सोमवार, 17 अप्रैल 2017

आलिशान भवन में रहते हैं सरपंच-सचिव, फिर भी बीपीएल कार्डधारी, गरीबी रेखा सूची में ग्राम पंचायत अमेराडीह के शत्-प्रतिशत लोगों का नाम

सभी उठा रहे सरकारी योजनाओं का लाभ, बीपीएल सर्वे सूची पर उठे सवाल

 

जांजगीर-चांपा. ग्राम पंचायत अमेराडीह के सरपंच और सचिव आलिशान मकान में रहते हैं, इनके घर वे सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो सुविधा संपन्न लोगों के घरों में रहती है, फिर भी इनका नाम गरीबी रेखा सूची में दर्ज है। ये सरकार की उन सभी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, जो गरीबों के लिए चलाई जा रही हैं। खास बात यह है कि इस गांव के सभी परिवारों का नाम बीपीएल सूची में दर्ज है और वे सभी गरीबों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उठा रहे हैं। इससे शासन-प्रशासन द्वारा तैयार कराई गई बीपीएल सर्वे सूची पर सवाल उठने लगे हैं।

जिले के मालखरौदा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत अमेराडीह की कहानी दिलचस्प है। ग्राम पंचायत अमेराडीह में आश्रित गांव सतगढ़ भी शामिल है। इस तरह दोनों गांवों को मिलाकर कुल आबादी लगभग 1500 है। यहां के सभी परिवारों का नाम गरीबी रेखा सूची में दर्ज है, जो शासन की योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इसकी जानकारी मिलने पर जब कुछ मीडियाकर्मियों ने गांव पहुंचकर सच्चाई जानी तो चौंकाने वाली बातें सामने आई। गांव पहुंचने पर पता चला कि सरपंच सविता अजय चंद्रा का नाम भी बीपीएल सूची में शामिल है। इन्होंने सरपंच चुनाव जीतने के बाद भी अपना नाम बीपीएल सूची से नहीं कटवाया है। 


हद की बात तो यह है कि सरपंच और उनके पति अजय चंद्रा का स्वयं का दो मंजिला मकान है, जहां सभी सुविधाएं मौजूद हैं। जानकारी लेने पर पता चला कि सरपंच सविता और उसके परिजन सस्ता राशन, उज्ज्वला गैस योजना सहित उन तमाम योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, जो गरीबों के लिए सरकार चला रही है। ग्रामीणों से जानकारी लेने पर पता चला कि इसी गांव में ग्राम पंचायत जमगहन के सचिव सुरेश कुमार चंद्रा का भी आलिशान मकान है और उनका भी नाम बीपीएल सूची में दर्ज है। मीडियाकर्मियों ने जब सचिव के घर का मुआयना किया तो वहां का नाजारा देखने लायक था। सचिव का मकान भी आलिशान है, जहां सभी सुविधाएं मौजूद हैं। जानकारी लेने पर पता चला कि सचिव को शासन से हर माह करीब 13-14 हजार रुपए वेतन मिलता है, इसके बावजूद वह खुद को गरीब बताकर शासन की योजनाओं का लाभ ले रहा है। पूछताछ में यह भी पता चला कि ग्राम पंचायत अमेराडीह तथा उनके आश्रित ग्राम सतगढ़ में रहने वाले सभी परिवार बीपीएल हितग्राही हैं, जबकि इन सभी का खुद का पक्का का मकान है। इसके बावजूद सभी परिवार शासन-प्रशासन को गुमराह कर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
 

अनुदान लेकर बनवाया शौचालय

पंचायत अधिनियम के तहत सरपंच, पंच तथा सचिव के मकान में पक्का शौचालय होना अनिवार्य है, लेकिन इस गांव की सरपंच सविता के घर शौचालय नहीं था। बताया जा रहा है कि उसने झूठी जानकारी देकर चुनाव लड़ा और हाल ही में स्वच्छ भारत योजना के तहत अनुदान लेकर अपने घर में शौचालय का निर्माण करा लिया। इस गांव में रहने वाले सचिव और सभी पंचों का भी हाल कुछ इसी तरह है। इन्होंने भी सरकार से अनुदान लेकर अपने घरों में शौचालय निर्माण करवाया है, जबकि नियमत: इनके घर में पहले ही शौचालय बन जाना था। मगर इन्होंने सरकारी अनुदान राशि डकारने के चक्कर में नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
 

हर माह डकार रहे लाखों का राशन

इन गांवों के सभी सुविधा संपन्न लोग मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के तहत सस्ता राशन डकार रहे हैं। जबकि आलीशान मकान और वार्षिक आय पर्याप्त होने के कारण इन्हें मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना का लाभ नहीं मिलना चाहिए। मजे कि बात यह है कि सरपंच और उसके परिजनों के नाम पर ही कई राशन कार्ड बनवाए गए हैं, जिनसे हर माह सस्ता राशन उठाया जा रहा है। सचिव और पंच भी इस काम में पीछे नहीं हैं। उन्होंने भी खुद को बीपीएल परिवार बताकर राशन कार्ड बनवा लिया है। बताया जा रहा है कि सरकार की सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में यहां खुलकर धांधली की जा रही है, जिसकी शिकायत भी उच्चाधिकारियों तक पहुंची है, लेकिन सरपंच एवं अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
 

बीपीएल सूची में नाम तो है

बीपीएल सूची में नाम तो है, इसलिए मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना सहित अन्य योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इस गांव के सभी परिवारों के नाम पर बीपीएल कार्ड है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से घर में शौचालय का निर्माण करवाया गया है। बांकी क्या सही और क्या गलत है, इसके बारे में क्या कहें। आप स्वयं समझ सकते हैं।

-सविता अजय चंद्रा, सरपंच, ग्राम पंचायत अमेराडीह

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