरीके से कलेक्टोरेट का घेराव किया जाएगा।
ये बातंे जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश महामंत्री इब्राहिम मेमन और एनएन सूर्यवंशी (पूर्व आईएएस) ने पत्रकारों से बात करते हुए कही। उन्होंने सरिता मामले में कारखाना प्रबंधन और प्रशासन की भूमिका की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि जिस कारखाने में छह साल तक मेहनत करने वाली सरिता जब बीमार हो गई, तब प्रबंधन ने उससे किनारा कर लिया। यहां तक इलाज में भी फूटी कौड़ी तक नहीं दी। आखिरकार सरिता ने जिला अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अब प्रबंधन सरिता को अपना श्रमिक मानने से इंकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरिता की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। सरिता का हक दिलाने के लिए जोगी कांग्रेस आर-पार की लड़ाई लड़ेगी। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अफसरों की टीम ने जब अंकुर, अभिषेक व अरविंद अग्रवाल की फैक्टियों में छापा मारा तो वहां कई खामियां मिली। अफसरों के मुताबिक पांच कारखानों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे। वहीं कम मजदूरी के साथ ही नगद भुगतान कर टैक्स बचाने का भी मामला सामने आया। उन्होंने कहा कि रिहायशी इलाके में पांच कारखाना खोलने की अनुमति किस नियम के तहत दी गई यह प्रशासन को बताना होगा। कारखाना प्रबंधन फैक्टी संचालित कर मुनाफा कमा रहा है, जबकि आसपास रहने वाले लोग प्रदूषण की चपेट में आकर तिल-तिल मर रहे हैं। पार्टी के बैनर तले हमने धरना प्रदर्शन कर प्रशासन को संकेत दे दिया है कि इस मसले को हल्के में न ले। इसके बाद भी प्रशासन सरिता मामले में लापरवाही बरतती है तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
एक सवाल के जवाब में कहा कि जिले में छोटे-बड़े मिलाकर दो सौ से अधिक उद्योग संचालित हैं। यहां लाखों की संख्या में श्रमिक कार्यरत है। हाल ही में एमबीपीएल में हुई दुर्घटना में तीन श्रमिकों के घायल होने की सूचना मिली थी, जबकि उससे पहले आरकेएम पावरजेन में भी दुर्घटना हुई थी। इसमें भी श्रमिक घायल हुए थे। उद्योगों में लगातार दुर्घटनाएं हो रही है। इसके बावजूद प्रशासन चैन की नींद सो रहा है। इन संयंत्रों में मजदूर असुरक्षा के साये में काम कर रहे हैं, जबकि प्रबंधन इनका केवल खून चूस रहा है। उद्योग प्रबंधन मंदी का बहाना बनाकर अपने दायित्वों से बचने की कोशिश कर रहा है। क्षेत्र में 40 साल पहले एमबीपीएल की स्थापना हुई थी, तब से अब तक श्रमिक सहित क्षेत्रवासी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन उद्योगों में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार भी नहीं मिल रहा है। मजदूरी का निर्धारण और भुगतान में भी लापरवाही बरती जा रही है। इन सभी मुद्दों को लेकर जल्द ही कलेक्टर से मुलाकात की जाएगी। उनसे विस्तार से चर्चा कर इस दिशा में ठोस कदम उठाने की भी मांग की जाएगी। यदि जिला प्रशासन इन मामलों को हल्के में लेता है तो कलेक्टोरेट का घेराव कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। पत्रवार्ता में उनके साथ प्रदेश सचिव रघुवीर सिंह, बस्तर प्रभारी गोरेलाल यादव, प्रदेश महामंत्री किसान प्रकोष्ट राधेश्याम देवांगन, संतोष अनंत, परदेशी कुर्रे, रामेश्वर यादव, संतोष कुर्रे, गजेन्द्र भूषण, सतीश दिवाकर, बसंत पवार, दिलदार खान सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
सरिता की बहन का हुआ बयान दर्ज
बिर्रा फाटक चांपा के पास संचालित अभिषेक इंडस्टीज में सरिता चौहान बीते छह सालों से मजदूरी कर रही थी। यह बात अपनी मौत से पहले खुद सरिता ने एक वीडियो में कही है। इसके अलावा सरिता की मां जानकी बाई, पिता हेमलाल चौहान तथा सरिता के साथ ही वहां काम करने वाली उसकी बहन अंकिता चौहान ने भी कही है। अग्रवाल ब्रदर्स के कारखानों में काम करने वाले एक अन्य श्रमिक ने भी सरिता चौहान को वही का श्रमिक बताया है, जिसका वीडियो में मौजूद है। इतने सारे साक्ष्य होने के बावजूद कारखाना प्रबंधन सीना ठोककर कह रहा है कि सरिता उनके यहां का श्रमिक नहीं है। मंगलवार को सरिता की बहन अंकिता चौहान ने औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के कार्यालय जाकर अपना बयान दर्ज कराया। अंकिता ने अपने बयान में कहा है कि सरिता अभिषेक इंडस्टीज में छह साल से काम कर रही थी। काम के दौरान ही उसे बीमारी हुई। बीमारी बढ़ने के कारण वह काम करने में अक्षम हो गई। इस वजह से घर में रखकर उसका जिला अस्पताल सहित पुष्पराज देवांगन के यहां उपचार कराया गया। सहायक संचालक आशुतोष पाण्डेय के मुताबिक अंकिता का यह बयान सरिता को अभिषेक इंडस्टीज का श्रमिक घोषित करने के लिए पर्याप्त है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें