मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

डभरा तहसील क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहा अवैध बोर खनन, बोर खनन से पूर्व नहीं ली जा रही प्रशासन से किसी तरह की अनुमति

डोलकुमार निषाद@डभरा. सूखे के हालात को देखते हुए कलेक्टर ने पूरे जिले को अभावग्रस्त घोषित किया है, जिसके तहत बोर खनन पूर्णत: प्रतिबंधित है। विशेष परिस्थितियों में प्रशासन से अनुमति लेकर ही बोर खनन कराया जा सकता है, लेकिन तहसील क्षेत्र डभरा में नियम-कायदों को ताक पर रखकर रोजाना बोर खनन करवाए जा रहे हैं। बोर खनन से पूर्व किसी तरह की अनुमति भी नहीं ली जा रही है। वहीं क्षेत्र में पदस्थ प्रशासनिक अफसर ऐसे मामलों में किसी तरह की कार्यवाही नहीं कर रहे हैं, जिससे कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। 

उल्लेखनीय है कि पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण डभरा तहसील क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, जिसके कारण कलेक्टर द्वारा भूमिगत जलस्रोतों के दोहन पर प्रतिबंध लगाया गया है। कलेक्टर के इस आदेश का पालन जमीनी स्तर पर नहीं हो रहा है। डभरा तहसील क्षेत्र में स्थित निजी जमीनों अथवा खेतों में दलालों के माध्यम से बोर खनन धड़ल्ले से चल रहा है, जिसके लिए किसी प्रकार की अनुमति स्थानीय प्रशासन से नहीं ली जा रही है। कई जगहों पर बोर खनन होने की शिकायत ग्रामीणों द्वारा एसडीएम से मौखिक रुप से की जा चुकी है, परंतु संबंधितों के विरुद्ध क्या कार्रवाई हो रही है, इसका पता नहीं चल पा रहा है। इधर, डभरा क्षेत्र में बोर खनन करने वाले दलालों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। प्रतिदिन 4 से 5 बोर पाइंट खोदे जा रहे हैं। दलाल पूरी होशियारी से रात्रि में ही मशीन लगवाते हैं और रात्रि में ही 2 से 3 पाइंट पूर्ण कर देते हैं। दूरदराज के गांवों में दिन में भी बोर खुदाई की जा रही है। दलालों द्वारा मनमाने ढंग से बोर खुदाई का कार्य कराया जा रहा है, बावजूद इसके जिम्मेदार अफसर इन पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। जानकारी के अनुसार ग्रामीणों को बोर मशीन के दलालों द्वारा कहा जाता है कि वे कलेक्टर से अनुमति ले लेंगे। वहीं अनुमति लेने के एवज में मोटी रकम भी वसूली जा रही है। दलालों पर जब तक कड़ी कार्यवाही नहीं की जाती है, तब तक अवैध बोर खनन का खेल जारी रहेगा। बताया जाता है कि एजेंटों द्वारा ग्रामीणों को यह  कहा जाता है कि उन्होंने अधिकारियों से बातचीत कर रखी है, इसलिए उन्हें किसी प्रकार की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। दलाल जिस तरह अधिकारियों से सेटलमेंट होने की बात कह रहे हैं, उससे लगता है कि निश्चित रूप से अधिकारियों द्वारा उन्हें संरक्षण दिया जा  रहा है, तभी तो अब तक एक भी बोर मशीन संचालक के विरुद्ध कार्यवाही नहीं हो सकी है। बहरहाल, भूमिगत जलस्रोतों का दोहन करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यदि जल्द ही इसे नहीं रोका गया तो निश्चित ही डभरा तहसील क्षेत्र में जलसंकट एक बड़ी समस्या बनकर सामने आएगी।


एजेंट ले रहे जिम्मेदारी

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कतई पता नहीं है कि बोर खुदवाने के लिए किसी प्रकार की अनुमति लेनी पड़ती है। वे कहते हैं कि उन्होंने लोगों से सुना था कि कलेक्टर द्वारा बोर खनन पर रोक लगाई गई है तथा इसके लिए एसडीएम कार्यालय में आवेदन करके अनुमति लिया जा सकता है, लेकिन उनके पास जब बोर खनन करने वाले एजेंट आते हैं तो वे कुछ राशि लेकर सारी जवाबदारी स्वयं ले लेते हैं। इसलिए वे एजेंटों के झांसे में आ जाते हैं। उनका कहना है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी नियम-कायदों का सही तरीके से प्रचार-प्रसार करें तो उन्हें बोर खनन के लिए अनुमति लेने में कोई परेशानी नहीं है।


क्या कहते हैं क्षेत्रवासी

क्षेत्रवासियों का कहना है कि उनके द्वारा गोपनीय तरीके से कई बार संबंधित विभाग को सूचना दी गई है। कभी मोबाइल के माध्यम से तो कभी पत्र के माध्यम से, परंतु आज तक किसी भी बोर मशीन संचालक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। उनका कहना है कि उन्हें खुलकर सामने आते इसलिए नहीं बन रहा है कि इससे कहीं व्यक्तिगत दुश्मनी ना हो जाए, परंतु सूचना मिलने के बाद भी अधिकारियों द्वारा किसी तरह की कार्यवाही नहीं की जा रही है।

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