रविवार सुबह 11:30 बजे की आपात बैठक में नाराज़ महिला सदस्य नहीं पहुँचे, दबाव बढ़ते ही बैकफुट पर दिखे ‘धमकीबाज़’ जनप्रतिनिधि
राजेंद्र राठौर @ जांजगीर-चांपा। जिला पंचायत में चल रहे विवाद ने अब तेज़ मोड़ ले लिया है। प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी के सख्त रुख के बाद सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। अंदरखाने चर्चा है कि मामला अब माफीनामा तक पहुंच सकता है, जबकि जिन जनप्रतिनिधियों पर महिला सदस्यों को चुप कराने के आरोप लगे थे, वे अब बैकफुट पर आते दिख रहे हैं।
एक दिन पहले 02 मई की शाम को जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी के हस्तक्षेप के तुरंत बाद आनन-फानन में 03 मई 2026 (रविवार) सुबह 11:30 बजे जिला पंचायत सभा कक्ष में बैठक बुलाने की सूचना जारी की गई। सभी सदस्यों से “आवश्यक विषय” पर चर्चा के लिए उपस्थित होने का आग्रह किया गया। इसे विवाद को जल्द शांत करने और स्थिति संभालने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
लेकिन यह दांव उल्टा पड़ गया। नाराज़ महिला सदस्यों ने इस बैठक को नजरअंदाज कर दिया और निर्धारित समय पर नहीं पहुँचीं, जिससे साफ संकेत गया कि मामला अब केवल समझाइश से नहीं सुलझने वाला।
सूत्रों के अनुसार, मंत्री के सख्त संदेश कि "किसी को भी किसी सदस्य को दबाने का अधिकार नहीं" के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया है। अब वही जनप्रतिनिधि, जिन पर बैठक में महिला सदस्यों को रोकने और दबाव बनाने के आरोप लगे थे, स्थिति बिगड़ता देख बैकफुट पर आते नजर आ रहे हैं। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि विवाद शांत करने के लिए माफीनामा देने की नौबत तक आ सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि मामला अब सिर्फ बहस या नाराजगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे राजनीतिक प्रतिष्ठा और नेतृत्व की साख से जुड़ गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या सच में माफी के जरिए विवाद थमेगा या यह टकराव आगे और बड़ा रूप लेगा।

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