जिले को मिला दस हजार मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य, शाख कर्तन कार्य जारीसात प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियां कार्यरत, संग्रहण के लिए बनाए गए हैं 86 फड़
जांजगीर-चांपा. तेंदूपत्ता संग्रहण के एवज में संग्राहकों को अब 300 रुपए अधिक मजदूरी मिलेगी। शासन ने संग्रहण प्रति हजार गड्डी दर 1500 से बढ़ाकर 1800 रुपए कर दिया है। मजदूरी दर में बढ़ोतरी किए जाने का लाभ जिले के संग्राहक हितग्राहियों को मिलेगा।
जिले के चांपा, सक्ती और बलौदा वन परिक्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए सात प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियां कार्यरत हैं। चांपा, सक्ती, अकलतरा, पहरिया, बलौदा, पंतोरा और खिसोरा समितियों के जरिए हर साल तेंदूपत्ता का संग्रहण करवाया जाता है। इस बार भी बीते 15 फरवरी से शाख कर्तन कार्य प्रारंभ हो गया है। वनमंडल चांपा को इस वर्ष 10 हजार मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य मिला। तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए वन क्षेत्रों में तैयारी शुरू हो गई है। आगामी दिनों में फड़ में संग्रहण का काम भी शुरू हो जाएगा। संग्रहण के लिए 86 फड़ बनाए गए हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार, संग्रहण दर में वृद्धि किए जाने के साथ ही बोनस राशि में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
लक्ष्य पूरा करने की मशक्कत
जिले में सिमटती वन भूमि के चलते तेंदूपत्ता का उत्पादन भी घटने लगा है। ग्रामीणों की मानें तो पहले संग्राहकों को निकटवर्ती क्षेत्रों में ही तेंदूपत्ता मिल जाता था, लेकिन अब लंबी दूरी पहुंच कर पत्ता संग्रहण करने की मजबूरी बनी हुई है। जान जोखिम में डालकर पत्ता संग्रहण के लिए पहुंचना पड़ता है। दूर वन क्षेत्र में जाने से वन्य जीवों का दहशत बना रहता है, जिसका असर संग्रहण पर पडऩे लगा है। जिले के वनांचल क्षेत्रों में तेंदू के सिमटते पौधों को लेकर वन विभाग बेपरवाह बना हुआ है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में तेंदू के पेंड़ों की तादात में लगातार कमी आ रही है।
साख कर्तन में 12 रुपए की वृद्धि
संग्रहण दर के साथ ही साख कर्तन की दर में वृद्धि की गई है। प्रति एकड़ तक साख कर्तन करने के लिए समितियों को 40 रुपए की दर से भुगतान किया जाता था, जो 52 रुपए कर दिया गया है। इन दिनों वनों में साख कर्तन का काम शुरू हो गया है। तेंदूपत्ता का उत्पादन अधिक से अधिक हो, इसके लिए साख कर्तन करते हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रति वर्ष चरणपादुका भी प्रदान की जाती है, जिस वर्ष महिलाओं को पादुका दी जाती है, उस वर्ष पुरूष संग्राहकों को नहीं दी जाती। इस वर्ष महिलाओं को चरणपादुका दिया जाना है। हितग्राहियों के नाम की सूची शासन को भेजी जा चुकी है।
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