बुधवार, 25 अक्टूबर 2017

जिला जेल का प्राधिकरण की सचिव ने किया निरीक्षण, विधिक शिविर आयोजित कर बंदियों को दी कानूनी जानकारी

जांजगीर-चांपा. जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव के निर्देश पर प्राधिकरण की सचिव शुभदा गोयल द्वारा 25 अक्टूबर को जिला जेल जांजगीर का निरीक्षण किया गया। इस दौरान वहां निरूद्ध बंदियों को कानूनी जानकारी देने के उद्देश्य से विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन भी किया गया।

प्राधिकरण की सचिव शुभदा गोयल ने बताया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट पिटीशन (सि.) क्रमांक 406/2013 में जेलों की स्थिति एवं बंदियों के संबंध में दिए गए दिशा-निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में प्राधिकरण के अध्यक्ष के निर्देश पर 24 अक्टूबर को उपजेल सक्ती एवं बुधवार 25 अक्टूबर को जिला जेल जंाजगीर का निरीक्षण किया गया। उन्होंने बताया कि वांछित बिन्दुओं पर निरीक्षण प्रतिवेदन जल्द ही प्राधिकरण अध्यक्ष के समक्ष अग्रिम कार्यवाही के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। प्राधिकरण की सचिव गोयल ने बताया कि जिला जेल जंाजगीर के निरीक्षण के बाद सभी बंदियों को एकत्रित कर उन्हें उनके विधिक अधिकारों तथा नि:शुल्क विधिक सहायता योजना के बारे में बताया गया। जिला जेल में संचालित लीगल एड क्लीनिक के बारे में बताया गया, जहंा वे अपनी विधिक समस्याएं बता सकते हैं। लीगल एड क्लीनिक में उपस्थित होने वाले अधिवक्ता समुचित विधिक सलाह प्रदान करते हैं तथा आवश्यकता होने पर विधिक सहायता संबंधी कार्यवाही के लिए आवश्यक पत्राचार भी करते हैं। बंदियों को बताया गया कि यदि उनकी ओर से न्यायालय में पैरवी के लिए अधिवक्ता नहीं हैं तो वे जेल प्रशासन अथवा जिला जेल में संचालित लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से अपना अनुरोध पत्र प्राधिकरण को प्रेषित करें, ताकि नियमानुसार उनकी ओर से पैरवी के लिए अधिवक्ता नियुक्त किया जा सके। इसी प्रकार जब कभी भी न्यायालय द्वारा निर्णय पारित कर दंडादेश दिया जाता है तो निर्णय की एक प्रति नि:शुल्क दोषसिद्ध बंदी को उपलब्ध कराई जाती है। बंदियों को निर्णय की वह प्रति सुरक्षित रखना चाहिए ताकि जब कभी निर्णय के विरूद्ध उपर के न्यायालय में अपील करना हो तो उस प्रति को प्रस्तुत किया जा सके।

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