शनिवार, 2 सितंबर 2017

पन्द्रह के बजाय इस बार चौदह दिनों का होगा पितृ पक्ष, पूर्णिमा और प्रतिपदा केे एक साथ होने से 6 को होगा प्रतिपदा का श्राद्ध

जांजगीर-चांपा. तथियों में घट-बढ़ के चलते इस बार पितृ पक्ष 15 दिन के बजाय 14 दिनों का ही रहेगा। 5 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के अगले दिन 6 सितंबर को पूर्णिमा तिथि और प्रतिपदा तिथि एक साथ होने से 6 को प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा।

पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से हो रही है, किन्तु इस दिन मध्यान्ह में प्रतिपदा न होने से एक दिन पहले छह सितंबर को ही प्रतिपदा का श्राद्ध किया जाएगा। पितृ पक्ष में षष्ठी तिथि का क्षय हो रहा है। साथ ही त्रयोदशी व चतुर्दशी का श्राद्ध भी एक ही दिन मनाया जाएगा। अमावस्या तिथि दो दिन पडऩे से दो दिन 19 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या मनाएंगे। वहीं 20 सितंबर को स्नान दान की अमावस्या मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 19 सितंबर को दिन में 11.16 बजे लग रही है, जो 20 को सुबह 10.22 बजे तक रहेगी। इस लिहाज से इस बार पितृपक्ष 14 दिन का होगा। महालया भादों की पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन कृष्ण अमावस्या तक रहेगी। ज्योतिषी डॉ. अनिल तिवारी के अुनसार मनुष्यों के लिए तीन ऋण बताए गए हैं। पितृ पक्ष में माता-पिता के प्रति श्रद्धा का समावेश किया गया है। उनके ऋण से मुक्त न होने पर जन्म निरर्थक बताया गया है, इसीलिए सनातन धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित करने को पितृपक्ष महालया की व्यवस्था की गई।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें