मंगलवार, 18 जुलाई 2017

जितनी आवश्यकता हो, उतना ही उपयोग करें मोबाइल-न्यायाधीश वंदना, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोरथा में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित

सक्ती. मोबाइल फोन जितना उपयोगी है, उतना ही हानिकारक भी है। आजकल सबसे ज्यादा अपराध मोबाइल फोन व इंटरनेट के माध्यम से घटित हो रहे हंै। इसलिए मोबाइल की जितनी आवश्यकता हो, उतना ही उपयोग करें।  ये बातें द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश वंदना दीपक देवांगन ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोरथा में तहसील विधिक सेवा समिति द्वारा आयोजित विधिक एवं जागरूकता शिविर में कही।

न्यायाधीश देवांगन ने छात्र-छात्राओं को कानून के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी व्यक्ति को अपना मोबाइल फोन न दें। यदि आवश्यकता हो तो स्वयं उसके सामने रहकर बात करवाएं।  महिलाओं को कानून में बहुत सारे अधिकार प्राप्त हैं। मगर अज्ञानता के कारण महिलाएंं प्रताडि़त हो रही हैं तथा कानून का उपयोग करने से वंचित हैं।  किसी भी महिला का पीछा करना, घूरना या अश्लील टिप्पणी करना अजमानतीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे अपराध घटित होने पर पीडि़त महिला को अपने अभिभावक या पुलिस को तत्काल सूचित करना चाहिए।  ग्रामीण क्षेत्रों में मोटरयान अधिनियम का सर्वाधिक दुरूपयोग किया जाता है। जहां छोटे-छोटे बच्चों को दोपहिया तथा चारपहिया वाहन चलाने को दे दिया जाता है और किसी गंभीर दुर्घटना होने पर मोटरवाहन मालिक को भारी क्षति का सामना करना पड़ता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को वाहन चलाते समय यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वाहन चालने वाले व्यक्ति के पास वैध ड्राईविंग लायसेंस, गाड़ी का बीमा तथा गाड़ी का परिवहन विभाग में पंजीकरण है अथवा नहीं। उन्होंने कहा कि राजीनामा योग्य अपराध का लोक अदालत के माध्यम से निपटारा करवाना चाहिए, जिससे आपस में प्रेम और सद्भाव बना रहे। न्यायाधीश देवांगन ने स्कूल के शिक्षकों एवं अभिभावकों से भी कानून का पालन किए जाने की बात कही। इस अवसर पर स्कूल की प्राचार्य पी गबेल सहित स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें