जांजगीर-चांपा. सरकार ने जिन टैक्सों को हमेशा के लिए बंद कर दिया है, उनकी पढ़ाई कॉलेजों में जारी है। इसके अलावा खाता मेंटेनेंस के भी पुराने ही तरीके विद्यार्थियों को सिखाए जा रहे हैं, जबकि माल व सर्विस टैक्स लागू होते ही सभी पुरानी परंपराओं पर विराम लग गया है। ऐसे में तीन साल की बैचलर डिग्री के बावजूद कॉमर्स के छात्रों को जीएसटी सीखने के लिए अलग से ट्रेनिंग लेनी होगी।
टैक्स संबंधी सभी पढ़ाई बीकॉम के बैचलर कोर्स में होती है, जिसमें सभी तरह के अप्रत्यक्ष कर सिलेबस का हिस्सा है, लेकिन जीएसटी लागू होते ही देश से अप्रत्यक्ष करों की व्यवस्था खत्म हो गई है। इसके बावजूद विद्यार्थियों को मजबूरी में अप्रत्यक्ष करों की पढ़ाई करनी पड़ रही है। ऐसे में बीकॉम की पढ़ाई पूरी कर लेने वाले विद्यार्थियों को जीएसटी के लिए अलग से क्लास अटैंड करनी पड़ेगी। टीसीएल महाविद्यालय के वाणिज्य के सहायक प्राध्यापक ने बताया कि पाठयक्रम में जीएसटी नहीं होने की वजह से बच्चों को दिक्कत हो रही है। नई कर प्रणाली की शिक्षा के लिए इसे इसी सत्र से पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए।
बदलाव में विवि सक्षम नहीं, यूजीसी करेगी विचार
पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर लगातार कॉलेजों में आवाज उठ रही है, लेकिन इसमें बदलाव किसी भी विश्वविद्यालय के अधिकार में नहीं है। यूजीसी नए पाठ्यक्रमों को जोडऩे या पुराने पाठ्यक्रमों को खत्म करने का निर्णय लेते हुए इसे लागू कराती है। बदलाव के लिए पत्र लिखे जा रहे हैं।
ये है अप्रत्यक्ष कर, जिसे सरकार ने कर दिए हैं बंद
कॉमर्स में अप्रत्यक्ष कर के रुप में केंद्रीय विक्रय कर, वाणिज्य कर, सीमा शुल्क, आबकारी कर सहित अन्य करों की पढ़ाई होती है। जीएसटी लागू होते ही ये सभी कर बंद हो गए हैं, लेकिन अब भी ये कर पाठ्यक्रमों का मुख्य हिस्सा हैं। फाइनल इयर में इन करों के ही मुख्य विषय शामिल हैं।

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