बुधवार, 2 अगस्त 2017

भोजन के अधिकार से वंचित हुए नौनिहाल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आंदोलन का असर, तीन दिनों से नहीं खुले आंगनबाड़ी केन्द्रों के पट

जांजगीर-चांपा. जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका आंगनबाडिय़ों में ताला जडक़र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राजधानी रायपुर तथा जिला मुख्यालय में पिछले तीन दिन से हड़ताल पर डटी हैं। इससे नौनिहालों को भोजन के अधिकार से वंचित होना पड़ा है। हड़ताल के अंतिम दिन यानी बुधवार 2 अगस्त को भी आंगनबाडिय़ां नहीं खुलीं।

उल्लेखनीय है कि 31 जुलाई से 2 अगस्त तक तीन दिवसीय प्रदेश स्तरीय आंदोलन में शामिल होने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका राजधानी रायपुर में डटी हुई हैं। वहीं जो रायपुर नहीं गई हैं, वे जिला मुख्यालय में आयोजित धरना में शामिल हो रही हैं, जिसके कारण तीन दिनों आंगनबाड़ी भवनों में ताला लगा हुआ है। जानकारी के अभाव में कई नौनिहाल आंगनबाड़ी में ताला देखकर वापस घर लौट रहे हैं। आंदोलन में चले जाने से आंगनबाडिय़ों को खोलने शासन की ओर से कोई वैकल्पिक उपाय नहीं किया जा सका है। इससे जिलेभर के नौनिहालों को आंगनबाडिय़ों में हर रोज मिलने वाले भोजन से वंचित हो गए हैं। लगातार तीन दिनों तक आंगनबाडिय़ों में ताला लटकने से नौनिहाल घरों में परेशान हो रहे हैं। वहीं गर्भवती महिलाओं को शासन की ओर से मिलने वाली महतारी जतन योजना के भोजन से वंचित होना पड़ा है।
 


पदोन्नति से वंचित करने की चेतावनी

हड़ताल के कारण आंगनबाड़ी नहीं खोलने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को जिला प्रशासन की ओर चेतावनी दी गई है कि जो भी कार्यकर्ता व सहायिका आंगनबाड़ी बंद कर हड़ताल में शामिल होती हैं। उन्हें सुपरवाइजर व कार्यकर्ता के लिए समय-समय पर दी जाने वाली पदोन्नति से वंचित कर दिया जाएगा। उनके नामों पर विचार नहीं किया जाएगा। कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सेवा अवधि बाधित होगी। हड़ताल अवधि के दौरान मानदेय में अनुपातिक कटौती करते हुए हड़ताल की अवधि की नियमित सेवा अवधि में गणना नहीं की जाएगी। हड़ताल में शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की जानकारी जिला प्रशासन ने मांगी है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें