सोमवार, 12 जून 2017

अपनी मर्जी से रासायनिक खाद नहीं खरीद सकेंगे किसान, खाद खरीदने पर किसानों का मशीन में लिया जाएगा थंब इंप्रेशन

जांजगीर-चांपा. किसान अब अपनी मर्जी से रासायनिक खाद की खरीदी नहीं कर सकेंगे। किसी भी सरकारी समिति से खाद खरीदने पर किसानों का मशीन में थंब इंप्रेशन लिया जाएगा। मशीन बता देगी कि उस किसान को कौन सी और कितने खाद की जरूरत है। उससे अधिक खाद किसान को नहीं दिया जाएगा। किसानों का पूरा डेटा कंप्यूटर में फीड कर दिया गया है। इस तरह की पहल से किसान अधिक मात्रा में रासायनिक खाद का उपयोग नहीं कर पाएंगे।

जिले के किसानों का स्वाइल हेल्थ कार्ड बनाया जा रहा है। इस कार्ड में किसानों की पूरी जमीन का विवरण है, कितनी जमीन में खेती हो रही है और कितनी जमीन परिया है। जिन खेत में फसल बोई जा रही है उस खेतों में कौन सी और कितनी खाद की जरूरत है, यह सब जानकारी कृषि विभाग के सिस्टम में अपलोड की जा रही है। जिले में अब तक हजारों किसानों का स्वाइल कार्ड बनाया जा चुका है। कार्ड बनाते वक्त किसानों के खेत के अलावा गांव व पता भी एंट्री की जा रही है। स्वाइल कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने के बाद यह सिस्टम शुरू हो जाएगा। किसान अब मनमाने तरीके से अधिक मात्रा में रासायनिक खाद का उपयोग नहीं कर पाएंगे। नियमित रूप से खाद का उपयोग होने से जमीन की उर्वरक क्षमता पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा।

निजी दुकानों में पीओएस मशीन से होगी खरीदी

सहकारी समितियों के अलावा लाइसेंसी निजी दुकानों में भी पीओएस मशीन लगाई जाएगी। कृषि विभाग, किसानों के खेतों की मिट्टी का सैंपल ले रहा है, जिसके आधार पर विभाग के पास यह डाटा है कि किसान के पास कितनी जमीन है और खेत की मिट़्टी में कौन से उर्वरक की कमी या अधिकता है। ऐसे में किस खाद को कितनी मात्रा में डालना है, यह सब ऑनलाइन पता चल जाएगा। इससे निजी दुकानदार मनमाने तरीके से खाद नहीं बेच पाएंगे। इससे किसानों को रासायनिक खाद के लिए अधिक रुपए खर्च नहीं करना पड़ेगा और उनके पैसे बचेंगे, जिससे वे दूसरा काम कर सकेंगे।

इस पहल से खाद की नहीं हो सकेगी कालाबाजारी

हर साल सरकारी सब्सिडी से हजारों मैट्रिक टन यूरियाए डीएपी और अन्य खाद सोसायटियों में पहुंचती है, लेकिन कालाबाजारी के चलते किसानों का इसका पूरा लाभ नहीं मिलता है। इस प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए यह पहल किया जा रहा है। इसके लिए सभी सोसायटियों में पीओएस मशीन दी जाएगी। इससे किसानों पर विभाग मॉनिटरिंग भी कर पाएगा कि उसने साल में कितनी बार खाद खरीदी है और कितनी जमीन है। अगर बार-बार खाद खरीद रहा है, तो उसका क्या उपयोग हो रहा है। इससे बड़े किसान खाद की कालाबाजारी नहीं कर पाएंगे।

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