जांजगीर-चांपा. विकासखंड मुख्यालय बम्हनीडीह के बोकरमाल तालाब में सरपंच की शह पर अवैध ईंट भट्ठे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद निस्तारी तालाब में ईंट भट्ठा लगाने के लिए पंचायत में बकायदा प्रस्ताव पारित कर अनुमति दिया जाना कई सवालों को खड़ा कर रहा है। ऐसा लग रहा है कि मानो बम्हनीडीह के छुटेभैया नेताओं की मुट्ठी में प्रशासनिक अफसर हैं, जो खुलेआम चल रहे अवैध कारोबार को देखते हुए भी आंखों में पट्टी बांधे हुए हैं।
जिले में एक तरफ जहां पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। लोगों को एक-एक बूंद पानी के लिए तरसना पड़ रहा है, जिसे देखते हुए हसदेव बांगों नहर से पानी छोडक़र तालाबों को भरने की कवायद की जा रही है। वहीं विकासखंड मुख्यालय बम्हनीडीह में स्थित सबसे पुराने निस्तारी तालाब बोकरमाल को भरने के बजाय अवैध कारोबार के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। दरअसल, गर्मी की वजह से बोकरमाल तालाब पूरी तरह से सूख चुका है। पंचायत प्रतिनिधि या स्थानीय प्रशासन अगर चाहते तो नहर अथवा बोरबेल्स के पानी से इस तालाब को भरकर लोगों को निस्तारी समस्या से उबार सकते थे, लेकिन बम्हनीडीह की महिला सरपंच ने चंद रूपयों के लालच में आकर इस तालाब को ईंट भट्ठा लगाने के लिए मिट्ठू जायसवाल नामक व्यक्ति को किराए पर दे दिया है। दिलचस्प बात यह है कि तालाब में ईंट भट्टा लगाने के लिए बकायदा ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पारित कर अनुमति दिए जाने की बात सामने आ रही है।
सरपंच के मुताबिक, ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पारित कर ईंट भट्टा लगाने के लिए तालाब को बसंत कुम्हार नामक व्यक्ति को किराए पर दिया गया है, जबकि वास्तव में वह केवल मोहरा है। सरपंच ने असल में इस तालाब को मिट्ठू जायसवाल को दिया है, जिसमें उसका पुत्र अवैध रूप से ईंट बनवा रहा है। मगर लोगों को गुमराह करने के लिए बसंत कुम्हार को सामने लाया जा रहा है। दूसरी ओर, विकासखंड मुख्यालय स्थित निस्तारी तालाब में ईंट का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है और वहां पदस्थ नायब तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ तथा अन्य अधिकारी आंख पर पट्टी बांधे हुए हैं। बताया जाता है कि छुटभैया नेताओं के दबाव में आकर वे इस अवैध कारोबार को बंद करवाने रूचि नहीं ले रहे हैं। खास बात यह है कि खनिज विभाग के अफसरों को इस अवैध कारोबार के संबंध में पूरी जानकारी है, लेकिन वे ईंट भट्ठा संचालक से मोटी रकम लेकर चुप बैठे हुए हैं। यही वजह है कि निस्तारी तालाब में चल रहे ईंट भट्ठे के अवैध कारोबार को बंद करवाने प्रशासनिक अधिकारी और खनिज अमला रूचि नहीं दिखा रहा है।
जिले भर में चल रहे हजारों भट्ठे
जिले भर में अवैध ईंट भट्ठे का कारोबार अंगद की तरह पांव जमा चुका है। बम्हनीडीह, जैजैपुर, मालखरौदा तथा डभरा विकासखंड के गांवों में ही हजारों अवैध ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। जैजैपुर क्षेत्र में तो एक ही जगह पर पन्द्रह से बीस ईंट भट्ठे लगे हुए हैं। जबकि अवैध ईंट भट्ठों के संचालकों पर कार्यवाही करने जिला प्रशासन विभागीय अफसरों को बार-बार निर्देश दे रहा है, लेकिन विभागीय अफसर गिने-चुने भट्ठा संचालकों पर जुर्माना ठोंककर खानापूर्ति कर रहे हैं, जिससे अधिकारी भली-भांति वाकिफ हैं। इससे ऐसा लग रहा है कि प्रशासनिक अफसरों के संरक्षण में ही जिले में अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
खनिज अफसरों का महीना फिक्स
जिले में संचालित एक-एक ईंट भट्ठे की पूरी कुंडली खनिज विभाग के जिला अधिकारी से लेकर खनिज निरीक्षकों के पास उपलब्ध है, लेकिन किसी पर कार्यवाही नहीं हो रही है। इसके पीछे के कारण को जानने पर चौंकानें वाली बात सामने आई है। अधिकांश ईंट भट्ठा संचालकों का कहना है कि वे खनिज विभाग के अफसरों को भट्ठे के हिसाब से महीना देते हैं। उनका कहना है कि यदि छोटा भट्ठा है तो पांच हजार और बड़ा भट्ठा होने पर दस हजार रुपए महीना फिक्स है। वे यह भी कहते हैं कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। खनिज विभाग के अफसर हर साल अवैध कारोबार के लिए महीना लेते हैं, जिसके कारण उनके खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही नहीं होती।

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