राजकुमार दरयानी@सक्ती. बीपीएल श्रेणी के बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत नि:शुल्क शिक्षा मुहैया कराना शैक्षणिक जिला सक्ती के अंतर्गत संचालित निजी स्कूलों के संचालकों को महंगा पड़ता दिख रहा है। शासन के निर्देश पर बीपीएल श्रेणी के बच्चों को निजी स्कूल संचालक अध्यापन तो करवा रहे हैं, लेकिन शासन की ओर से मिलने वाली राशि पिछले दो वर्षों से स्कूल संचालकों को अप्राप्त है। ऐसे मेें निजी स्कूल संचालकों के चेहरे पर उदासी साफ झलक रही है।
उल्लेखनीय है कि देश भर के स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू है। इस अधिनियम के तहत निजी स्कूल संचालकों को कक्षावार 25 फीसदी सीटों पर बीपीएल श्रेणी के बच्चों को प्राथमिकता के साथ नि:शुल्क प्रवेश देकर अध्यापन कार्य करवाना है। इसके एवज में उन स्कूल संचालकों को शासन की ओर से राशि का भुगतान किया जाना है। शैक्षणिक जिला सक्ती के अंतर्गत सक्ती, जैजैपुर, डभरा और मालखरौदा विकासखंड क्षेत्र में संचालित निजी स्कूलों के संचालकों द्वारा शासन के निर्देश पर बीपीएल श्रेणी के बच्चों को हर साल अध्यापन कार्य करवाया जा रहा है, लेकिन उसके एवज में अब राशि भुगतान करने की बात आ रही है तो शासन-प्रशासन के अधिकारियों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। निजी स्कूल संचालकों के मुताबिक, शैक्षणिक जिला सक्ती के निजी विद्यालयों ने शासन की योजना को सफल बनाने के लिए शिक्षा सत्र 2015-16 एवं 2016-17 में छात्र-छात्राओं को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेश दिया। शिक्षा जिला सक्ती के करीब 150 निजी विद्यालयों में इस अधिनियम के तहत बीपीएल श्रेणी के छात्र-छात्राओं को कक्षावार निर्धारित सीट की तुलना में 25 फीसदी सीट पर प्रवेश दिया गया है। इसके बावजूद शासन द्वारा दोनों वर्षों का शुल्क स्कूल संचालकों को अब तक प्रदान नहीं किया गया है। निजी स्कूल संचालकों का आरोप है कि विद्यालयों को शुल्क की प्रतिपूर्ति नहीं होने के कारण वित्तीय व्यवस्था खराब हो रही है एवं विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों को वेतन भुगतान करने में परेशानी हो रही है। शैक्षणिक जिला सक्ती के चारों विकासखंडों के निजी स्कूल संचालकों ने शासन से शीघ्र प्रतिपूर्ति राशि दिलाए जाने की मांग की है।
छग विधानसभा में उठ चुका है मुद्दा
शैक्षणिक जिला सक्ती के निजी विद्यालयों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत दो वर्षों की प्रतिपूर्ति राशि नहीं मिलने का मुद्दा छत्तीसगढ़ विधानसभा में उठ चुका है। इस मुद्दे को जैजैपुर विधायक केशव चंद्रा ने कुछ माह पहले ध्यानाकर्षण के माध्यम से सदन में उठाया था, तब स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप ने जानकारी दी थी कि शैक्षणिक जिला सक्ती के निजी स्कूल संचालकों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम की राशि जल्द मिल जाएगी। उन्होंने कहा था कि राशि का भुगतान बजट की उपलब्धता के आधार पर होगा, इसमें किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं की गई है।
शासन के प्रति लामबंद हो रहे संचालक
पिछले दो वर्षों से राशि नहीं मिलने के कारण जहां निजी स्कूल संचालकों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ी हो गई है। वहीं शासन इस अधिनियम के तहत बीपीएल श्रेणी के बच्चों को हर साल सुरक्षित सीट पर प्रवेश दिलाने के लिए स्कूल संचालकों पर सख्ती बरत रहा है, जिसे स्कूल संचालकों ने शासन की दोहरी नीति करार देते हुए विरोध जताया है। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि जब प्रदेश के अन्य शैक्षणिक जिलों में प्रतिपूर्ति राशि वितरित कर दी गई है तो शैक्षणिक जिला सक्ती के निजी स्कूल संचालकों को अनावश्यक रूप से क्यों परेशान किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन्हीं सब बातों को लेकर निजी स्कूल संचालक अब शासन के प्रति लामबंद हो रहे हैं।
शासन को भेजा गया है मांग पत्र
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत शैक्षणिक जिला सक्ती ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई जिलों के निजी स्कूल संचालकों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं हो पाया है। हां, यह बात अलग है कि यहां के निजी स्कूल संचालकों को दो वर्ष की राशि अप्राप्त है। इस संबंध में शासन को मांग पत्र भेजा गया है। जल्द आवंटन प्राप्त होने की जानकारी मिली है। जैसे ही राशि मिलती है, वैसे ही निजी स्कूल संचालकों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान कर दिया जाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें