शनिवार, 22 अप्रैल 2017

कागजों में बना ओडीएफ ब्लॉक, खुले में शौच कर रहे ग्रामीण, मोदी के स्वच्छ भारत मिशन पर पतीला लगा रहे अफसर

मालखरौदा ब्लॉक की आधी आबादी अभी भी खुले में शौच जाने मजबूर


जांजगीर-चांपा. केन्द्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान जैसी जनकल्याणकारी योजना पर जिला प्रशासन के अधिकारी पलीता लगाने में जुटे हुए हैं। जमीन की बजाए कागजों में शौचालय निर्माण कर मालखरौदा ब्लॉक के ओडीएफ  होने की रिपोर्ट राज्य और केंद्र सरकार को भेजकर अधिकारियों ने पुरस्कार प्राप्त कर वाहवाही लूट ली है, लेकिन हकीकत में आज भी ब्लॉक की आधे से अधिक आबादी खुले में शौच जाने मजबूर है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की पहल पर पूरे देश में स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों को खुले में शौच मुक्त बनाना है। अभियान के तहत घर-घर शौचालय का निर्माण करवाया जाना है तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के लोगों को शौचालय के उपयोग के लिए जागरूक किया जाना है। इस अभियान के तहत जिले के मालखरौदा विकासखंड को ओडीएफ ब्लॉक का दर्जा मिल चुका है, लेकिन अभी भी इस ब्लॉक के गांवों के अधिकांश लोग खुले में शौच जाने मजबूर हैं। मालखरौदा ब्लॉक के शत-प्रतिशत ग्राम पंचायतों को ओडीएफ ग्राम का दर्जा प्राप्त हो चुका है, जहां घर-घर शौचालयों का निर्माण होना बताया जा रहा हैं, जबकि हकीकत में स्थिति कुछ और ही है। इस ब्लॉक के कई ग्राम पंचायतों में शौचालय आधे-अधूरे निर्मित मिले। 

इस संबंध में जब संबंधित ग्राम पंचायतों के संरपचों से बात की गई तो उनका कहना था कि जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी के दबाव के चलते उन्होंने घर-घर शौचालय निर्माण तो शुरू करवाया, लेकिन समय पर निर्माण की राशि प्राप्त नहीं हुई। इस वजह से कुछ घरों के शौचालय अधूरे रह गए। उनका यह भी कहना था कि यदि शासन से उन्हें समय पर राशि मिल जाए तो वे निर्माण को पूर्ण करवा देंगे। बहरहाल, आधे-अधूरे शौचालय निर्माण से ग्रामीण अभी भी खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं।

दरवाजे और सीट गायब

मालखरौदा विकासखंड के कई ग्राम पंचायतों में जब घर-घर जाकर शौचालयों की स्थिति का पता लगाया गया तो कई शौचालयों के छत, दरवाजे व सीट गायब मिले। ऐसी स्थिति में गांव में ग्रामीण शौचालयों का उपयोग नही कर रहे है। कई हितग्राही के घर में शौचालयों के निर्माण काफी गड़बडिय़ां पाई गई। जहां हितग्राहियों द्वारा स्वयं से शौचालय का निर्माण करने के बावजूद तय स्टीमेट के अनुसार मटेरियल उपलब्ध नहीं कराया गया। हितग्राहियों को 1200 ईंट के स्थान पर 900-1000 ईंट, 6 बोरी सीमेंट के स्थान पर 4 बोरी सीमेंट दी गई है।

इसलिए अटक गई राशि

जानकारी के अनुसार ओडीएफ  घोषित हो चुके ग्राम पंचायतों में सैकड़ो हितग्राही प्रोत्साहन राशि के लिए सरपंच, सचिव व संबंधित कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हितग्राहियों को संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। जिला पंचायत के अफसरों का कहना है कि हितग्राही से शौचालय उपयोगिता प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही उसके बैंक खाते में प्रोत्साहन राशि की किस्त जमा कराई जाती है। 

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