सोमवार, 12 जून 2017

क्लोज सीजन शुरू होने से पहले मछली मारने में जुटे मछुआरे, स्थानीय मार्केट में मछली की आवक में तेजी, बाहरी आवक कम

जांजगीर-चांपा. क्लोज सीजन शुरू होने में कुछ ही दिन शेष है। इससे पहले मछुआरे मछली मारने के कार्य में दु्रत गति से जुटे हुए हैं। यही वजह है कि स्थानीय मार्केट में मछली की आवक में तेजी आई है। बाहरी आवक कम है। मानसून आने के बाद मछलियों के प्रजनन काल के कारण जिला प्रशासन मछली मारने पर हर साल प्रतिबंध लगा देता है।

ग्रामीण अंचल के तालाबों में इन दिनों मछुआरे जमकर मछली मार रहे हैं। नदी व नालों में भी मछुआरों को मछली मारते देखा जा सकता है। अधिकाधिक मछली मारने के कारण मार्केट में मछली की आवक तेज हो गई है। भारी मात्रा में मछली उपलब्ध होने के कारण बिकने से बची मछलियों को भूनकर सूखी मछली भी बनाया जा रहा है। मछली मारने के काम में तेजी आने से मछुआरों को अच्छी आमदनी हो रही है। मछली व्यवसायियों की कमाई बढ़ गई है। मार्केट में मछलियों के दाम प्रति किलो 100 से 140 रुपए किलो तक है। मार्केट में स्थानीय मछलियों की मांग बनी हुई है, जिससे बाहरी मछलियों की पूछपरख कम हो गई है। गांव के तालाबों में मछुआरे लगातार मछली मार रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को सस्ते दर पर मछलियां उपलब्ध हो रही है।

16 जून से लग जाएगा प्रतिबंध

नदी-नालों से मछली मारने पर शासन 16 जून से प्रतिबंध लगा देगा, क्योंकि वर्षा ऋ तु में मछलियों की वंश वृद्घि होती है, जिसका संरक्षण जरूरी है। नदी-नालों, सहायक नदियों जिन पर सिंचाई के तालाब, जलाशय निर्मित हो, इन स्थानों से मछली मारने पर प्रतिबंध लग जाएगा। यह प्रतिबंध 15 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान मछली मारते पकड़े गए तो शासन के आदेशानुसार 5 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। अपराध सिद्घ होने पर एक वर्ष के लिए सजा भी हो सकती है। इस दौरान जिला मत्स्य विभाग मछुआरों और नागरिकों को मछली मारने पर प्रतिबंध लगाने की सूचना सार्वजनिक कर चेतावनी देते है। केवल छोटे तालाब या अन्य जल स्रोत जिनका संबंध किसी नदी-नाले से नहीं है, इन पर मछली मारा जा सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें