शनिवार, 20 जनवरी 2018

बेहतर नेतृत्व का दावा करने वाली मोदी सरकार हर मामलों में विफल, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ी कीमत ने बढ़ाया लोगों का दर्द

राजेन्द्र राठौर@त्वरित टिप्पणी. देश की कानून और अर्थव्यवस्था लगातार बद्तर होती जा रही है। देश को बेहतर नेतृत्व प्रदान करने का दावा करने वाली भाजपा और मोदी सरकार हर मामलों में विफल हो चुकी है। तेल, साबुन, नारियल की कीमतों में बेतहाशा इजाफा के बाद अब पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ी हुई कीमत ने लोगों का दर्द बढ़ा दिया है। बढ़ती महंगाई की मार झेल रही देश की जनता को भाजपा से अब कोई खास उम्मीद नहीं है, बावजूद इसके देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित भाजपा के मंथन कार्यक्रम से क्या निकलकर आएगा, इस पर नजर जरूर है। 

देश की राजधानी दिल्ली समेत हरियाणा में लगातार सामने आ रहे गंभीर किस्म के अपराधों ने केन्द्र में सत्तासीन मोदी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सप्ताह भर के भीतर देश के कई राज्यों में अनेक मासूमों के साथ हुई दरिंदगी ने लोगों को उद्वेलित कर दिया है। हद की बात तो यह है कि गंभीर मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिसे नियंत्रित करने के बजाय मोदी सरकार के तरफ से बयान आ रहा है कि सरकार सभी मामलों को लेकर चिंतित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अन्य मंत्रीगण देश और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गहरें विचार में डूबे हुए हैं, लेकिन नतीजा क्या निकल रहा है, यह सबके सामने है। इसे सरकार की कमजोरी और विफलता ही कहें कि पाकिस्तान समेत कई पड़ोसी देशों ने दोस्ती का हाथ बढ़ाकर देश में आतंकवादी हमले कराए और दहशत फैलाया, फिर भी मोदी सरकार नरम रवैया अपना रही है। अगर, केन्द्र में सत्तासीन मोदी सरकार वास्तव में देशहित को लेकर चिंतित है तो इस तरह की घटना आखिर क्यों हो रही है, यह एक बड़ा सवाल है। मौजूदा हालात ऐसे है कि देश में आतंकवाद, नक्सलवाद व गंभीर किस्म के अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। इन विषयों पर चिंतन करने के बजाय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अन्य दिग्गज नेता आगामी चुनाव को लेकर मंथन कर रहे हैं। इन नेताओं द्वारा इस मसले पर विचार नहीं किया जा रहा है कि देश से आतंकवाद, नक्सलवाद को आखिर खत्म कैसे किया जाए? इन्हें इस बात का दर्द भी नहीं है कि हाल ही में हुए आंतकवादी हमले में कई जवान मारे गए हैं, जिनके परिजनों के आंखों से आसू अब तक नहीं सूखे है। 

लिहाजा, उनके घर पहुंचकर ढ़ाढस बांधे। शहीदों के परिजन सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता के भूखे नहीं हैं, क्या सरकार उन जवानों को वापस लौटा सकती है। यह संभव नहीं है, लेकिन भविष्य में होने वाली इस तरह की घटनाओं को चिंतन करके योजनाबद्ध तरीके से टाला जा सका है। मगर, भारतीय जनता पार्टी का देश के विभिन्न राज्यों में चल रहा मंथन कार्यक्रम देश के मौजूदा हालातों पर चिंतन करने के लिए नहीं, अपितु आगामी चुनाव को लेकर रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है, इसमें कोई शक नहीं है। खैर, केन्द्र में भाजपा जब से सत्तासीन हुई है, तब से विचारों का ही दौर चल रहा है। अब देखना यह है कि देश भर में चल रहे मंथन कार्यक्रमों से क्या निकल कर आता है। क्या वाकई में किसी विशेष पहलू पर विचार-विमर्श होगा या यह कार्यक्रम केवल चुनाव की तैयारियों तक ही सीमित रह जाएगा।

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