सोमवार, 17 अप्रैल 2017

डीएमओ बोले-एएफओ ने कहा है कि मिलर पर मत कराओ एफआईआर, एएफओ ने कहा-फालतू बात कर रहे डीएमओ

समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के डीओ काटने तथा परिवहन को लेकर अफसरों में ठनी


जांजगीर-चांपा. समर्थन मूल्य के अंतर्गत खरीदे गए धान की मात्रा को लेकर एक ओर जहां मार्कफेड और खाद्य विभाग के अफसर सवालों के घेरे में हैं। वहीं अब मिलर्स के नाम धान का डीओ काटने तथा परिवहन के मामले को लेकर दोनों विभागों के अफसर आपस में उलझ गए हैं। सोमवार को धान की कस्टम मिलिंग को लेकर उस वक्त बवाल मचा, जब एक मिलर ने डीओ कटवाए बगैर एक ट्रक धान का परिवहन कर लिया। इसकी खबर मिलते ही अफसर हरकत में आए और सभी मिलर्स का ट्रक रूकवा कर डीओ जांचने लगे। जिस मिलर ने डीओ कटवाए बगैर धान का परिवहन किया था, उसके खिलाफ जब एफआईआर की बात आई तो डीएमओ और एएफओ में ठन गई। डीएमओ का कहना है कि एएफओ ने संबंधित मिलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराने का दबाव बनाया, जबकि एएफओ का कहना है कि डीएमओ झूठ बोल रहे हैं। वे फालतू बात करते हैं, उनसे कोई लेना-देना नहीं है। अपने विभाग के वे जिम्मेदार अधिकारी हैं, इसलिए खुद अपनी गलती को छिपाने उन पर लांछन लगा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि समर्थन मूल्य के अंतर्गत इस वर्ष खरीदे गए करीब 67 लाख क्विंटल धान में से अधिकांश को जिले के अलग-अलग संग्रहण केन्द्रों में रखवाया गया था। वहीं शेष धान को सीधे खरीदी केन्द्रों से मिलरों को उठाव करने के लिए निर्देशित किया गया था। खरीदी केन्द्रों से धान उठाव होने के बाद संग्रहण केन्द्रों में रखे धान के उठाव की बारी आई। वर्तमान में मिलर्स द्वारा जिले के संग्रहण केन्द्रों से धान का उठाव किया जा रहा है। जिला मुख्यालय जांजगीर के संग्रहण केन्द्र से शुक्रवार को 32 ट्रकों में धान लोड किया गया था, लेकिन डीओ जारी नहीं हुआ था। इसी बीच शनिवार और रविवार अवकाश पड़ गया। बताया जा रहा है कि सोमवार की सुबह ग्राम खोखरा में संचालित नर्मदी राइस मिल के संचालक ने डीओ कटवाए बगैर एक ट्रक धान का परिवहन कर लिया। इसकी जानकारी मिलने पर जिला विपणन अधिकारी डीसी वर्मा अपने अमले के साथ किसान राइस मिल पहुंचे और संग्रहण केन्द्र प्रभारी प्रियंका देवांगन से जवाब तलब करने लगे, तब उन्होंने उठाव किए गए धान का डीओ जारी नहीं होने की बात कही। प्रभारी देवांगन ने बताया कि एनआईसी का सर्वर डाउन है, जिसके कारण डीओ नहीं कट पाया है। पूरी जानकारी लेने के बाद डीएमओ वर्मा ने संबंधित राइस मिलर के खिलाफ जांजगीर थाने में एफआईआर दर्ज करवाने की बात कही। डीएमओ के निर्देश पर संबंधित मिलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने जांजगीर थाने के नाम पर पत्र तैयार किया जा रहा था, तभी सहायक खाद्य अधिकारी राजेश शर्मा वहां आ धमके और इस मामले को लेकर डीएमओ वर्मा में उनकी कहा-सुनी हो गई। 

विवाद गहराने के बाद दोनों अफसर वहां से अपने-अपने दफ्तर चले गए। इसकी जानकारी दोपहर करीब एक बजे मीडियकर्मियों तक पहुंची, तब मीडियाकर्मी किसान राइस मिल पहुंचे, जहां संग्रहण केन्द्र प्रभारी देवांगन मौजूद थी। उन्होंने इस मामले में स्पष्ट जानकारी देने से इंकार कर दिया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि एनआईसी का सर्वर डाउन है, जिसकी वजह से डीओ कटने में असुविधा हो रही है। मीडियकर्मी उनसे चर्चा कर ही रहे थे, तभी वहां डीएमओ वर्मा फिर से पहुंचे। उन्होंने कहा कि संबंधित मिलर ने धान का अवैध रूप से परिवहन किया है, जिसकी रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई जा रही थी, लेकिन एएफओ राजेश शर्मा ने मना कर दिया। डीएमओ वर्मा ने आरोप लगाया कि एएफओ शर्मा मिलरों को शह दे रहे हैं, जिसके कारण धान उठाव में अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हुई है। 

