रविवार, 9 जुलाई 2017

नपाध्यक्ष ने खोला मुंह, बोले-हमारी नहीं, किसानों की है लकड़ी, हसदेव पब्लिक स्कूल के पीछे स्थित जमीन से लकड़ी जब्त होने का मामला

जांजगीर-चांपा. हसदेव पब्लिक स्कूल के पीछे स्थित जमीन से लाखों की लकड़ी जब्त होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। लकड़ी जब्त होने के चार दिनों बाद चांपा नपाध्यक्ष ने अपनी जुबान का ताला खोला है। उनका कहना है कि जिस जमीन से लकड़ी जब्त हुई है, वह जमीन उनकी मां के नाम पर दर्ज है, यहां तक तो सब ठीक है, लेकिन जब्त लकड़ी उनकी नहीं, बल्कि किसानों की है। नपाध्यक्ष का दावा है कि फोरलेन सडक़ निर्माण तथा टॉवर विस्तार दौरान काटे गए पेड़ों की लकडिय़ों को किसानों ने उनकी भूमि पर रखवाया था। 

उल्लेखनीय है कि डीएफओ सतोविशा समाजदार को बीते बुधवार को ग्राम लछनपुर के पास संचालित हसदेव पब्लिक स्कूल के पीछे स्थित एक निजी जमीन में बड़े पैमाने पर बेशकीमती लकडिय़ां डंप होने की सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए डीएफओ उसी शाम अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंची, जहां चारों ओर उन्हें बेशकीमती लकडिय़ों का पहाड़ दिखा। आसपास मौजूद कुछ लोगों से पूछताछ करने पर डीएफओ को पता चला कि जिस भूमि पर बेशकीमती लकडिय़ां डंप कर रखी गई है, वह चांपा निवासी निर्मला देवी पति कैलाश चंद्र अग्रवाल की भूमि है। मौका मुआयना करने के बाद डीएफओ ने भूमि स्वामी को सूचना देकर मौके पर बुलवाया और उनसे लकडिय़ों के संबंध में विस्तृत पूछताछ कर आवश्यक कागजात मांगे गए, लेकिन भूमि स्वामी के पास लकडिय़ों के संबंध में कोई कागजात ही नहीं थे। इसके बाद डीएफओ ने पंचनामा कार्यवाही कर बेशकीमती लकडिय़ों को जब्त किया। जब्त लकडिय़ों में संरक्षित प्रजाति कौहा का 87 नग गोला तथा एक हजार से अधिक बल्लियां शामिल हैं, जिसे वन विभाग ने अपने कब्जे में लेकर उसी स्थान पर ही सुरक्षित रखा है। इस मामले में अभी कार्रवाई पूरी नहीं हुई है, लेकिन मामला मीडिया में आने के बाद भूमि स्वामी निर्मला देवी अग्रवाल के पुत्र तथा चांपा नपाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने इस मसले को लेकर अपना मुंह खोला है। उनका कहना है कि जिस भूमि में लकड़ी रखी हुई थी, वह उनकी मां के नाम पर है, लेकिन जब्तशुदा लकड़ी अवैध नहीं है। उनका कहना है कि लकड़ी आसपास के किसानों की है। किसानों ने उनकी जमीन पर लकड़ी सुरक्षित रखी थी। दूसरी ओर, मामला मीडिया में आने के बाद नपाध्यक्ष अग्रवाल लगातार सवालों से घिरते जा रहे हैं। इस मामले में यदि वन मंडलाधिकारी सख्त कार्रवाई करती हैं तो लकड़ी तस्करी के कारोबार से जुड़े एक बड़े गिरोह का निश्चित तौर पर पर्दाफाश हो सकता है।

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