जांजगीर-चांपा. जिले में शिक्षा की आड़ में खुलेआम बिजनेस किया जा रहा है। जिले में बिना पंजीयन के एजुकेशन सेंटर चलाए जा रहे हैं। बच्चों से फीस के रूप में मोटी रकम लेकर सेंटर के संचालक उन्हें प्रर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
जिला मुख्यालय जांजगीर के गली-गली में एजुकेशन सेंटर की बाढ़ आ गई है। संचालक बिना पंजीयन कराए बेधडक़ एजुकेशन का संचालन कर रहे हैं। संचालकों को शिक्षा को ही बिजनेस का जरिया बना लिया है। एजुकेशन सेंटर खोलने के लिए पहले शिक्षा विभाग से परमिशन लेना पड़ता है, लेकिन जिले मे ऐसा कुछ भी नहीं है। संचालकों ने बिना परमिशन लिए एजुकेशन सेंटर का संचालन कर रहे हैं। जिले में गिनती के ही एजुकेशन सेंटर के संचालकों ने अपना पंजीयन कराया है। जिले में लगभग पांच सौ एजुकेशन अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। संचालकों ने अब तक शिक्षा विभाग से संचालन के लिए किसी भी प्रकार से कोई अनुमति नहीं ली है। शहर के गली-गली में बिना परिमिशन के एजुकेशन सेंटर चल रहे है, जहां बच्चों से मोटी रकम वसूली जा रही है।
सेंटरों में कोई सुविधा नहीं
शहर में बिना परमिशन के चले रहे एजुकेशन सेंटरों में मूलभूत सुविधाओं को अभाव बना हुआ हैं। विद्यार्थियों के लिए न हीं पेयजल की व्यवस्था है और न ही शौच की। विद्यार्थियों से मोटी रकम लेने के बाद भी एजुकेशन सेंटर के संचालक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
शिक्षा विभाग है अनजान
एजुकेशन सेंटर खोलने के पहले शिक्षा विभाग से परमिशन लेना जरुरी है, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं हैं। जिले में बिना परमिशन के सैकड़ों एजुकेशन सेंटर चल रहे हैं। इन सबकी जानकारी होने के बाद भी शिक्षा विभाग कार्रवाई करने में पी़छे हट रहा है। इससे साफ प्रतीत होता हैए कि अवैध रूप से संचालित एजुकेशन सेंटरों के संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने में विभाग कितना सख्त हैं।
ये होनी चाहिए सुविधा
⇛ पेयजल की व्यवस्था।
⇛ कक्षाओं में पर्याप्त रोशनी।
⇛ लैब जैसी जरूरी सुविधाएं।
⇛ सुविधायुक्त कमरे और हाल।
⇛ पार्किंग की व्यवस्था।
⇛ दक्ष शिक्षकों की स्टाफ।
⇛ कक्षाओं में पर्याप्त रोशनी।
⇛ लैब जैसी जरूरी सुविधाएं।
⇛ सुविधायुक्त कमरे और हाल।
⇛ पार्किंग की व्यवस्था।
⇛ दक्ष शिक्षकों की स्टाफ।

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