जांजगीर-चांपा. जिला वनमंडलाधिकारी के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने हसदेव पब्लिक स्कूल के पीछे स्थित निजी भूमि से बड़े पैमाने पर बेशकीमती लकड़ी जब्त की है। जब्त लकडिय़ों में संरक्षित प्रजाति कौहा का 87 नग गोला तथा एक हजार से अधिक बल्लियां शामिल हैं, जिसे वन विभाग अपने कब्जे में लेकर मूल्य निर्धारण करने में जुटा हुआ है। वन अफसरों की मानें तो जिले में यह इस वर्ष की सबसे बड़ी कार्यवाही है।
वन मंडलाधिकारी कार्यालय चांपा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीएफओ सतोविशा समाजदार को ग्राम लछनपुर के पास संचालित हसदेव पब्लिक स्कूल के पीछे स्थित एक निजी जमीन में बड़े पैमाने पर बेशकीमती लकडिय़ां डंप होने की सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए डीएफओ समाजदार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंची, जहां चारों ओर उन्हें बेशकीमती लकडिय़ों का पहाड़ दिखा। आसपास मौजूद कुछ लोगों से पूछताछ करने पर डीएफओ को पता चला कि जिस भूमि पर बेशकीमती लकडिय़ां डंप कर रखी गई है, वह चांपा निवासी किसी निर्मला देवी पति कैलाश चंद्र अग्रवाल की भूमि है। मौका मुआयना करने के बाद डीएफओ समाजदार ने भूमि स्वामी को सूचना देकर मौके पर बुलवाया और उनसे लकडिय़ों के संबंध में विस्तृत पूछताछ कर आवश्यक कागजात मांगे गए, लेकिन भूमि स्वामी के पास लकडिय़ों के संबंध में कोई कागजात ही नहीं थे। इसके बाद डीएफओ समाजदार ने पंचनामा कार्यवाही कर बेशकीमती लकडिय़ों को जब्त किया। बताया जा रहा है कि जब्त लकडिय़ों में संरक्षित प्रजाति कौहा का 87 नग गोला तथा एक हजार से अधिक बल्लियां शामिल हैं, जिसे वन विभाग ने अपने कब्जे में लेकर उसी स्थान पर ही सुरक्षित रखा है। वहीं इस पूरे मामले की सूचना चांपा एसडीएम सहित कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन को दी गई है। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो जब्त लकडिय़ों में अधिकांश लकड़ी संरक्षित प्रजाति की है, जिसकी बाजार मूल्य लाखों में होगी। उनका कहना है कि जब्तशुदा लकडिय़ों का मूल्य निर्धारण किया जा रहा है। जब्त लकडिय़ों को मौके से उठवाकर वन विभाग के काष्टागार तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन तथा राजस्व विभाग से मदद मांगी गई है। अधिकारियों का कहना है कि एक-दो दिन के भीतर जब्त पूरी लकड़ी का मूल्य निर्धारण कर लिया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि राजस्व विभाग यदि सहयोग प्रदान करता है तो शीघ्र जब्त लकडिय़ों को काष्टागार भिजवा दिया जाएगा। बहरहाल, इस कार्यवाही से चांपा शहर समेत जिले भर के सॉ मिल संचालक तथा लकड़ी कारोबारियों में हडक़ंप मचा हुआ है, लेकिन जिला वन मंडलाधिकारी की सख्ती की वजह से उनकी बोलती बंद हो गई है।
जनप्रतिनिधि से जुड़ा है मामला
वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिस भूमि से बेशकीमती लकडिय़ां जब्त हुई हैं, उस भूमि स्वामी का पुत्र निर्वाचित जनप्रतिनिधि है। हालांकि विभाग के अधिकारियों ने उस जनप्रतिनिधि का नाम स्पष्ट तौर पर उजागर नहीं किया है, लेकिन इशारों ही इशारों में यह साफ कर दिया है कि उक्त भूमि पर बेशकीमती लकडिय़ां आखिर किस जनप्रतिनिधि ने रखवाई हैं। अधिकारियों का यह भी कहना है कि संबंधित जनप्रतिनिधि चांपा में वर्षों से सॉ मिल का संचालन करते आ रहे हैं। ऐसे में संभावना है कि सॉ मिल में चुपचाप खपाने के लिए उन्होंने बेशकीमती लकडिय़ों को यहां डंप करवाया था।
इस तरह चल रहा था कारोबार
हसदेव पब्लिक स्कूल के पीछे स्थित निजी भूमि से लकड़ी तस्करी का यह काला कारोबार काफी समय से योजनाबद्ध तरीके से संचालित हो रहा था। बताया जा रहा है कि अवैध कारोबारी ने इस काले कारोबार को बेधडक़ जारी रखने के लिए उस भूमि के चारों ओर सागौन प्लांटेशन करवा रखा है, ताकि वहां से गुजरने वाले लोगों की नजर सागौन पेड़ की आड़ में छिपाकर रखी गई बेशकीमती लकडिय़ों पर न पड़े। बताया यह भी जा रहा है कि जिस भूमि से बेशकीमती लकडिय़ां जब्त हुई है, उस भूमि का कुछ हिस्सा शासकीय है, जिसे लीज पर लिया गया है।
वन अधिनियम के तहत कार्यवाही
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जब्तशुदा बेशकीमती लकड़ी करीब दस ट्रक होगी, जिसकी मौजूदा बाजार मूल्य लाखों में है। जब्तशुदा लकडिय़ों का बाजार मूल्य निर्धारण होने के बाद भूमि स्वामी के विरूद्ध वन अधिनियम के तहत मामला पंजीबद्ध कर कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल, जब्त लकड़ी वन विभाग की सुरक्षा में है। वन अधिकारियों का कहना है कि जिले में इस वर्ष की यह पहली बड़ी कार्यवाही है, जब किसी निजी भूमि से बड़े पैमाने पर संरक्षित प्रजाति की भारी भरकम लकड़ी जब्त हुई है।
जब्त लकड़ी दस ट्रक से अधिक
हसदेव पब्लिक स्कूल के पीछे स्थित निजी भूमि में बड़े पैमाने पर संरक्षित प्रजाति की लकडिय़ां डंप होने की सूचना मिली थी। विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि स्वामी से लकडिय़ों से संबंधित कागजात मांगे, लेकिन भूमि स्वामी ने कागजात पेश नहीं किए। इसलिए लकडिय़ों को जब्त किया गया है। जब्तशुदा लकड़ी दस ट्रक से अधिक होगी, जिसका मूल्य निर्धारण किया जा रहा है। आगे की कार्यवाही वन अधिनियम के तहत की जाएगी।


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