परसा में ग्राम पंचायत भवन निर्माण कराकर कर्ज में लदा सरपंच, लोकार्पण के छह माह बाद भी नहीं मिल पाई निर्माण कार्य की राशि
राजेन्द्र राठौर@जांजगीर-चांपा. ग्राम परसा में नवनिर्मित ग्राम पंचायत भवन छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा भवन है, जहां सभी तरह की सुविधाएं मौजूद हैं। राज्य सरकार ने इस भवन को मॉडल पंचायत भवन का दर्जा दिया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद करीब छह माह पहले बड़े तामझाम के साथ इस भवन का लोकार्पण भी कराया जा चुका है, लेकिन भवन निर्माण की लागत राशि ग्राम के सरपंच को अब तक प्राप्त नहीं हुई है। आलम यह है कि भुगतान पाने के लिए सरपंच पिछले छह माह से अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।
जिले के जनपद पंचायत मालखरौदा अंतर्गत ग्राम पंचायत परसा की अपनी अलग पहचान है। यहां छत्तीसगढ़ के पहले मॉडल ग्राम पंचायत भवन का निर्माण हुआ है, जहां वे सारी सुविधाएं मौजूद हैं, जो खासकर बड़े सरकारी दफ्तरों में होती हैं। करीब छह माह पहले बड़े तामझाम के साथ इस पंचायत भवन का लोकार्पण किया गया है। लोकार्पण के बाद इस भवन को छत्तीसगढ़ का मॉडल पंचायत भवन बताकर सरकार खूब वाहवाही बटोर रही है। ग्राम सुराज अभियान के तहत आयोजित शिविरों में ग्रामीणों को इस भवन के फोटोग्राफ्स दिखाए जा रहे हैं।
ग्राम पंचायत भवन परसा की खूबी का बखान करने के मामले में न तो प्रशासनिक अफसर कहीं चूक रहे हैं और न ही सत्तासीन पार्टी के जनप्रतिनिधि पीछे हैं, लेकिन जिस भवन को छत्तीसगढ़ का मॉडल पंचायत भवन बताकर वाहवाही लूटी जा रही है, उस भवन के निर्माण की लागत का भुगतान ग्राम पंचायत परसा के सरपंच को अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। सरपंच तीन बार कलेक्टर से स्वयं मुलाकात उन्हें अपनी समस्या बता चुका है, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है। इस वजह से सरपंच परेशान हैं। ऐसे में शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
तामझाम के साथ हुआ था शिलान्यास
मॉडल पंचायत का मुआयना करने ‘दैनिक नवीन कदम’ की टीम गुरूवार को जब ग्राम परसा पहुंची तो सारी हकीकत खुलकर सामने आई। सरपंच उत्तरा गबेल ने बताया कि करीब एक वर्ष पूर्व 13 मई 2016 को छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण मद के तहत 14.150 लाख रुपए की लागत से निर्मित इस पंचायत भवन का शिलान्यास हुआ था। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अजय चंद्राकर थे। शिलान्यास कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद कमला देवी पाटले अध्यक्ष बतौर शामिल हुई थी। वहीं संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े, चंद्रपुर विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव, छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त विकास निगम के अध्यक्ष निर्मल सिन्हा, जिला पंचायत के अध्यक्ष नंदकिशोर हरवंश, पूर्व शिक्षा मंत्री मेधाराम साहू, मालखरौदा जनपद अध्यक्ष सावित्री रंजीत अजगल्ले कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन और जिला पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी विश्वेश कुमार विशेष रूप से उपस्थित थे। शिलान्यास कार्यक्रम के साथ ही मॉडल पंचायत भवन का निर्माण शुरू करवा दिया गया था, जो 28 अगस्त 2016 को पूर्ण हो गया। इसके कुछ दिन बाद ही सितम्बर 2016 में इस भवन का लोकार्पण कराया गया।
आश्वासन देकर चलता कर रहे कलेक्टर
ग्राम पंचायत परसा के सरपंच गबेल ने बताया कि शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अफसरों ने भवन का निर्माण गुणवत्तायुक्त करवाने की बात कही थी। कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ का कहना था कि प्रदेश का यह पहला भवन है, जिसे मॉडल भवन का दर्जा मिल रहा है। इसलिए भवन में सभी सुविधाएं मौजूद रहे। अफसरों के निर्देशानुसार, नियत समय में भवन निर्माण करवाकर भुगतान संबंधी सारी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई, लेकिन लोकार्पण के छह माह बाद भी भवन निर्माण की लागत राशि नहीं मिलना उनके लिए विडंबना से कम नहीं है। सरपंच गबेल का कहना है कि लंबित भुगतान की मांग को लेकर वे कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, जनपद सीईओ सहित कई जनप्रतिनिधियों से मिल चुके हैं। सभी से सिर्फ आश्वासन ही मिला है। उन्होंने बताया कि वे हाल ही में तीन बार कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन से भी मिले हैं। कलेक्टर डॉ. भारतीदासन हर बार जल्द लंबित भुगतान दिलाने की बात कहकर उन्हें चलता कर देते हैं।
सरपंच पर दस लाख रुपए का कर्ज
ग्राम पंचायत परसा में निर्मित सर्वसुविधायुक्त भवन को प्रदेश के लिए रोल मॉडल बताकर जहां शासन-प्रशासन वाहवाही लूट रहा है। वहीं इस भवन का निर्माण करवाकर सरपंच कर्जदार हो गया है। सरपंच गबेल ने बताया कि पंचायत भवन निर्माण के लिए मनरेगा से 8.15 लाख, मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के तहत 5 लाख तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण से एक लाख की स्वीकृति मिली थी। इस तरह कुल 14 लाख 15 हजार रुपए की लागत से पंचायत भवन का निर्माण शुरू करवाया गया, लेकिन अफसरों के निर्देशानुसार सुविधा बढ़ाने के चक्कर में लागत 14 लाख 15 हजार रुपए से बढक़र करीब 20 लाख पहुंच गई। उन्होंने बताया कि निर्माण के लिए सारी सामग्री उधार में ली गई थी। कुछ माह पहले मुख्यमंत्री समग्र ग्रामीण विकास योजना के तहत 5 लाख तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण अंतर्गत स्वीकृत एक लाख रुपए प्राप्त हुआ, जिसे संबंधितों को भुगतान किया गया है। वहीं शेष राशि तकरीबन दस लाख उन्हें अब तक नहीं मिली हैं, जिससे वे साहूकारों और व्यवसायियों का कर्जदार हो गए हैं।
राशि नहीं मिलने से कई सरपंचों ने खींचे हाथ
जिले के मालखरौदा और डभरा विकासखंड के करीब 15 ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत परसा में निर्मित पंचायत भवन की तर्ज पर मॉडल पंचायत भवन का निर्माण करवाया जाना है। बताया जा रहा है कि इसकी स्वीकृति शासन स्तर से मिल चुकी है, लेकिन संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच मॉडल भवन निर्माण कराने पीछे हट रहे हैं। अधिकतर सरपंचों ने समय पर राशि नहीं मिलने की वजह से अपने हाथ खींच लिए हैं। जानकारी मिली है कि 15 में से सिर्फ दो ग्राम पंचायतों में सरपंच ने मॉडल पंचायत भवन का निर्माण शुरू करवाया है, जबकि अन्य पंचायतों के सरपंच कुल लागत की आधी राशि मिलने के बाद ही कार्य शुरू कराने की जिद पर अड़े हैं, जिन पर अफसर लगातार काम शुरू करवाने का दबाव बना रहे हैं।
सरकार की नीति गलत
ग्राम परसा में निर्मित पंचायत भवन में सभी सुविधाएं मौजूद हैं। यहां सरपंच, उपसरपंच के बैठने के लिए अलग-अलग कक्ष से लेकर मीटिंग हॉल, शौचालय, विश्राम कक्ष तथा रसोई कक्ष का निर्माण करवाया गया है। करीब बीस लाख रुपए से निर्मित मॉडल पंचायत भवन की निर्माण लागत का भुगतान लोकार्पण के छह माह बाद भी नहीं हो पाया है। ऐसे में सरपंच ग्राम विकास को गति देने की आखिर सोंच भी कैसे सकता है। सरकार की नीति गलत है, जिसके कारण ग्राम विकास प्रभावित हो रहा है।

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