जांजगीर-चांपा. सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए केन्द्रीय विद्यालय अब सरकारी स्कूलों को गोद लेंगे। केन्द्रीय विद्यालयों को सरकार ने यह जिम्मा सौंपा है। मानव संसाधन विभाग मंत्रालय ने देश के सभी केन्द्रीय विद्यालयों को शैक्षणिक सत्र 2017-18 से अपने पास के सरकारी स्कूल को गोद लेने का आदेश दिया है। इसके तहत सरकारी स्कूल के विद्यार्थी महीने में एक या दो दिन केन्द्रीय विद्यालय जाकर पढ़ाई करेंगे।
स्मार्ट क्लास, वर्चुअल क्लारूम, प्रयोगशाला, पुस्तकालय का प्रयोग करेंगे। वहीं केन्द्रीय विद्यालय के शिक्षक सरकारी स्कूलों के छात्रों को पढ़ाएंगे। सरकारी स्कूल के शिक्षकों को भी केन्द्रीय विद्यालय के शिक्षकों द्वारा पढ़ाई के स्मार्ट तरीकों की जानकारी दी जाएगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इस फरमान के बाद जिला मुख्यालय जांजगीर में संचालित केन्द्रीय विद्यालय प्रबंधन ने सरकारी स्कूल की तलाश शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि आगामी जुलाई से इस पर काम शुरू हो जाएगा।
संसाधनों की कमी से शिक्षा बाधित
सरकारी स्कूलों को केन्द्रीय विद्यालय गोद लें, इस निर्णय के पीछे बड़ा कारण संसाधनों का अभाव है। देश में आज भी सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी है। सभी सरकारी स्कूलों में सीमित संसाधन हैं। लैब, लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लासरूम का अभाव है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के छात्र आधुनिक शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए केन्द्रीय विद्यालय संगठन और शिक्षा विभाग ने यह करार किया है। इस पर एमएचआडी ने मोहर लगा दी है।
इन सुविधाओं को मिलेगा लाभ
सरकारी विद्यालयों के छात्रों को केन्द्रीय विद्यालय में लैब, लाइब्रेरी, हॉल, स्मार्ट क्लासरूम, रिसोर्स रूम्स, जूनियर साइंस लैब, कम्प्यूटर क्लास, प्ले ग्राउंड, अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर का लाभ मिलेगा। प्रदर्शनी, सेमीनार व कार्यशालाओं में भी केन्द्रीय विद्यालय के शिक्षक सरकारी स्कूलों के छात्रों को लेने की जिम्मेदारी निभाएंगे। पढ़ाई के साथ स्वच्छता अभियान, सामुदायिक सेवाओं और आधुनिक तरीकों से शिक्षण पद्धति की जानकारी शिक्षकों को भी दी जाएगी।
गोद लेने की प्रक्रिया शुरू
केन्द्रीय विद्यालय संगठन से आदेश आया है कि किसी भी सरकारी स्कूल को गोद लेकर छात्रों को शिक्षिक करें। स्कूल के पास संचालित सरकारी विद्यालय को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही सरकारी स्कूल के छात्रों को अपने स्कूल में बुलाकर शिक्षित करेंगे।

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