राजू दरयानी@सक्ती. एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब नोटबंदी की घोषणा की, तब पांच सौ और एक हजार रुपए के पुराने नोटों को बदलवाने युवा, किसान, बुजुर्ग तथा महिलाएं बैंकों में टूट पड़े थे। बैंकों के बाहर सुबह से देर शाम तक लोगों की लंबी कतार लगी रहती थी। ठीक वैसा ही हाल इन दिनों भी है। बशर्ते, पुराने नोट जमा करवाने नहीं, बल्कि किसान अपने खून-पसीने की कमाई पाने के लिए सुबह से शाम तक बैंकों के बाहर कतार में लगे हुए हैं। बोनस की राशि के लिए बैंकों के बाहर भीड़ इतनी ज्यादा रहती है कि किसानों को धक्के तक खाना पड़ रहा है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह राज्य के किसानों को समर्थन मूल्य पर बेचे गए धान का बोनस बांटने के नाम पर जगह-जगह एकत्रित कर बोनस तिहार कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री डॉ. सिंह के अलावा मंत्री एवं सत्ता पक्ष के सांसद व विधायक शामिल हो रहे हैं। बोनस तिहार कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. सिंह द्वारा दावा किया जा रहा है कि बोनस की संपूर्ण राशि एक क्लिक में किसानों के खातों में हस्तांतरित कर दी गई है, लेकिन बोनस बतौर मिली उस राशि को प्राप्त करने के लिए किसानों को कितनी मशक्कत करनी पड़ रही है, इसका अंदाजा जिले के सहकारी बैंकों के सामने लगी किसानों की जबरदस्त भीड़ को देखकर सहज ही लगाया जा सकता है। क्षेत्र की ही बात करें तो जिला सहकारी बैंक सक्ती में बोनस राशि वितरण व्यवस्था का अत्यंत बुरा हाल है। पिछले तीन दिनों से बैंक के बाहर सुबह होते ही किसानों की लंबी कतार लग जा रही है। सुबह से कतार में लगे किसानों को शाम तक बोनस की राशि मिलेगी या नहीं, यह तक तय नहीं रहता। स्थानीय बैंक के बाहर 13 अक्टूबर को भी किसानों की लंबी लाइन देखी गई। कुछ किसानों ने बताया कि नोटबंदी के समय अपना पैसा बदलने के लिए प्रधानमंत्री ने हमें घंटों तक बैंक के बाहर लाइन में खड़ा करवाया था। वहीं अब धान के बोनस की राशि को पाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बैंकों के सामने घंटों तक खड़ा रहने के लिए विवश कर दिया है। किसानों का कहना था कि बेहतर यह होता कि बैंक के बजाय हमारे खाते में आई राशि का भुगतान विभिन्न सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाता। इस व्यवस्था से हमें इतनी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता।
बैंक में एकमात्र काउंटर ने बढ़ाई परेशानी
किसानों ने बताया कि स्थानीय बैंक में एकमात्र काउंटर से राशि भुगतान किए जाने के कारण किसानों को घंटों तक लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि बोनस राशि भुगतान के लिए कई काउंटर खोले गए होते तो इतनी परेशानी नहीं होती। ग्राम लिमतरा, रायपुरा, सकर्रा, टेमर, सिरली के किसान बुधेश्वर राठौर, लक्ष्मी प्रसाद, राजकुमार चौहान, दुर्गा दास, भीखम पटेल, धनेश्वर प्रसाद, सुखनंदन, बिहारीलाल ने बताया कि राशि अहारण करने के लिए वे सुबह से ही अपने घरों से निकलकर बैंक के सामने लाइन लगाकर खड़े रहते हैं। सुबह से शाम से खड़े रहने के कारण कई बुजुर्ग गिर रहे हं,ै परन्तु इस ओर शासन-प्रशासन का ध्यान नहीं है।
बोनस बांटकर वाहवाही लूट रही सरकार
किसानों ने कहा कि साल भर मेहनत करने के बाद उपज की कीमत मिलती है, जिससे किसान अपना तथा परिवार का पालन पोषण करते हैं। राज्य सरकार ने चुनाव के दौरान प्रतिवर्ष बोनस देने का वायदा किया था, किन्तु तीन वर्षों तक किसानों को बोनस से वंचित रखा गया। आगामी वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में इस वर्ष किसानों को धान का बोनस बांटकर सरकार वाहवाही लूट रही है। किसानों ने बताया कि यह बोनस किसानों के लिए जी का जंजाल साबित हो रहा है। किसान सुबह से ही बैंक के बाहर कतार में लगे रहते हैं, जबकि बैंक के कर्मचारी अपने निर्धारित समय पर ही बैंक आते हैं। उसके बाद ही बैंककर्मियों द्वारा किसानों को आहरण पर्ची का वितरण किया जाता है। ऐसे में विलंब से बैंक पहुंचे किसानों को आहरण पर्ची प्राप्त नहीं हो पाती और वे मायूस होकर लौट जाते हंै। इस स्थिति में लगातार दो-तीन दिनों के बाद ही उनका नम्बर आता है।
व्यवस्थित तरीके से बोनस का वितरण
बैंक में व्यवस्था के लिए पुलिस की सहायता लेने के साथ ही किसानों को व्यवस्थित रूप से बोनस राशि का वितरण उनके खातों के अनुसार किया जा रहा है। प्रतिदिन शाखा से लगभग एक से 1.5 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को किया जा रहा है।
-विंध्यवासनी सिंह, प्रभारी शाखा प्रबंधक, जिला सहकारी बैंक
केवल दलालों की है रमन सरकार
रमन सरकार केवल दलालों की सरकार है, जो किसानों को बोनस के नाम पर छल रही है। अगर इन्हें बोनस देना रहता तो जब इनकी धान खरीदी की गई, तभी क्यों नहीं दिया गया। किसानों को दोहरा परेशान क्यों किया जा रहा है। किसानों द्वारा जब धान बेचा गया था, तब अपने ही पैसों के लिए उन्हें परेशान होना पड़ा था और अब बोनस पाने के लिए इन्हें परेशान होना पड़ रहा है।

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