डभरा. हमेशा विवादों में रहने वाले समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डभरा के बीएमओ ने एक बार फिर मानवता को शर्मशार किया है। उन्होंने अस्पताल पहुंचते कराहते मरीज से मुख मोड़ा है। आरोप है कि सीएचसी पहुंचे घायलों का उपचार करने के बजाय वे अपने क्लीनिक में व्यस्त रहे हैं। बीएमओ के इस रवैये को लेकर क्षेत्रवासियों में गहरा आक्रोश है।
अस्पताल को मंदिर और डॉक्टर को भगवान कहा जाता है, लेकिन भगवान ही अगर अपने दायित्वों को भूल जाए तो आम इंसान का क्या होगा। जी हां, कुछ ऐसा ही वाक्या सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डभरा में एक बार फिर सामने आया है। जानकारी के अनुसार, खेमड़ा के तीन बाइक सवार युवकों की बीती रात ट्रेक्टर से भिड़ंत हो गई। इस हादसे में तीनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां ड्यूटी डॉक्टर तथा बीएमओ एनपी मिश्रा ड्यूटी से नदारद रहे। उनकी अनुपस्थिति में अस्पताल स्टॉफ द्वारा घायलों के टूटे पैरों को सहारा देने के लिए गन्दे कार्टून के पु_ों का उपयोग किया गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान किसी प्रकार के स्ट्रेलाइजेसन का ध्यान नहीं दिया गया। इससे घायल कराहते रहे। वहीं ड्यूटी डॉक्टर मिश्रा अपने निजी क्लीनिक में बैठकर मरीज देखते रहे। लोगों ने बताया कि इस घटना के संबंध में जानकारी देकर जब उन्हें अस्पताल बुलवाया गया, तब उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायलों का उपचार करना मुनासिब नहीं समझा। वहीं जब मरीजों के परिजनों से मीडियाकर्मियों ने बात की तो उन्होंने बताया कि मरीजों की शरीर से काफी खून बह गया है। एक मरीज का पैर दो टुकड़ा हो गया है, मगर इलाज के लिए न तो डॉक्टर हैं न ही आवश्यक दवाएं। घायल युवक के भाई ठंडाराम साहू एवं अन्य लोगों का आरोप है कि जब उन्होंने घायलों के इलाज की गुहार लगाई तो उन्हें ही आवश्यक दवाएं और मरहम-पट्टी दुकान से लाने के लिए कहा गया। वहीं जब मीडिया की टीम ने ड्यूटी सिस्टर रश्मि शतरंज से बात की तो उनका कहना था कि बीएमओ मिश्रा मरीजों को देखकर घर चले गए हैं। दुख की बात तो ये है कि मरीज के पैर से काफी खून बह गया था, लेकिन डॉक्टर मिश्रा को प्राथमिक उपचार करने का समय तक नहीं मिला। एक नर्स और एक कम्पाउंडर के सहारे डभरा सीएचसी को छोडक़र बीएमओ मिश्रा अपने निजी क्लीनिक में व्यस्त रहे।
कुंडली मारकर बैठे हैं डॉक्टर मिश्रा
आपको बता दें कि डभरा बीएमओ डॉ. मिश्रा लगातार 22 वर्षो से एक ही जगह पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं, जिसके कारण उनके हौसले इतने बुलन्द है कि उनको न किसी जनप्रतिनिधियों की फिक्र है और न ही उच्चाधिकारियों की चिंता है। सोंचने वाली बात ये है कि एक सरकारी डॉक्टर पिछले कई सालों सरकारी ओपीडी में कम बल्कि, अपने निजी क्लिनिक में ज्यादा व्यस्त रहते हैं, जिस पर आज तक किसी उच्चालाधिकारियों की नजर नहीं पड़ी, जिसकी वजह आज मरीजों को ये दिन देखना पड़ रहा है।

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