सोमवार, 27 मार्च 2017

रचनाओं का पाठ श्रोताओं को इस कदर भाया कि कर उठे वाह-वाह

शील साहित्य परिषद में दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित

 

जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय जांजगीर के शील साहित्य भवन में आयोजित जाजंगीर साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन गद्य और पद्य रचनाओं का पाठ श्रोताओं को इस कदर भाया कि सब वाह-वाह कर उठे। जी हां, यह स्थानीय पाठकों और श्रोताओं की रचनात्मक प्रतिभा है कि उन्हें पठनीयता से बेहद लगाव हैं, ऐसा ही असर सभागार में बैठे श्रोताओं की रूचि से लगा। संगोष्ठी में बुद्धिजीवियों के अलावा पत्रकार, शिक्षाविद और साहित्यकार सहित स्थानीय व्यवसायियों ने भी बढ़-चढक़र हिस्सा लिया। 


कहानी बेहद गंभीर विधा हैं, लेकिन उसके प्रति भी अनुराग श्रोताओं में दिखा, जितना उत्साह उन्होंने व्यंग्य और कविता के प्रति दिखाया। लोक बाबू, खुर्शीद हयात, श्रद्धा थवाईत के साथ छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कहानीकार सतीश जायसवाल ने भी कहानियों का पाठ किया। श्रद्धा ने हवा में फडफ़ड़ाती चि_ी का पाठ किया। वहीं कहानी में प्रेमिल भाव की बड़ी कलात्मक ढंग से अभिव्यक्ति श्रद्धा थवाईत ने की। वरिष्ठ कहानीकार लोक बाबू ने खुशी नामक कहानी का पाठ किया। कहानी कालेज की थीम ओर केंद्रित थी। 


शायद इसी वजह से नई पीढ़ी ने बेहद पसंद किया। खुर्शीद हयात ने अपनी कहानी से पूर्व कहा कि उर्दू के कहानीकार होने के बावजूद आज हिंदी समाज में अपनी रचना को सुनाने का अवसर मिला। मेरी कहानी का शीर्षक पहाड़ नदी और वोह है। कहानी की तारतम्यता का आलम यह था कि खुर्शीद की कहानी ने सब को बांधे रखा। बिलकुल नए विषय पर केंद्रित कहानी श्रोताओं को आनंदित कर गई। वहीं दूसरी और समाज के पैनेपन को अपने अंदाज में प्रस्तुत करने में माहिर हरफन मौला कहानीकार सतीश जायसवाल ने अपनी कहानी से पूर्व पूरे परिप्रेक्ष्य पर अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि दिविक रमेश का जाजंगीर में होना एक बड़ी घटना हैं। 


अनूप श्रीवास्तव एक बड़े पत्रकार हैं, जिनका छत्तीसगढ़ की जनता अभिनन्दन करती हैं। ‘अब घर चलते हैं’ नामक कहानी का पाठ किया। कहानी नए भावभूमि पर केंद्रित थीं। इस अवसर पर काव्य कुंज संग्रह का मंचस्थ विद्वानों ने लोकार्पण किया। व्यंग्य के सत्र में देश के प्रख्यात चुनिंदा व्यंग्यकार श्रोताओं के सम्मुख छाए रहे। उनमें दुर्ग जिले के विनोद साव, भिलाई से रवि श्रीवास्तव और बिलासपुर से बरुण श्रीवास्तव सखाजी शामिल थे। इस सत्र की अध्यक्षता लखनऊ से पधारे सुपरिचित व्यंग्यकार व अट्टहास पत्रिका के सम्पादक अनूप श्रीवास्तव ने की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ व्यंग्य के मामले में व्यंग्य सम्पन्न प्रदेश हैं। 


इस प्रदेश ने व्यंग्य के प्रमुख हस्तक्षर देश को दिए है। व्यंग्यकार देश की विसंगतियों पर बड़े तीखे प्रहार करते हैं। उनकी मौजूदगी समय को परिभाषित करती हैं। इस अवसर पर अनूप श्रीवास्तव ने कुछ व्यंग्य कवितायें भी सुनाई। कविता का सत्र दोनों सत्रों पर भारी पड़ा। कविता दिल के करीब होती है, जबकि व्यंग्य विसंगतियों पर प्रहार करता हैं। बहरहाल शरद जोशी की परंपरा का निर्वाह करते हुए विनोद साव ने अपने व्यंग्य पाठ की शैली से सब को चकित किया। कविता दिल के करीब होते हुए दिमाग पर असर करती है। शायद यही कारण था कि कवियों ने सामयिक विषयों को आधार बनाया। प्रेम जीवन के मूल्यों पर केंद्रित आस्था का स्वर जहां मुखरित हुआ। वहीं दूसरी और परंपरा का निर्वाह भी रचनाकारों ने बखूबी निभाया। 


कवियों में तनवीर हसन, नीरज मंजीत, दिनेश गौतम, मांझी अनंत, घनश्याम त्रिपाठी, विद्या गुप्ता, सरिता दोषी, नरेंद्र श्रीवास्तव, विजय राठौर और सतीश कुमार सिंह प्रमुख रहे। तनवीर हसन की कविताओं में ताजगी की बयार महकी। वहीं दूसरी ओर बस्तर की खुश्बू मांझी अनंत की रचनाओं में नजर आई। कवर्धा के वरिष्ठ कवि नीरज मंजीत की रचनाओं में सामयिक बैचैनी नजर आई। वहीं सरिता दोषी की कविताओं में मुक्त अभिव्यक्ति खिलखिलाती नजर आईं। सतीश कुमार सिंह की कविताओं में आत्मीय सरोकार और भारतीयता का एक निष्पक्ष नजर देखने को मिला। इस मौके पर सोवियत नेहरू लेंड पुरुस्कार से सम्मानित साहित्यकार दिल्ली से पधारे डॉ. दिविक रमेश ने कहा कि हिंदी कविता का भविष्य बड़ा उज्जवल है। आज कवि पहले की अपेक्षा ज्यादा सजग और ज्यादा चिंतन प्रधान हो गया है। 


शायद यही वजह है कि उनकी रचनाओं में महानगरीय चिंतन का पक्ष ज्यादा मुखर हुआ है। पहले लेखक अपने वरिष्ठ पीढ़ी की रचनाओं का अध्ययन किया करते थे, वह भावना आज लुप्तप्राय: हो चुकी है। उस भावना को पुन: जगाने की आवश्यकता हैं। इसके पूर्व राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के हिंदी संपादक डॉ. ललित किशोर मंडोरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में रचनात्मक प्रतिभा की कमी नहीं हैं, अपितु छत्तीसगढ़ की जमीन को खंगालने भर की देर है। यह प्रदेश निश्चित ही असाधारण विलक्षण प्रतिभा का केंद्र पुंज है, जिसको पारस की आवश्यकता है। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी रचनात्मक लेखकीय संवाद और लेखक से मिलिए कार्यक्रम, सृजन शिविर लगाएं जाएंगे। 


लखनऊ से आमंत्रित वरिष्ठ पत्रकार व अट्टहास पत्रिका के संपादक अनूप श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से स्थानीय प्रतिभाओं को मौका मिलता है। इसके लिए मैं न्यास को बधाई देना चाहूंगा और न्यास अध्यक्ष को शुभकामनाएं कि उनके दिशा-निर्देश पर बेहतर कार्यक्रम प्रदेश के साथ देश भर में आयोजित किए जा रहे हैं। शील साहित्य परिषद के अध्यक्ष विजय कुमार दुबे ने भी न्यास के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।

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