जांजगीर-चांपा. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संगठन चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग तिथियां तय की गई है। इसी के तहत जिले में जिला व विभाग संघचालक के लिए आगामी दिसंबर महीने में चुनाव होने की जानकारी मिल रही है। बताया जा रहा है कि चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने प्रांत मुख्यालय जागृति मंडल से फरमान जारी किया है। संघ के रणनीतिकारों की पूरी कोशिश चुनाव के बजाय आपसी सहमति से जिला व विभाग संघचालकों की नियुक्ति करनी है।
प्रांतीय मुख्यालय से जारी निर्देशों पर गौर करें तो बिना किसी शोरगुल के चुनाव प्रक्रिया को निपटाने कहा गया है। यही नहीं, प्रदेश में एक ही तिथि में चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग तिथियों का ऐलान किया गया है। चुनाव अधिकारी के रूप में संघ के अनुषांगिक संगठनों के जिला व प्रांत स्तर के पदाधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिला और विभाग संघचालक के पद के लिए चुनाव अधिकारी और रणनीतिकार शहर से दूर ग्रामीण क्षेत्रों में कैंप कर रहे हैं। रात्रि में ही चुनाव की पूरी रणनीति तैयार कर ले रहे हैं। रणनीतिकारों की कोशिश है कि खंड स्तरीय और जिला पदाधिकारियों के चयन में भी आम सहमति बनाई जाए। प्रत्येक खंड में दो-दो व जिले से चार या पांच प्रतिनिधियों का चयन करना है। यही प्रतिनिधि विभाग व जिला संघचालकों के चुनाव में बतौर मतदाता हिस्सा लेंगे।
इन्हें मिली चुनाव की जिम्मेदारी
सामाजिक समरसता विभाग के अलावा संघ के अन्य अनुषांगिक संगठनों के जिला व प्रांत स्तर के पदाधिकारियों को संगठन चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, क्योंकि प्रदेश के कई जिलों में यह प्रयोग बेहद सफल हुआ है। लिहाजा, अनुषांगिक संगठन के पदाधिकारियों को ही जिले में चुनाव कराने की जिम्मेदारी देने की संभावना है।
इन पदों के लिए होगा मनोनयन
संघ के संगठनात्मक ढांचा पर गौर करें तो खंड व जिला स्तर के पदाधिकारियों का पहले चुनाव होगा। प्रत्येक खंड से दो-दो व जिले से चार या पांच प्रतिनिधियों का चुनाव होगा। यही प्रतिनिधि जिला व विभाग संघचालक के पद पर चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार को वोट डालेंगे। चुनावी प्रक्रिया से जिला व विभाग के अलावा प्रांत संघचालक की नियुक्ति की जाती है। संघ के संगठनात्मक चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो आज तक किसी भी पद के लिए चुनाव की नौबत नहीं आई है। बंद कमरे में होने वाली चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी एक नाम पर आमसहमति बना ली जाती है और चुनाव अधिकारी उनके नामों की घोषणा कर देते हैं। नगर संघचालक का पद मनोनयन के आधार पर तय किया जाता है।

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