शुक्रवार, 14 जुलाई 2017

कैशलेस क्रांति की दौड़ में पिछड़ गया अपना जिला, पूरी तरह से कैशलेस घोषित नहीं हुआ कोई शहर या गांव

जांजगीर-चांपा. नोटबंदी के बाद शुरु हुए कैशलेस क्रांति की दौड़ में जिला पिछड़ गया है। नवंबर 16 में नोटबंदी के बाद से लेकर मार्च तक किसी भी शहर या गांव को पूरी तरह कैशलेस घोषित नहीं किया जा सका है, जबकि इसके लिए विशेष अभियान भी चलाया गया। इसी को देखते हुए नेशनल पेमेंट कार्पोरेशन आफ  इंडिया ने सभी जिलों को नए वित्तीय वर्ष में कैशलेश ट्रांजेक्शन के लिए टारगेट जारी किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नए टारगेट में वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान करीब चार कैशलेस ट्रांजेक्शन जिले में दिखाना होगा। इसके मुताबिक, रोजाना लगभग 1 लाख से अधिक कैशलेस ट्रांजेक्शन होना है। पेमेंट कार्पोरेशन से चिप्स को यह जानकारी भेजी गई है, जो जिला पंचायत के माध्यम से जिलेभर में लागू की जाएगी। यह टारगेट अलग-अलग विभागों के कामकाजों से पूरा किया जाएगा। इसके अलावा अधिक से अधिक ट्रांजेक्शन कामर्शियल करने पर जोर दिया गया है, जिसमें बाजार में होने वाली छोटी-बड़ी खरीदारी शामिल है। ज्ञात हो कि नोटबंदी के बाद से जिला प्रशासन ने कैशलेश लेनदेन के लिए काफी मशक्कत की। गांव-गांव में इसके लिए युवाओं को ट्रेनिंग दी गई व सीएससी के माध्यम से भी ग्रामीणों को मोबाइल वॉलेट, स्वाइप व आधार बेस्ड पेमेंट के लिए जागरुक किया गया, लेकिन केवल प्रशिक्षण के बाद पूरी प्रक्रिया थम गई। जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए नए सिरे से अभियान चलाए जाने की तैयारी है। लोगों को अधिक से अधिक ई-पेमेंट के लिए जागरुक किया जाएगा, जिससे जिले में कैशलेस ट्रांजेक्शन की स्थिति सुधर सके और लोग कैशलेन ट्रांजेक्शन को अपना सकें।


ठगी से सहमे ग्रामीण, नहीं कर रहे पेटीएम यूज

ग्रामीण इलाकों में ई-पेमेंट ने गति पकड़ ली थी, लेकिन पेटीएम व ई-ट्रांजेक्शन के नाम पर लगातार हुई ठगी से ग्रामीण सहम गए। इसके ग्रामीण इलाकों में पेटीएम से ट्रांजेक्शन बिल्कुल शून्य हो गया है। पहले प्रशासन ने गांव-गांव में पहुंचकर दुकानदारों व व्यापारियों को पेटीएम की सुविधा देने एकाउंट खुलवाया था, लेकिन वह भी फेल होती दिख रही है।


डिमांड के बाद भी नहीं बंटी पीओएस मशीन

बाजार में नगद की कमी व प्रशासन के अभियान के बाद शहर में 3 हजार से अधिक आवेदन पीओएस मशीन के लिए गई थी, लेकिन अब तक कई बैंकों ने डिमांड के बाजूद मशीन उपलब्ध नहीं कराई है। इसकी वजह से भी कैशलेस अभियान ठंडे बस्ते में चला गया है। लीड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक शहर में अब तक करीब सात सौ मशीनें ही बंट सकी हैं।

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