गुरुवार, 13 जुलाई 2017

नगरपालिका चांपा में विपक्ष पड़ा कमजोर, लगातार सामने आए भ्रष्टाचार के मामलों में साधी चुप्पी, सत्तासीन दल के पार्षद निभा रहे मजबूत विपक्ष की भूमिका

राजेन्द्र जायसवाल @ चांपा. नगरपालिका परिषद चांपा में भ्रष्टाचार के मामले एक-एककर लगातार सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद, विपक्षी दल भाजपा के पार्षद चुप्पी साधे हुए हैं। नपा में अब तक सामने आए किसी भी भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा पार्षदों ने अपना मुंह नहीं खोला है। वहीं नपा में सत्तासीन कांग्रेस के ही पार्षद मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। इससे एक बात साफ हो गई है कि कांग्रेस समर्थित नपाध्यक्ष से भाजपा समर्थित पार्षदों की तगड़ी सांठगांठ है, जिसके कारण वे नपा में हो रहे भ्रष्टाचार के मामलों में आवाज उठाना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं।

नगरपालिका परिषद चांपा इन दिनों भ्रष्टाचार का गढ़ बना हुआ है। जल आवर्धन योजना के टेण्डर में सामने आई गड़बड़ी का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि ठेकेदार के जरिए नपा के जिम्मेदारों द्वारा चांपा के पीआईएल रोड में अस्थायी दखल के नाम पर चारपहिया वाहन चालकों से अवैध वसूली का मामला सामने आ गया, जिसे लेकर नपा सीएमओ ज्योत्सना टोप्पो और अध्यक्ष राजेश अग्रवाल की कार्यशैली पर ऊंगलियां उठी थी। काफी विवाद के बाद आखिरकार नपा सीएमओ टोप्पो को अस्थायी दखल के नाम पर चारपहिया वाहन चालकों से ठेकेदार द्वारा कराई जा रही अवैध वसूली बंद करानी पड़ी थी। यह मामला भी ठंडा नहीं पड़ा था कि जांजगीर के शिवम इंटरप्राइजेज के संचालक से गुपचुप तरीके से पार्षद निधि के अंतर्गत आठ लाख रुपए की विद्युत सामग्री आपूर्ति कराए जाने का मामला सामने आ गया। इस मामले को लेकर पीआईसी के तत्कालीन सदस्यों ने जमकर बवाल किया था। उन्होंने मामले की शिकायत कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन से करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग भी की थी। बताया जा रहा है कि इस वजह से नपाध्यक्ष अग्रवाल द्वारा पीआईसी के दो सदस्यों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। नपाध्यक्ष अग्रवाल के इस फैसले से नाराज पीआईसी के सभी सातों सदस्यों ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पीआईसी सदस्यों का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद बुधवार को बैठक आयोजित कर नए पीआईसी सदस्यों का चयन भी कर लिया गया। जबकि पीआईसी के पूर्व सदस्यों का आरोप है कि पीआईसी के लिए नए सदस्य चयन करने में भी गड़बड़ी की गई है। बैठक करने से कम से कम एक दिन पूर्व सूचना प्रसारित कराए जाने का प्रावधान है, लेकिन एक दिन की अवधि पूर्ण हुए बगैर जल्दबाजी करते हुए पीआईसी गठन करना मनमानी को दर्शाता है। पीआईसी के पूर्व सदस्यों का यह भी आरोप है कि नपा के कर्ताधर्ता नहीं चाहते कि उनके गलत कार्य के खिलाफ  भी कोई आवाज उठाए। इसलिए उनके स्थान पर अन्य सदस्यों को पीआईसी में शामिल किया गया है, ताकि नपा में एकछत्र राज चलाया जा सके। इस घटनाक्रम के बाद से नगरपालिका का माहौल पूरी तरह से गरमाया हुआ है। नपा में सत्तासीन कांग्रेस के पार्षद ही नपाध्यक्ष के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक रहे हैं, जबकि विपक्षी दल भाजपा के पार्षद नपा में सामने आए भ्रष्टाचार के मामलों में चुप्पी साधे हुए हैं। एक-एककर अब तक सामने आए किसी भी मामले में दोषियों के खिलाफ शासन-प्रशासन से कार्यवाही की मांग करना तो दूर विपक्षी पार्षदों ने अपना मुंह नहीं खोला है। इस वजह से विपक्ष की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। नगर के लोगों का आरोप है कि विपक्ष के पार्षद शुरू से ही कांग्रेस समर्थित नपाध्यक्ष से सांठगांठ कर पालिका में भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं। लोगों का यह भी आरोप है कि कांग्रेस-भाजपा के जनप्रतिनिधियों की आपसी सांठगांठ और स्वार्थ की राजनीति की वजह से नगर का विकास कार्य पूरी तरह से ठप है।

मिल-जुलकर दे रहे भ्रष्टाचार को अंजाम

नगरपालिका परिषद चांपा में भ्रष्टाचार को मिल-जुलकर अंजाम दिया जा रहा है। बताया जाता है कि सत्तासीन दल कांग्रेस और भाजपा समर्थित कुछ पार्षद ही विभिन्न कार्यों का ठेका लिए हुए हैं। व्यक्तिगत स्वार्थ की वजह से वे जनहित से जुड़े मुद्दों, खासकर नपा में हो रहे भ्रष्टाचार के मामलों में कुछ बोलना ही नहीं चाहते हैं। संभवत: यही वजह है कि भाजपा समर्थित पार्षदों ने नपा में अब तक सामने आए भ्रष्टाचार के मामलों में अपना मुंह खोलना लाजिमी नहीं समझा है। हालांकि इस बात से नगर की जनता भली-भांति वाकिफ है। बताया जा रहा है कि नपा में अगर इसी तरह के हालात बने रहे तो आमजनता द्वारा सडक़ पर उतरकर प्रदर्शन किए जाने से इंकार नहीं किया जा सकता।

प्रभारी मंत्री अग्रवाल के समक्ष उठेंगे मुद्दे

प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं जिले के प्रभारी मंत्री अमर अग्रवाल 14 जुलाई को अपने एकदिवसीय प्रवास पर जांजगीर पहुंचने वाले हैं। बताया जा रहा है कि वे भाजपा के जिला कार्यालय में आयोजित एक समारोह में शिरकत करेंगे। इस दौरान नगरपालिका परिषद चांपा में एक-एककर सामने आए भ्रष्टाचार का मुद्दा जोर-शोर से उठ सकता है। भाजपा के कुछ पदाधिकारियों का कहना है कि वे नगरपालिका चांपा में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं, लेकिन नपा से संबंधित मामले एसडीएम या कलेक्टर स्तर के नहीं हैं, इस वजह से उन मामलों के संबंध में उनसे चर्चा नहीं की गई है। चूंकि जिले के प्रभारी मंत्री अग्रवाल स्वयं नगरीय प्रशासन विभाग की कमान संभाले हुए हैं, इसलिए मामलों को उनके समक्ष रखकर ही कार्यवाही की मांग करना उचित होगा।

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