जांजगीर-चांपा. एक तरफ जिला प्रशासन जहां शासकीय भूमि को संरक्षित के लिए चिन्हाकिंत कर करने में लगा है तो वहीं दूसरी ओर पामगढ़ विकासखण्ड के ग्राम पंचायत खपरी में जनपद उपाध्यक्ष ने आठ एकड़ शासकीय भूमि पर कब्जा कर रखा है। शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने वाले यहां कई लोग हैं, जिससे मवेशियों के चरागाह की समस्या उत्पन्न होने लगी है। अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध कार्यवाही नहीं होने से गांव के अन्य लोग भी शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने लगे हैं। इससे गांव का माहौल पूरी तरह से खराब होने लगा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के पामगढ़ विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत खपरी व उसके आश्रित ग्राम ताड़पारा में शासकीय भूमि पर बेजाकब्जा जोरों से होने लगी है। इस आशय की शिकायत ग्राम पंचायत के सरपंच व कुछ पंचों ने कलेक्टर से की है, लेकिन मामले में किसी तरह की कार्यवाही नहीं हुई है। इससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं। ज्ञात हो कि पिछले कई सालों से लोग गांव के बाहर स्थित मैदानों में बेजाकब्जा कर खेत बना रहे थे, जिसमें धान की फसल उगाई जाती रही है। ग्राम पंचायत की बैठक में बनी आम सहमति से पिछले वर्ष यहां बेजाकब्जाधारी लोगों के फसल को चरा दिया गया था और गांव से बेजाकब्जा हटाने का मुहिम चलाई गई। इसके बाद गांव में बेजाकब्जा को लेकर एक अच्छी राय ग्रामीणों के बीच बन गई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद जनपद पंचायत पामगढ़ के उपाध्यक्ष ललित नायक, बिसाहूराम कश्यप एवं पुरूषोत्तम कश्यप सहित कुछ लोगों ने लंबी-चौड़ी शासकीय भूमि पर बेजाकब्जा कर लिया है, जिसमें उनके द्वारा धान की बोनी की गई है। यहां बताना लाजिमी होगा कि यह गांव शुरू से ही विवादित रहा है, जहां आपसी विवाद के कारण कई लोगों ने अपनी जाने गंवाई है।
बताया जा रहा है कि जब से ललित नायक राजनीति के क्षेत्र में कदम रखे हं तब से यह गांव फिर से विवादों को लेकर चर्चा में आ गया है। बताया यह भी जाता है कि जनपद पंचायत पामगढ़ के उपाध्यक्ष ललित नायक द्वारा लगभग 7 से 8 एकड़ जमीन पर बेजाकब्जा कर धान की बोआई कर ली गई है। वहीं बिसाहू तथा पुरूषोत्तम कश्यप द्वारा ग्राम पंचायत द्वारा संरक्षित भूमि में धान बोआई की गई है। इससे गांव का माहौल पूरी तरह से खराब होने लगा है। गांव के लोगों का कहना है कि ललित नायक ने राजस्व विभाग के अधिकारी से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर शासकीय भूमि पर कब्जा किया है, जबकि गांव के लोगों को उनकी कई पीढिय़ों के बारे में पूरी तरह से जानकारी है।
वर्तमान में जिस भूमि पर उनके द्वारा धान की बोआई की गई है, वह वास्तव में शासकीय भूमि है, लेकिन पामगढ़ एसडीएम व तहसीलदार द्वारा संरक्षण प्रदान किए जाने के कारण संबंधित लोगों ने जबरिया शासकीय जमीन पर बेजाकब्जा कर लिया है। इस मामले में पटवारी की भूमिका भी संदिग्ध जान पड़ती है, जिनकी मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया है। अगर समय रहते जिला प्रशासन द्वारा बेजाकब्जा नहीं हटवाया जाता है तो आगामी समय में गांव में विवाद होना तय है।

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