उन्होंने एएफओ पर कई संगीन आरोप भी लगाए, जिसे मीडियाकर्मियों ने कैमरे में रिकार्ड कर लिया। इसके बाद मीडियाकर्मी जब कलेक्टोरेट स्थित खाद्य विभाग के दफ्तर पहुंचे और एएफओ शर्मा से बात की तो उन्होंने डीएमओ वर्मा को झूठा बताया। उन्होंने कहा कि डीएमओ वर्मा झूठ बोल रहे हैं। वे फालतू बात करते हैं। संग्रहण केन्द्र से धान उठाव कराने की जिम्मेदारी मार्कफेड की है, खाद्य विभाग को इससे कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए मेरे द्वारा किसी तरह का हस्ताक्षेप किए जाने का सवाल ही नहीं उठता। कुल मिलाकर, एक मिलर्स द्वारा नियम विरूद्ध परिवहन किए गए एक ट्रक धान को लेकर दो जिम्मेदार अफसरों ने अलग-अलग और बेतुका बयान दिया है, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। बहरहाल, इस मामले में कलेक्टर तथा अन्य उच्चाधिकारी अब क्या रूख अपनाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
 

लेन-देन को लेकर हुई गाली-गलौज

बताया जा रहा है कि सोमवार को किसान राइस मिल में धान के परिवहन तथा डीओ काटने को लेकर जिला विपणन अधिकारी डीसी वर्मा तथा सहायक जिला खाद्य अधिकारी के बीच खूब गाली-गुप्तार हुई। दोनों ने एक-दूसरे को खूब खरी-खोटी सुनाई, जिसके गवाह वहां मौजूद कई मिलर्स और हमाल हैं। वहां मौजूद कुछ हमालों ने मीडियाकर्मियों को बताया कि विवाद लेन-देन की बात को लेकर शुरू हुआ था। दोनों अफसर मिलरों से लेनदेन कर डीओ काटने की योजना बना रहे थे, लेकिन राशि को लेकर उनके बीच बात नहीं बनी, जिससे मामला बिगड़ गया और एक मिलर के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने तक की नौबत आ खड़ी हुई। मगर मीडियाकर्मियों के वहां पहुंचने से दोनों अफसर वहां से पतली गली से निकल लिए।
 

मंंडी में चार दिनों से 28 ट्रक धान डंप

जांजगीर स्थित संग्रहण केन्द्र से उठाया गया 32 में से 28 ट्रक धान कृषि उपज मंडी परिसर में रखा हुआ है। बताया जा रहा है कि इनमें से एक भी ट्रक धान का डीओ जारी नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को एनआईसी का सर्वर खुलने के बाद केवल तीन ट्रक धान का डीओ जारी हुआ है। वहीं एक ट्रक धान को मिलर जबरदस्ती ले गया है। शेष धान का डीओ जारी करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में एक सवाल यह उठता है कि यदि डीओ जारी नहीं हुआ था तो शुक्रवार को उन ट्रकों में धान को आखिर क्यों रखवाया गया। इस बीच दो दिन अवकाश भी पड़ गया। यदि ऐसे में कोई घटना होती तो उसका जिम्मेदार आखिर कौन होता, इसका जवाब किसी भी अफसर के पास नहीं है।
 

कहीं अफरा-तफरी का मामला तो नहीं

संग्रहण केन्द्रों से धान उठाव तथा डीओ काटने को लेकर मार्कफेड के अफसरों द्वारा जिस प्रकार से लापरवाही बरती जा रही है, उससे धान की बड़े पैमाने पर अफरा-तफरी की संभावना बढ़ गई है। सोमवार को एक मिलर द्वारा डीओ जारी करवाए बगैर एक ट्रक धान परिवहन किए जाने के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। संभावना जताई जा रही है कि इस वर्ष धान उठाव तथा परिवहन के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़झाला हुआ है। हालांकि अधिकारी जीरो शार्टेज की बात कह रहे हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। बताया जा रहा है कि जिले की कई समितियों तथा संग्रहण केन्द्रों में भारी पैमाने पर धान का शार्टेज मिला है, जिसे दबाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। संग्रहण केन्द्र जांजगीर में पिछले दिनों दो बार लगी आग को इसी से जोडक़र देखा जा रहा है।

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