गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

गिरजाघरों में संध्या काल के समय हुई विशेष आराधना, मसीहियों के पवित्र दुख भोग सप्ताह का था आज चौथा दिन

जांजगीर-चांपा. मसीहियों के संजीदगी व शोक के साथ मनाए जाने वाले पवित्र दुख भोग सप्ताह का आज चौथा दिन था।  आज जिले के सभी गिरजाघरों में संध्या काल के समय विशेष आराधना का आयोजन किया गया। 


इस संबंध में मसीही समाज की संगीता लूथर ने बताया कि मसीहियों के संजीदगी व शोक के साथ मनाए जाने वाले पवित्र दुख भोग सप्ताह का आज चौथा दिन था। मनन चिंतन का पाठ निर्गमन 12:1-8, लुका 22:12-23, 1कुरं, 11-23-28 से लिया गया है। उन्होंने बताया कि आज का दिन समस्त मसीहियों के लिए एक विशेष दिन था। समस्त गिरजाघरों में विशेष आराधना की गई। आज की रात साधारण रात नहीं, यह यहीवा परमेश्वर की रात है। उन्होंने बताया कि आज की रात में यीशु मसीह के साथ अनेक घटनाएं घटती है। पुरातन फसह के पर्व एवं प्रभु भोज की विधि में बहुत अंतर है। 

पहली बात फसह का पर्व व प्रभु भोज इन दोनों विधियों को स्मरण करने का निर्देश बाइबिल में दिया है। उन्होंने बताया कि बाइबिल में सात वाणियों का जिक्र है, जो प्रभु यीशु मसीह ने कलवरी क्रूस पर मृत्यु से पहले कही। लूका 23 का 34 में तब यीशु ने कहा- हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं। लूका 23 का 43 में उस ने उस से कहा, मैं तुझ से सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा। यूहन्ना 19 का 26 में यीशु ने अपनी माता से कहा, हे नारी, देख, यह तेरा पुत्र है। मत्ती 27 का 46 में तीसरे पहर के निकट यीशु ने बड़े शब्द से पुकारकर कहा, एली, एली, लमा शबक्तनी, अर्थात् हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया। 

यूहन्ना 19 का 28 में इस के बाद यीशु ने यह जानकर कि अब सब कुछ हो चुका, इसलिये कि पवित्रा शास्त्रा की बात पूरी हो कहा, मैं प्यासा हूं। यूहन्ना 19 का 30 में जब यीशु ने वह सिरका लिया, तो कहा पूरा हुआ और सिर झुकाकर प्राण त्याग दिए। इसी तरह लूका 23 का 46 में यीशु ने बड़े शब्द से पुकार कर कहा, हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं और यह कहकर प्राण छोड़ दिए।

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