रविवार, 2 अप्रैल 2017

अवकाश के दिन दफ्तर खोल बीआरसी टटोल रहे थे फाइल, कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार पहुंचे शिक्षा मिशन कार्यालय

बीआरसी पर गणवेश खरीदी से संबंधित फाइलों में हेरफेर करने का लगा आरोप

 

जैजैपुर. राजीव गांधी शिक्षा मिशन के विकासखंड समन्वयक की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर उन्हें मूल पद पर भेजे जाने का आदेश शनिवार की देर शाम सोशल मीडिया के जरिए जैसे ही आमलोगों तक पहुंचा तो गणवेश घोटाला मामले में शीघ्र कार्यवाही की उम्मीद जगी, लेकिन आदेश की भनक पाते ही दागी बीआरसी ने उच्चाधिकारियों को सूचना दिए बगैर रविवार को दफ्तर खोल दिया। आरोप है कि बीआरसी ने गणवेश घोटाला मामले से जुड़े कई दस्तावेजों को गायब करवा दिया है। ऐसे में गणवेश घोटाला मामले में अब लीपापोती होने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, जैजैपुर में पदस्थ बीआरसी जन्मेजय चंद्रा का शनिवार शाम ट्रान्सफर हो गया। शासन से जारी आदेश के तहत उन्हें उनके मूल पद पर भेज दिया गया है। सोशल मीडिया पर आदेश की कापी जैसे ही वायरल हुई तो लोगों को लगा की गणवेश घोटाला में बीआरसी का नाम आने के बाद शायद घोटाले की निष्पक्ष जांच हो सके,  इसीलिए उनको उनके मूल पद पर वापस भेजने का निर्णय लिया गया है, लेकिन रविवार को कुछ लोगों ने स्थानीय पत्रकारों को सूचना दी कि बीआरसी जन्मजय चंद्रा और उनके साथियों द्वारा बीआरसी कार्यालय को खोलकर गणवेश मामले से संबंधित कागजात की हेराफेरी की जा रही है। इससे मीडियाकर्मी हरकत में आए और तत्काल बीआरसी कार्यालय पहुंचे। 

वहां बीआरसी चंद्रा तथा अन्य लोग बैठकर कुछ कागजात टटोल रहे थे। मीडियाकर्मियों ने जब उनसे जानकारी ली तो बीआरसी चंद्रा ने बताया कि उन्होंने विकासखंड शिक्षा अधिकारी के आदेश पर कार्यालय खोला है। बीआरसी चंद्रा के इस जवाब से मीडियाकर्मियों को संदेह हुआ, तब उन्होंने बीईओ बी एक्का से मोबाइल पर संपर्क किया। बीईओ से पूछा गया कि क्या उनके द्वारा बीआरसी कार्यालय खोलने की अनुमति दी गई है, तब बीईओ ने बीआरसी कार्यालय खोलने संबंधी अनुमति नहीं देने की बात कही। ऐसे में मीडियाकर्मियों ने मोबाइल पर कॉल कर कलेक्टर को वस्तुस्थिति से अवगत करवाया। रविवार अवकाश के दिन बीआरसी चंद्रा द्वारा दफ्तर खोले जाने की सूचना पाकर कलेक्टर हरकत में आए और उन्होंने जैजैपुर के तहसीलदार को तत्काल बीआरसी कार्यालय पहुंचकर वस्तुस्थिति का पता लगाने कहा। 

कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार सुनील अग्रवाल बीआरसी कार्यालय पहुंचे और बीआरसी चंद्रा से पूछताछ की। इस दौरान बीआरसी चंद्रा ने तहसीलदार अग्रवाल को गुमराह करने की कोशिश की। वस्तुस्थिति को समझने के बाद तहसीलदार ने बीआरसी कार्यालय में ताला लगवाया और पूरे मामले की रिपोर्ट कलेक्टर को दी। बहरहाल, बीआरसी चंद्रा द्वारा की गई इस हरकत से एक बार जरूर साफ हो गया है कि वे अवकाश के दिन गणवेश घोटाला से संबंधित फाइलों को गायब करने के लिए बीआरसी दफ्तर पहुंचे थे। अब देखना यह है कि इस मामले में कलेक्टर आगे क्या कार्यवाही करते हैं।

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