शुक्रवार, 1 मई 2026

204 पाव शराब का जखीरा…आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध सिंडिकेट, अकलतरा में पुलिस की कार्रवाई के बाद उठे बड़े सवाल, दुकान से सप्लाई या सिस्टम की मिलीभगत

जांजगीर-चांपा। अकलतरा पुलिस ने अवैध शराब कारोबार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 204 पाव शराब के साथ एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में सहदेव बंजारे (23), शंकर खांडे (28) और अल्का बंजारे (38) शामिल हैं, जो वार्ड नंबर 13 गुरुघासीदास मोहल्ला अकलतरा के निवासी हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से देशी और अंग्रेजी शराब जब्त कर आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए सभी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। 




पुलिस के अनुसार, सूचना के आधार पर तरोद चौक में घेराबंदी कर दो आरोपियों को पकड़ा गया, जिनके पास से करीब 100 पाव देशी शराब और एक वाहन बरामद हुआ। पूछताछ में खुलासा हुआ कि करीब 100 पाव शराब पहले ही अल्का बंजारे के घर में खपाई जा चुकी है। इसके बाद पुलिस टीम ने महिला के घर पर दबिश दी, जहां दरवाजा नहीं खोलने पर पंचनामा और वीडियोग्राफी के बाद दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया। तलाशी के दौरान घर से भी भारी मात्रा में शराब बरामद हुई। 

इस पूरी कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल अब यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में शराब आई कहां से। आबकारी नियमों के अनुसार एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही शराब बेची जा सकती है, ऐसे में 200 से अधिक पाव शराब का एक ही नेटवर्क तक पहुंचना सीधे तौर पर नियमों के उल्लंघन और संगठित सप्लाई चेन की ओर इशारा करता है। यह मानना मुश्किल है कि बिना किसी दुकान या सप्लायर की मिलीभगत के इतनी बड़ी मात्रा में शराब इकट्ठा कर उसका परिवहन और भंडारण किया जा रहा था। 

आरोपी अल्का बंजारे के घर से जिस तरह शराब का जखीरा मिला, वह इस बात का संकेत है कि यह कोई सामान्य बिक्री नहीं, बल्कि एक तरह का स्टॉक प्वाइंट बनाकर लंबे समय से अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा था। दरवाजा बंद कर पुलिस को रोकने की कोशिश और अंदर से बड़ी मात्रा में शराब मिलना इस नेटवर्क की गंभीरता को और बढ़ाता है। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई भले ही तेज दिख रही हो, लेकिन सवाल यह है कि क्या जांच केवल आरोपियों तक सीमित रहेगी या फिर उस सप्लाई चेन तक भी पहुंचेगी, जहां से इतनी मात्रा में शराब उपलब्ध कराई गई। 

आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में शराब की अवैध निकासी बिना निगरानी में खामी या संरक्षण के संभव नहीं मानी जा सकती। गौरतलब है कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहले से भी कई मामले दर्ज हैं, इसके बावजूद उनका इस तरह सक्रिय रहना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं उन्हें संरक्षण या ढील मिलती रही है। 

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को सिर्फ एक कार्रवाई तक सीमित रखता है या फिर पूरे नेटवर्क की जांच कर असली सप्लायर और जिम्मेदारों तक पहुंचता है। फिलहाल, 204 पाव शराब की बरामदगी ने यह साफ कर दिया है कि जांजगीर-चांपा में अवैध शराब का कारोबार केवल छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि संगठित तरीके से संचालित हो रहा है, जिसमें असली खिलाड़ी अब भी सामने आना बाकी हैं।

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