राजेंद्र राठौर@जांजगीर-चांपा. हसदेव लोक महोत्सव एवं औद्योगिक मेला-2018 के नाम पर जमकर लूट-खसोट हो रही है। वैसे तो यह आयोजन स्वैच्छिक सहयोग राशि से संपन्न होना था, लेकिन चांपा एसडीएम ने इस आयोजन को ‘वसूली महोत्सव’ बना दिया है। जी हां, तीन दिवसीय लोक महोत्सव के आयोजन के लिए एसडीएम ने शहर सहित आसपास के प्रत्येक प्राइवेट स्कूल संचालक को 50 हजार रुपए जमा करवाने का टारगेट दिया है। इसके लिए एसडीएम के हस्ताक्षर से संबंधितों को बकायदा एक पत्र भी जारी हुआ है, जिसमें चेक अथवा बैंक ड्राफ्ट के जरिए आयोजन समिति के खाते में चाही गई राशि जमा कराने की बात कही गई है।
दरअसल, जाज्वल्यदेव लोक महोत्सव एवं एग्रीटेक कृषि मेला की तर्ज पर पिछले तीन वर्षों से चांपा के भालेराय मैदान में हसदेव लोक महोत्सव एवं औद्योगिक मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव का आगाज 27 जनवरी को हुआ है, जिसका समापन 29 जनवरी को होना है। जानकारी के अनुसार, राज्य शासन के संस्कृति विभाग की ओर से तीन दिवसीय इस महोत्सव के आयोजन के लिए किसी प्रकार की सहयोग राशि नहीं दी गई है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि शुरू से ही यह महोत्सव स्थानीय स्तर पर स्वैच्छिक सहयोग से संपन्न होता आ रहा है। यह शासकीय आयोजन नहीं है, लेकिन जिला प्रशासन और स्थानीय स्तर के अधिकारियों ने इस आयोजन को शासकीय रूप देने की पूरी कवायद की है, ताकि यह आयोजन उनकी मनमर्जी से संपन्न हो। यही वजह है कि लोक महोत्सव के प्रभारी एवं चांपा एसडीएम युगलकिशोर उर्वशा महोत्सव के लिए बेहतर व्यवस्था के नाम पर लूट-खसोट पर अमादा हो गए हैं।
आपको बता दें कि एसडीएम उर्वशा द्वारा दस दिन पहले चांपा शहर तथा आसपास संचालित प्रत्येक प्राइवेट स्कूल के प्रबंधक को एक पत्र प्रेषित किया गया है, जिसके जरिए हसदेव लोक महोत्सव के आयोजन के लिए प्रत्येक स्कूल संचालक से 50-50 हजार रुपए की सहयोग राशि मांगी गई है। पत्र में कहा गया है कि सहयोग राशि मेला आयोजन समिति के नाम से चेक अथवा ड्राफ्ट के माध्यम से यथाशीघ्र प्रदान की जाए। दिलचस्प बात यह है कि स्कूल संचालकों को प्रेषित यह पत्र स्थायी लेटर पैड के बजाय कम्प्यूटर से तैयार कराए गए लेटर पैड में है, जिसमें कही भी पत्र क्रमांक का उल्लेख नहीं है। बहरहाल, चांपा एसडीएम के इस पत्र को लेकर जहां प्राइवेट स्कूल संचालकों में आक्रोश है। वहीं इस आयोजन को शुरू कराने वाले शहर के अधिकांश संभ्रांत लोग भी इसे गलत एवं अवैधानिक करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि लोक महोत्सव के नाम पर लूट-खसोट और वसूलीबाजी ठीक नहीं है।
पीआईएल को दस लाख का टार्गेट
हसदेव लोक महोत्सव के आयोजन के नाम पर केवल प्राइवेट स्कूल संचालक ही नहीं लुट रहे, बल्कि चांपा के आसपास संचालित औद्योगिक प्रतिष्ठानों के संचालक भी खासे परेशान हैं। बताया जा रहा है कि चांपा एसडीएम ने प्रकाश इण्डस्ट्रीज लिमिटेड को पत्र लिखकर आयोजन के लिए 10 लाख रुपए उपलब्ध कराने कहा है। इसी तरह चांपा के आसपास संचालित छोटे उद्योगों को दो से पांच लाख रुपए तक जमा कराने का फरमान जारी हुआ है। इनके अलावा क्रसर उद्योग संघ, राइस मिलर, ठेकेदार संघ, सॉ मिल संचालक संघ, दवा विक्रेता संघ, नगरपालिका के ठेकेदार आदि को भी आयोजन समिति के खाते में चाही गई सहयोग राशि जमा कराने कहा गया है।
नपाध्यक्ष को भी लगा दिया किनारा
चांपा तथा आसपास के लोगों द्वारा लंबे समय से हसदेव लोक महोत्सव के आयोजन की मांग की जा रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए तीन वर्ष पूर्व इस आयोजन की शुरूआत की गई। प्रारंभ से लेकर लगातार तीन वर्षों तक यह आयोजन नगरपालिका परिषद चांपा के देखरेख और आयोजकत्व में संपन्न होता आया है, लेकिन इस वर्ष इस आयोजन पर अफसरशाही हावी है। एसडीएम युगलकिशोर उर्वशा ने अपनी मनमर्जी करते हुए नगरपालिका प्रशासन तथा आयोजन समिति के अधिकांश पदाधिकारियों को किनारे लगा दिया है। इनमें चांपा नगरपालिका के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल का नाम पहले क्रम पर है, जो किसी तरह की पूछपरख नहीं होने से खुद को कुंठित महसूस कर रहे हैं।


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