सोमवार, 30 अक्टूबर 2017

लोस और विस में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की मांग, महिला कांग्रेस कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री को सौंपेगी मांग पत्र

जांजगीर-चांपा. लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग मुखर होने लगी है। महिला कांग्रेस इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम एक मांग पत्र 31 अक्टूबर को कलेक्टर को सौंपेगी। इस संबंध में महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष शेषराज हरवंश ने बताया कि महिलाएं भारत की आबादी का आधा हिस्सा है और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने भारी प्रगति की है, लेकिन अभी भी नीति बनाने और विधायी निकायों में इनका उचित प्रतिनिधित्व नहीं है। 

उन्होंने कहा कि महिलाएं किसी भी तरह से कम सक्षम या योग्य नहीं है, लेकिन कई सामाजिक मानदंडों ने व्यवस्थित रूप से पुरूषों के साथ समान रूप में साझा करने से उन्हें दूर रखा है। जबकि यह जरूरी है कि हम एक नया लोकतांत्रिक पर्यावरणीय व्यवस्था तैयार करें, जो कानून और नीति बनोन में सक्रिय रूप से उनके द्वारा उच्च भागीदारी सुनिश्चित करता है। उन्होंने बताया कि इसकी शुरूआत तब हुई, जब राजीव गांधी ने प्रतिनिधित्व के अंतर को समझते हुए स्थानीय स्वराज्य स्तर पर भी महिलाओं को भागीदार बनाने के लिए इसका बीड़ा उठाया। 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों के मार्ग ने राजनीतिक रूप से महिलाओं को सशक्त बनाने के मुद्दे को बल देकर उन्हें इन निकायों में 33 फीसदी आरक्षण दिया। इसे आगे बढ़ाते हुए सोनिया गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कई राज्यों की मदद से स्थानीय निकाय में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर शासन के साथ हमारे अनुभव से पता चला है कि नेतृत्व की स्थिति में महिलाएं, जो निर्णय लेती हैं, वो एक समावेशी समाज के निर्माण का कारण बनता है, जो हमें भारत के संवैधानिक विचार पर आगे बढऩे में मदद करता है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि महिलाएं अभी भी पिछले आम चुनाव के बाद संसद में 11 फीसदी हिस्सेदारी के साथ अपना प्रतिनिधित्व कर रही है, जो शर्मनाक है। जाहिर है कि विधायी निकायों में बड़े पैमाने पर महिलाओं की इतनी कम संख्या समाज के लिए गंभीर परिणाम के परिचायक होंगे। इसलिए यह अनिवार्य हो जाता है कि हमें महिला आरक्षण विधेयक को पारित करके इस ऐतिहासिक असंतुलन को ठीक करने में कोई समय नहीं खोना चाहिए, जो मार्ग 2010 में संसद में रखा गया था और राज्य सभा में एक भारी बहुमत से पारित किया गया था, लेकिन 15वीं लोकसभा के विघटन के साथ ही समाप्त हो गया। जिलाध्यक्ष हरवंश ने बताया कि महिला कांग्रेस इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम एक मांग पत्र 31 अक्टूबर को कलेक्टर को सौंपेगी।

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