जांजगीर-चांपा. लॉ कमीशन ऑफ इंडिया द्वारा पेश किए गए अधिवक्ता अधिनियम संशोधन बिल 2017 के विरोध में जिले के अधिवक्ता लामबंद हो गए हैं। जिला अधिवक्ता संघ के बैनर तले वकील 21 अप्रैल को अपने काम का बहिष्कार कर न्यायालय परिसर के बाहर संशोधन बिल की प्रतियां जलाएंगे।
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अजय केशरवानी ने बताया कि प्रदेश अधिवक्ता संघ की बैठक 16 अप्रैल को हुई थी। बैठक में प्रस्तावित अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2017 को काला कानून निरूपित किया गया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता जैसे स्वतंत्र पेशा को गुलाम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रस्तावित बिल में वकीलों के हितों की बात का उल्लेख नहीं है। वकीलों के कल्याण, आकस्मिक मृत्यु, बीमारी, दुर्घटना पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वर्तमान में अधिवक्ता अधिनियम 1961 प्रभावशील है, जिस पर देश के किसी भी अधिवक्ता को कोई आपत्ति नहीं है। प्रस्तावित बिल में अधिवक्ताओं के संगठन में डॉक्टर, सीए, रिटायर्ड जज, प्रशासनिक अधिकारी, इंजीनियर, समाजसेवी के नाम पर मनोनित करने का जिक्र है, जो अधिवक्ता समुदाय के सामूहिक हित के विपरीत है।
अधिवक्ताओं को न्यायालय के समक्ष स्वतंत्र रूप से पैरवी करने से रोकने का एक सुनियोजित षडय़ंत्र है। इस कानून के विरोध में 21 अप्रैल शुक्रवार को अधिवक्ता अपने काम का बहिष्कार करेंगे। न्यायालय परिसर के बाहर प्रस्तावित बिल की प्रतियां जलाएंगे। इसके बाद राष्ट्रपति और कानून मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर राष्ट्रीय लॉ कमीशन के चेयरमेन को पद से बर्खास्त करने और प्रस्तावित बिल को रद्द करने की मांग करेंगे। उन्होंने बताया कि आगामी एक मई तक मांग पूरी नहीं की जाती तो देशभर के वकील दो मई को पटियाला हाउस कोर्ट से संसद भवन एवं लॉ कमीशन कार्यालय का घेराव कर जेल भरो आंदोलन करेंगे।

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