शुक्रवार, 17 मार्च 2017

तीन सौ वर्षों की परंपरा कायम, पुरूषों पर बरसी लाठियां

रंग पंचमी पर मनाई गई होली, पंतोरा में लटठमार होली का विशेष महत्व

 

जांजगीर-चांपा. रंगपंचमी के मौके पर पंतोरा में कुंवारी कन्याओं और महिलाओं ने गांव में घूम-घूम कर पुरूषों पर लाठियां बरसाई। इस मौके पर गांव से गुजरने वाले हर शख्स को लाठियों की मार झेलनी पड़ी। पिछले सैकड़ों वर्ष से चली आ रही ल_मार होली की परंपरा को ग्रामीणों ने इस वर्ष भी कायम रखा। 

जिला मुख्यालय जांजगीर से 45 किलोमीटर दूर पंतोरा गांव में शुक्रवार को दोपहर बाद से ल_मार होली की धूम रही। आयोजन को सफल बनाने के लिए सुबह से ही ग्रामीण जुट गए थे। गांव में स्थित मां काली के मंदिर में पूजा अर्चना कर दोपहर को 9 कुंवारी कन्याओं के हाथ बैगा द्वारा अभिमंत्रित की गई लाठियां थमा दी गई। मंदिर परिसर में लगी देवताओं की मूर्तियों को प्रतीकात्मक रूप से ल_मार कर परंपरा की शुरूआत की गई। इसके बाद गांव की महिलाएं एवं युवतियां हाथों में लाठी लेकर लोगों को पीटने के लिए गलियों में निकल पड़ी। औरतें, युवतियां व बालिकाएं हाथ में ली हुई लाठियों से जब पुरूषों को पीटने के लिए दौड़ाने लगी, तब पुरुष खुद को बचाते भागते दिखे। वहीं महिलाओं और युवतियों से पिटने वाले लोग परंपरा की वजह से नाराज नहीं हुए। खास बात यह रही कि मारना-पीटना हंसी खुशी के वातावरण में हुआ। इस मौके पर रंग गुलाल का भी जमकर प्रयोग हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि ड्यूटी पर तैनात पुलिस वालों को भी यहां महिलाओं की ल_ खानी पड़ी। गांव के एक बुजुर्ग ने बताया कि ग्राम पंतोरा में ल_मार होली का विशेष महत्व है। धूल पंचमी के एक दिन पूर्व संध्या पर गांव के कुछ दूर स्थित पहाड़ी पर स्थित मां मड़वारानी मंदिर से बांस की लकडिय़ां लाकर मां दुर्गा के मंदिर में रख दी जाती हैं। धूल पंचमी के दिन दोपहर से पूजा की शुरूआत बैगा द्वारा की जाती है। गांव की 9 कुंवारी कन्याओं को देवी मानकर उनकी पूजा की जाती है। उसके बाद मां दुर्गा की मूर्ति को बांस की लकडिय़ां समर्पित कर उनकी आराधना की जाती है। इस प्रक्रिया के बाद अभिमंत्रित लकडिय़ां कुंवारी कन्याओं को देकर परंपरा की शुरूआत होती है। गांव के लोग भी इसमें बढ़ चढक़र हिस्सा लेते हैं। पंतोरा में ल_मार होली पिछले तीन सौ वर्षो से अधिक समय से मनाई जा रही है।

महामारी से बचने ल_मार होली

ग्राम पंतोरा के लोग महामारी से बचने के लिए हर वर्ष धूल पंचमी के दिन ल_मार होली मनाते हैं, जो अब परंपरा का रूप ले चुकी है। इस परंपरा के पीछे एक कहानी है। पंतोरा के संतोष मिर्झा ने बताया कि वर्षों पूर्व गांव में महामारी फैली हुई थी। गांव के कई लोग बीमारी की चपेट में थे, तब गांव के एक बैगा ने मां दुर्गा की आराधना कर ग्रामीणों को महामारी से मुक्ति दिलाने के लिए धूल पंचमी के दिन आराधना की। बैगा के भक्तिभाव से प्रसन्न मां दुर्गा ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि धूल पंचमी के दिन कुंवारी कन्याएं जिस पुरूष पर लाठी बरसाएंगी, वह रोग से मुक्ति पा जाएगा। उस दिन से गांव में ल_मार होली की शुरूआत हुई।

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