राजेंद्र राठौर@जांजगीर-चांपा. प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का दावा है कि सरकार की संजीवनी एक्सप्रेस सेवा शहर से लेकर बीहड़ों में बसे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में कारगर साबित हुई है, लेकिन उनका यह बुधवार को तब झूठा साबित हुआ, जब शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला ससहा की एक छात्रा अचानक बीमार हो गई। बीमार छात्रा को पामगढ़ स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाने जब स्कूल के प्राचार्य ने 108 नंबर पर कॉल किया तो उन्हें अजीबो-गरीब जवाब मिला, जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। 108 के कंट्रोल रूम के ऑपरेटर का जवाब था कि पामगढ़ सीएचसी का संजीवनी वाहन बिगड़ा हुआ है, नवागढ़ और अकलतरा से ससहा की दूरी अधिक है। ऐसे में बेहतर होगा कि छात्रा को समय पर अस्पताल पहुंचाने प्राइवेट वाहन कर लें।
दरअसल, पामगढ़ विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ससहा में संचालित शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला में बुधवार को सुबह करीब 11 बजे प्रार्थना हुई, जिसमें विद्यालय के करीब साढे सात सौ विद्यार्थी शामिल हुए। इसी दौरान कक्षा नवमीं की छात्रा रेश्मा खरे पिता जीवनलाल खरे अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी। छात्रा के अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिरने से स्कूल स्टॉफ सकते में आ गया। स्कूल के प्राचार्य आरएस पैकरा ने स्टॉफ की मदद से छात्रा रेश्मा को तत्काल स्टॉफ रूम पहुंचवाया, जहां उसे पंखे के हवा के नीचे रखकर होश में लाने की कोशिश की गई, लेकिन छात्रा को होश नहीं आया। ऐसे में विद्यालय के शिक्षक एवं कुछ छात्राओं ने पानी के छींटे मारकर उसे होश में लाने का प्रयास किया, किन्तु उनका यह नुस्खा भी कारगर साबित नहीं हुआ। देखते ही देखते छात्रा रेश्मा के शरीर ने हलचल करना बंद कर दिया और उसका पूरा शरीर ठंडा पडऩे लगा, तब प्राचार्य पैकरा ने गांव में संचालित प्राथमिक उप स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता को स्कूल बुलवाया और छात्रा परीक्षण करने को कहा। स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने ब्लड प्रैशर जांचने के बाद सबकुछ सामान्य होने की बात कहते हुए आगे का उपचार करने से अपना हाथ खड़ा कर दिया। इसके बाद प्राचार्य पैकरा ने छात्रा के परिजनों को मोबाइल से मामले की जानकारी दी।
चूंकि छात्रा का गृहग्राम स्कूल से करीब 8 किलोमीटर दूर है, इसलिए उसके परिजनों को स्कूल पहुंचने में विलंब हुआ। इस बीच छात्रा रेश्मा की तबीयत और बिगडऩे लगी, जिसे देखते हुए प्राचार्य पैकरा ने संजीवनी 108 को कॉल किया। संजीवनी 108 सेवा के कंट्रोल रूम में तैनात ऑपरेटर ने पूरी जानकारी लेने के बाद जो जवाब दिया, वह प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह के दावों की पोल खोलने वाला था। ऑपरेटर ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पामगढ़ में उपलब्ध संजीवनी वाहन महीनों से खराब है, जिसकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है। वहीं नवागढ़ सीएचसी में संजीवनी वाहन तो है, लेकिन वह किसी मरीज को छोडऩे के लिए गया हुआ है। ऑपरेटर ने कहा कि अकलतरा में संजीवनी वाहन उपलब्ध है, लेकिन वहां से ससहा की दूरी अत्यधिक है। ऐसे में बेहतर यही होगा कि प्राइवेट वाहन की व्यवस्था कर छात्रा को अस्पताल पहुंचाएं। ऑपरेटर का यह जवाब सुनकर प्राचार्य पैकरा ने पहले तो सरकार को खूब कोसा, इसके बाद अपने स्टॉफ को गांव में प्राइवेट वाहन की व्यवस्था करने भेजा। इस चक्कर में बीमार छात्रा को अस्पताल पहुंचाने में काफी विलंब हो गया। यहां बताना लाजिमी होगा कि ससहा, संसदीय सचिव एवं पामगढ़ विधायक अंबेश जांगड़े का गृह क्षेत्र है। संसदीय सचिव यहां हर वक्त उपलब्ध रहते हैं, ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य के बिगड़े संजीवनी वाहन में आवश्यक सुधार करवाने आखिर वे रूचि क्यों नहीं दिखा रहे हैंं, यह लोगों के समझ से परे है। वहीं इस घटना से सरकारी दावों की पोल भी खोलकर रख दी है। बहरहाल, विकासखंड मुख्यालय पामगढ़ के समीपस्थ ग्राम ससहा में यदि संजीवनी सेवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है तो प्रदेश के बीहड़ इलाकों में इस सेवा का लाभ लोगों को कैसे मिल रहा होगा, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
पत्रकार ने दी जानकारी तो आए हरकत में
किसी काम से पामगढ़ पहुंचे जिला मुख्यालय के पत्रकार लखनलाल चंद्रा ने इस घटना की जानकारी जब संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े को मोबाइल पर दी और क्षेत्र की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए तो संसदीय सचिव जांगड़े की बोलती बंद हो गई। पहले तो उन्होंने अपनी सफाई देने की कोशिश की, लेकिन जब उनकी एक न चली तो उन्होंने तत्काल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के साथ ही पामगढ़ के बीएमओ से बात कर बीमार छात्रा को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन व्यवस्था करवाने का आश्वासन दिया। इसके कुछ देर बाद संसदीय सचिव जांगड़े ने पत्रकार चंद्रा को दोबारा कॉल कर बताया कि सीएमएचओ से बात करके उन्होंने छात्रा को अस्पताल पहुंचाने न केवल वाहन की व्यवस्था करवाई है, बल्कि उसके बेहतर उपचार के निर्देश भी चिकित्सकों को दिए हैं।
लगातार बेहोश हो रही स्कूल की छात्राएं
शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला ससहा में तकरीबन साढे सात सौ विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। बुधवार को छात्रा रेश्मा के बेहोश होने की घटना सामने आने के बाद स्कूल से संबंधित कई और रहस्यों से पर्दा उठा। स्कूल की कुछ छात्राओं ने बताया कि करीब आठ दिन पहले कक्षा नवमीं की ही एक अन्य छात्रा सुकृता साहू भी अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर गई थी। इससे स्कूल में हडक़ंप मच गया था। स्कूल प्रबंधन ने मामले की जानकारी जब छात्रा के परिजनों को दी, तब वे तत्काल स्कूल पहुंचे और वाहन की व्यवस्था कर छात्रा सुकृता को सीधे बिलासपुर स्थित अस्पताल ले गए। वहां कई दिनों तक चले उपचार के बाद सुकृता का स्वास्थ्य ठीक हुआ। इसी तरह की घटना पिछले माह भी होने की बात छात्राओं ने कही है। स्कूल की छात्राओं से चर्चा करने पर पता चला है कि पिछले कुछ दिनों से यहां छात्राएं एक-एककर लगातार बेहोश हो रही हैं।
धूप के कारण हुई होगी बेहोश
स्कूल मेें विद्यार्थियों की संख्या बहुत ज्यादा है। इसलिए खुले मैदान में प्रार्थना करवाई जाती है। संभवत: धूप के कारण छात्रा बेहोश हुई होगी। स्कूल प्रबंधन उसके समुचित उपचार की व्यवस्था कर रहा है। छात्रा के अभिभावकों को भी तत्काल सूचना दी गई है। पूर्व में एक-दो छात्राएं बेहोश हुई थी, लेकिन वे बाद में ठीक हो गई। स्कूल प्रबंधन द्वारा विद्यार्थियों का पूरा ध्यान रखा जाता है।


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