कौशल विकास योजना का बुरा हाल, लगातार बढ़ रही शिक्षित बेरोजगारों की संख्या
जांजगीर-चांपा. मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत युवाओं को रोजगार व आत्मनिर्भर बनाने के लिए लाखों रुपए खर्च किया जा रहा है, लेकिन युवाओं को रोजगार ही नहीं मिल रहा है। प्रशिक्षण लेने के बाद भी युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण देने के बाद भी जिले में बेरोजगारों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना सन 2012-13 में शुरु हुई। युवाओं को आत्मनिर्भर बनने व बेरोजगारी दूर करने के लिए रोजगार के अवसर मिल सके, इसके लिए विभिन्न क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाता है। लेकिन इसके बाद से अब तक जिले में करीब चार बरस में हजारों युवाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है, लेकिन आज भी जिला रोजगार कार्यालय में बेरोजगारों की लाइन पंजीयन कराने में लगी रहती है। यानी योजना प्रारंभ होने के बाद भी जिले में बेरोजगारों की संख्या कम नहीं हुई है। जिले में अब भी बेरोजगारों को रोजगार के लिए भटकना पड़ता है। वहीं कौशल उन्नयन में प्रशिक्षण देने वाले संस्था पर रोजगार दिलाने कोई ध्यान नहीं देते हैं। वहीं कौशल विकास योजना की मॉनिटरिंग करने वाले भी केवल प्रशिक्षण दिलाने तक की अपनी जवाबदारी समझते हैं। इसके कारण जिले के युवाओं को प्रशिक्षण के बाद भी रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
प्रशिक्षण की खानापूर्ति
मुख्यमंत्री के योजना की शुरुआत करने के पीछे प्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार व आत्मनिर्भर बनाने व रोजगार मिल सके, इसके लिए योजना प्रारंभ की है। लेकिन यह योजना अधिकारियों की अनदेखी व रुचि नहीं लेने के कारण योजना केवल प्रशिक्षण देने तक ही सिमट कर रह गई है। इसके कारण युवा प्रशिक्षण तो ले रहे हैं, लेकिन इन्हें रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहा है।
जिले में बढ़ रहे बेरोजगार
जिले में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बेरोजगारों को रोजाना जिला रोजगार कार्यालय के बाद पंजीयन के लिए कतार में लगा हुआ देखा जा सकता है। जिले में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या डेढ़ लाख से अधिक है। दूसरी ओर, युवाओं को रोजगार मिल सके, इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है, लेकिन जिले में लगातार बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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